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आमदर्शन समारोह के दौरान संत पापा आमदर्शन समारोह के दौरान संत पापा   (ANSA)

पवित्र आत्मा सुुसमाचार के नायक, संत पापा

संत पापा फ्रांसिस ने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर अपनी धर्मशिक्षा माला में पवित्र आत्मा को सुसमाचार प्रचार का नायक निरूपित किया।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार, 2 अक्तूबर 2019 (रेई) संत पापा फ्रांसिस ने संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर विश्व के विभिन्न देशों से आये हुए विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को प्रेरित चरित पर धर्मशिक्षा माला देने के पूर्व अभिवादन करते हुए कहा, प्रिय भाइयों और बहनों।

प्रेरित स्तीफन की शहादत के उपरांत सुसमाचार प्रचार की “तीव्रता” में एक विराम आता है क्योंकि येरूसालेम की कलीसिया के विरूद्ध एक बृहृद सतावट की शुरूआत होती है। (प्रेरि.8.1) इसके कारण प्रेरित येरुसालेम में ही रह जाते हैं जबकि बहुत से ख्रीस्तीय यहूदिया और समारिया के प्रांतों में फैल जाते हैं।

सतावट सुसमाचार के प्रसार में सहायक

प्रेरित चरित की पुस्तिका में शिष्यों के ऊपर धर्म सतावट की स्थिति सदा बनी रहती है। यह येसु ख्रीस्त के वचनों को सत्यापित करता है, “यदि उन्होंने मुझे सताया है, तो तुम्हें भी सतायेंगे।”(यो.15.20) लेकिन इस सतावट के बावजूद सुसमाचार प्रचार की आग बुझती नहीं वरन यह और भी बढ़ती जाती है।

हमने सुना कि उपयाजक फिलिप ने किसी तरह समारिया में सुसमाचार प्रचार की शुरूआत की और इसके परिणाम स्वरूप कैसे बहुतों को चंगाई और मुक्ति प्राप्त हुआ। उस स्थिति में हम पवित्र आत्मा को सुसमाचार प्रचार की यात्रा में एक नया कदम लेते हुए देखते हैं। यह फिलिप को प्रेरित करता है कि वे ईश्वर के सानिध्य में अपना हृदय खुला रहते हुए एक अपरिचित व्यक्ति की ओर बढ़ें। फिलिप उठ खड़े होते और उत्साह में मरूभूमि की खतरनाक राह में चले पड़ते हैं। वे इथोपियाई रानी के एक बड़े अधिकारी से भेंट करते हैं जो उनके खजानों का प्रशासक है। यह शक्स एक खोजा है जो येरुसालेम में पूजा अर्चना करने के उपरांत अपने देश लौट रहा होता है। वह इथोपिया का एक यहूदी अभियोजक था। अपनी रथ पर बैठा वह नबी इसायस के ग्रंथ से विशेषकर “ईश सेवक” के चौथे भजन का पठन कर रहा होता है।

सुसमाचार की समझ हेतु व्याख्या की आवश्यकता

फिलिप उनके निकट आकर उन्हें पूछता है, “आप जो पढ़ रहे हैं क्या उसे समझते हैंॽ” उसने उत्तर दिया, “जब तक कोई मुझे न समझाये, तो मैं कैसे समझूँगाॽ” (प्रेरि. 8.30य31) वह उच्चाधिकारी अपने में इस बात का अनुभव करता है कि ईश वचन को समझने हेतु उन्हें किसी की सहायता की जरुरत है। वह कोषाध्यक्ष, वित्त मंत्री था। उसके पास धन दौलत रूपी सारी शक्तियाँ थी, लेकिन वह अपने में जानता है कि किसी के व्याख्या किये बिना वह ईश वचनों को नहीं समझ सकता है। वह अपने को नम्र बनाता है।

