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संत पापा फ्रांसिस संत पापा फ्रांसिस 

बुलाहट का स्रोत हमारा साक्ष्य, संत पापा

संत पापा फ्रांसिस ने मरियम सेवक धर्मसंघ के सदस्यों से मुलाकात करते हुए उन्हें अपना संदेश दिया।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार 25 अक्टूबर 2019 (रेई) मरियम सेवकों के धर्मसमाज की शुरूआत सबसे पहले इटली के फ्लोरेन्स शहर में 13वीं शताब्दी में हुई थी। इसकी शुरूआत सात व्यक्तियों के एक समूह द्वारा हुई जिन्होंने अपने को व्यापार हेतु स्वयंसेवकों के रुप में समर्पित किया। यद्यपि यह धर्मसमाज धन्य कुंवारी मरियम के आदर्शों का अनुसरण करता है। आप अपने व्यक्तिगत जीवन में धर्मग्रंथ में चर्चित मरियम की जीवनशैली के अनुसार जीवन जीने का प्रयास करते हैं। इस भांति आप नाजरेत की मरियम के ईश-प्रेरिताई को अपने बुलाहटीय जीवन में सम्माहित करते और उसे “मरियानुम” के रुप में परमधर्मपीठीय ईशशस्त्रीय विभाग द्वारा शिक्षण स्वरुप प्रसारित करते हैं।

मरियम के चार प्रेरितिक मनोभाव

आप मरियम के चार मुख्य मनोभावों से प्रेरित उनका अनुसरण करने की कोशिश करते हैं- मरियम का अपनी कुटुम्बिनी एलिजबेद से मुलाकात, गलीलिया के काना भोज में येसु से निवेदन, दुःखों की घड़ी विश्वास में क्रूस के नीचे खड़ा होना और अंतिम व्यारी के कक्ष में पवित्र आत्मा के आने की प्रतीक्षा करना। आप ने अपने धर्मसंघ की सामान्य संगोष्ठी हेतु विषयवस्तु “परिवर्तनशील परिवेश में आशा के सेवक” चुना है।

इस संदर्भ में मैं आप का ध्यान उस महत्वपूर्ण विषय की ओर करना चाहता हूँ जहाँ आप के सात स्थापकों ने अपने जीवन को पहड़ों और शहरों की चुनौती में व्यतीत किया। फ्लोरेन्स से उन्होंने माऊंट सेनारियो की चढ़ाई की जहाँ उन्होंने येसु ख्रीस्त से अपने मिलन की अनुभूति में आशा को धारण किया। पर्वत से उतर कर उन्होंने फ्लोरेन्स शहर के बाहर काफाजियो में निवास स्थल बनाया जिससे वे अपने दैनिक जीवन के  सेवा कार्यों द्वारा समाज हेतु साक्ष्य दे सकें।

जीनव का साक्ष्य बुलाहट का स्रोत

सुसमाचार में येसु के रुपान्तरण से उन्होंने धर्मसमाज के इतिहास और उसके आदर्श को नवीकृत करते हुए अपने जीवन को गरीब भाई-बहनों की सेवा में समर्पित किया। संत पापा ने कहा कि उनके जीवन के अनुभवों से अपने को रूबरू करते हुए आप भी अपने को अधिक आशावान बना सकते हैं जो हमारे हृदयों में व्याप्त भय और हमारे समुदाय के समर्पण को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि मैं विश्व के कुछ भागों में बुलाहट की कमी पर चिंतन करने के साथ-साथ येसु और वर्तमान सामाजिक संदर्भ में सुसमाचार के प्रति हमारे समर्पित जीवन के बारे में सोचता हूँ। यह येसु ख्रीस्त हैं जो हमें अपने विश्वास, पवित्र जीवन और उनके मूल्यों को सकारात्मक रुप में जीने के फलस्वरुप हमें सभी जहाँ ले चलते हैं। आप नये स्थानों में बुलाहट की चिंता करते हैं। मेरा सुझाव आपके लिए यही है कि आप जिन लोगों के बीच सुसमाचार की घोषणा हेतु भेजे गये हैं उनके बीच अपनी संस्कृति और आध्यात्मिकता की सुन्दर को जीने का प्रयास करें।

आशा के व्यक्ति होने का अर्थ

आशा के व्यक्ति होने का अर्थ वार्ता, एकता और भ्रातृत्व के भाव उत्पन्न करना है जो हमारी पवित्रता की निशानी हैं। वास्तव में, पवित्रता समुदाय की यात्रा है जो एक पवित्र समुदाय द्वारा अभिव्यक्त होती है।

आशा की व्यक्ति होने का अर्थ वर्तमान चुनौतियों का सामना हेतु साहस करना है। हमें संचार के साधनों का उपयोग उत्तरदायी पूर्ण तरीके से करना है जो सकारात्मक संदेश को प्रसारित करते हैं क्योंकि इसमें लोगों का सम्मान, आध्यात्मिकता और भ्रातृत्वपूर्ण जीवन को कमजोर करने की शक्ति है। हमें संचार के साधनों का प्रेरिताई कार्य में उपयोग करने हेतु सीखने की जरुरत है। बहु-संस्कृतिवाद एक दूसरी चुनौती है जिसे आप अपने धर्मसमाज में देखते हैं। इस संदर्भ में धर्मसंघ के समुदाय “प्रयोगशालाएं” बन गयी हैं जिसमें कोई दो राय नहीं है। मानवीय विभिन्नताओं को एक समुदाय में जीना कठिन होता है लेकिन यह असंभव नहीं है। यह हमारे लिए आनंद का कारण बनती है यदि हम पवित्र आत्मा को अपने जीवन में जगह दें। 

संत पापा ने कहा कि आप का समुदाय वैश्विक बंधुत्व की निशानी बनें, जहाँ आप दूसरों को स्वीकार और सम्मान करें, दूसरों के लिए अपने को खुला रखते हुए एक अच्छे संबंध का निर्माण करें। यह साक्ष्य आप को विभाजन, उच्च-नीच के पूर्वाग्रह, संस्कृति, जातिवाद, भाषा के बंधन और अलगाव की दीवार से निजात दिलायेगा जिससे आप अपने संस्थापकों की तरह एकता, भ्रातृत्व और समुदाय का साक्ष्य दे पायेंगे।

25 October 2019, 16:36