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भारतीय कार्डिनल ओसवाल्ड ग्रेसियस भारतीय कार्डिनल ओसवाल्ड ग्रेसियस 

कार्डि. ग्रेसियस द्वारा अमाजोन और भारत के बीच समानताएं

भारतीय कार्डिनल ओसवाल्ड ग्रेसियस, संत पापा फ्राँसिस द्वारा नियुक्त 6-27 अक्टूबर को पान-अमोज़ोन क्षेत्र के लिए धर्माध्यक्षों की विशेष धर्मसभा सभा के एक प्रतिभागी हैं। वाटिकन न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में, वे धर्मसभा के मुद्दों को भारतीय दृष्टिकोण से देखते हैं।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार, 21 अक्टूबर 2019 (वाटिकन न्यूज): वाटिकन में चल रहे पान-अमाजोन धर्मसभा में भाग ले रहे भारतीय कार्डिनल ने कहा कि अमाजोन क्षेत्र के धर्माध्यक्षों का अपने गरीब और पीड़ित लोगों के लिए जुनून को देख वे काफी प्रभावित हैं। विशेष धर्मसभा में भाग लेने हेतु संत पापा फ्राँसिस द्वारा निर्वाचित मुम्बई के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल ओसवाल्ड ग्रेसियस, भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन (सीबीसीआइ) के अध्यक्ष भी हैं। यह भारत के लैटिन-संस्कार धर्माध्यक्षों और दो पूर्वी-संस्कार की कलीसियाओं, सिरो-मालाबार और सिरो-मलनकरा को  एक साथ लाता है।

 पान-अमाजोन क्षेत्र के लिए धर्माध्यक्षीय धर्मसभा का विषय है: ‘अमाजोनिया - कलीसिया और एक अभिन्न पारिस्थितिकी के लिए नए रास्ते’।

धर्मसभा अब अपने अंतिम सप्ताह में प्रवेश कर रही है, जो 27 अक्टूबर को समाप्त होगी। सामान्य सत्रों के बाद, प्रतिभागी अब छोटे समूहों में अपनी बैठकों के निष्कर्षों को निकालने का प्रयास कर रहे हैं।

अब तक हुए धर्मसभा के विभिन्न हस्तक्षेपों को सुनकर, कार्डिनल ग्रेसियस ने कहा, उन्हें लगता है कि कलीसिया वास्तव में एक शरीर है। एशिया के साथ-साथ भारत में भी अमाजोन के लोगों के समान चुनौतियां हैं।

कार्डिनल ने उन्हें धर्मसभा में नामित करने के लिए संत पापा फ्राँसिस के प्रति अपना आभार व्यक्त किया क्योंकि वे अमाजोन के लोगों की चुनौतियों के बारे में बहुत कुछ सीख रहे हैं जो कि थोड़े अलग जरुर हैं लेकिन सामान्य रूप से एक ही हैं, जैसे कि सुसमाचार के मूल्यों को प्रस्तुत करना और उसे दूर-दराज गरीब लोगों तक पहुँचाना।

लोगों के लिए जुनून

धर्मसभा का एक और पहलू जो कार्डिनल को ज्यादा प्रभावित करता है, वह है अमाज़ोन के उन गरीब लोगों के लिए धर्माध्यक्षों का जुनून जिनकी वे देखभाल करते हैं। धर्माध्यक्ष आवाजहीन लोगों की आवाज हैं। वे हिंसा, शोषण, अन्याय के खिलाफ लोगों के रोने की आवाज़ सुन रहे हैं और उनके भविष्य के बारे में चिंतित हैं। धर्मसभा में होना कार्डिनल ग्रेसियस के लिए उनसे सीखने का एक अच्छा अवसर और अनुभव रहा है।

जन-जातियों का शोषण

कार्डिनल ग्रेसियस के अनुसार, हस्तक्षेपों में दृढ़ता से जो बात सामने आई है, वह जन-जातियों का शोषण है। उनहोंने कहा कि यह भारत में भी हो रहा है।

“आदिवासी और जन-जाति के लोग, हमारे स्वदेशी लोग हैं। उनकी जमीन छीनी जा रही हैं। कानून पारित किया जा रहा है कि उन्हें उनके विशेषाधिकार से वंचित किया जाए।"

74 वर्षीय कार्डिनल ने बताया कि इनमें से कई मूल निवासियों के पास उचित दस्तावेज नहीं हैं। वे इन सब के आदी नहीं हैं, लेकिन वे सदियों से अपनी भूमि में रह रहे हैं। "अचानक, कोई उन्हें बताता है कि उनके पास उचित कागजात नहीं हैं, इसलिए उनकी जमीन छीन ली जा रही है।"

वनों की कटाई

कार्डिनल ग्रेसियस ने बताया कि भारत में वनों की कटाई की भी समस्या है लेकिन कुछ हद तक यह अमाजोन की तुलना में कम है।अमाजोन में बड़े पैमाने में वनों की कटाई हो रही है। भारत में कॉरपोरेट कंपनियां जमीन ले रही हैं। उन्होंने कहा कि देश का हरित क्षेत्र धीरे-धीरे कम हो रहा है।

"सौभाग्य से, सरकार जलवायु की देखभाल की आवश्यकता के बारे में बोल रही है।"

पुरोहितों की कमी

तीसरा मुद्दा जो धर्मसभा में आया, वह अमाजोन क्षेत्र में पुरोहितों की अत्यंत कमी है। विश्वासियों को छह महीने या एक साल में एक पवित्र ख्रीस्तयाग भी नहीं मिलता है। सौभाग्य से, भारत में यह स्थिति नहीं है, लेकिन आदिवासी लोगों का शोषण भारत में बहुत ज्यादा महसूस किया जाता है।

21 October 2019, 17:16