संत पापा ने कहा कि फिलिप और इथोपियन के बीच की वार्ता हमें इस वास्तविकता से वाकिफ करती है कि सुसमाचार का पठन-पाठन अपने में कॉफी नहीं है। हमें इसके अर्थ को समझने की आवश्यकता है, इसमें निहित “रस” का “रसास्वादन” करने की जरुरत है जो पवित्र के द्वारा हमारे लिए शब्दों में सजीव बनाये गये हैं। इसकी चर्चा करते हुए संत पापा बेनेदिक्त 16वें ने ईश वचन की धर्मसभा में कहा था, “सही अर्थ में पवित्र धर्मग्रंथ का अध्ययन, केवल साहित्यिक घटना नहीं है, इसकी व्याख्या (एक्सेजेसिस) ही मेरे जीवन का सार है।” (चिंतन, 6 अक्टूबर 2008) ईश्वर के वचनों में प्रवेश करना हमें जीवन की खामियों से बाहर निकलने की तत्परता को व्यक्त करती है जहां हम अपने को ख्रीस्त से सुदृढ़ करते जो ईश पिता के जीवित शब्द हैं।

पवित्र आत्मा सुसमाचार प्रसार के नायक

इस भांति इथोपियाई द्वारा पढ़े जा रहे अध्याय का नायक कौन है जिसकी व्याख्या फिलिप उसके लिए करता है। यह वे दीन सेवक हैं जो बुराई का प्रतिउत्तर बुराई से नहीं देते हैं, वे अपने में असफल और शुष्क प्रतीत होते हैं, लेकिन वे अपनी राह में चलते हुए अपने लोगों को बुराई से बचाते औऱ ईश्वर के लिए फल उत्पन्न करते हैं। यह येसु ख्रीस्त हैं जो अपने पास्का में हमें मुक्ति प्रदान करते जिसकी व्याख्या फिलिप और सारी कलीसिया करती है। अंततः इथोपियन येसु ख्रीस्त को पहचानते और उन पर विश्वास करते हुए फिलिप से बपतिस्मा ग्रहण करने की मांग करते हैं। यह एक अति सुन्दर घटना है लेकिन किसने फिलिप को मरूभूमि की राह में जाने और उस व्यक्ति से मुलाकात करने हेतु प्रेरित कियाॽ यह पवित्र आत्मा हैं। पवित्र आत्मा सुसमाचार प्रसार हेतु एक नायक का कार्य करते हैं। संत पापा ने कहा, “फादर, मैं सुसमाचार प्रचार करने जा रहा हूँॽ” हाँ, आप क्या करते हैंॽ” मैं सुसमाचार के बारे में बतलाता हूँ, मैं येसु ख्रीस्त के बारे में बतलाता हूँ कि वे ईश्वर हैं।” उन्होंने कहा, “यह सुसमाचार प्रचार नहीं है यदि पवित्र आत्मा हमारे साथ नहीं हैं तो हम सुसमाचार का प्रचार नहीं कर सकते हैं।” यह हमारे लिए धर्म परिवर्तन होगा, यह एक विज्ञापन होगा...। सुसमाचार प्रचार करने का अर्थ अपने को पवित्र आत्मा के हाथों में समर्पित करना है जो हमें ईश वचनों को घोषित करने, अपने जीवन में साक्ष्य देने यहाँ तक की शहादत को प्राप्त करने हेतु भी प्रेरित करते हैं।

खुशी सुसमाचार की निशानी

फिलिप द्वारा धर्मग्रंथ का व्याख्यान इथोपियन को पुनर्जीवित येसु ख्रीस्त को जानने और समझने में मदद करता है- इस भांति फिलिप अदृश्य हो जाता और पवित्र आत्मा उन्हें अपने कार्यों को करने हेतु दूसरे स्थान ले चलते हैं। संत पापा ने कहा कि मैंने पवित्र आत्मा को सुसमाचार का नायक बतलाया इसकी निशानी हमारे लिए क्या हैॽ यह अपनी शहादत में भी हमारी खुशी है। फिलिप आत्मा के पूर्ण खुशी में दूसरी जगह सुसमाचार प्रचार हेतु गया।

संत पापा ने कहा कि पवित्र आत्मा हमें, जो कि सुसमाचार का प्रचार करते हैं अपनी कृपा से पोषित करें जिससे हम दूसरों को अपनी ओर नहीं लेकिन येसु ख्रीस्त की ओर आकर्षित करे सकें, जो उनमें अपनी स्वतंत्रता और उत्तरदायित्व का अनुभव करते हैं।  

इतना कहने के बाद संत पापा फ्रांसिस ने अपनी धर्मशिक्षा माला समाप्त की और सबों के संग हे पिता हमारे प्रार्थना का पाठ करते हुए सभों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया। 

02 October 2019, 15:59