खोज

Vatican News
पान अमाजोन धर्मसभा 2019 पान अमाजोन धर्मसभा 2019  (AFP or licensors)

स्थायी धर्माध्यक्षीय पान-अमाजोनियन संरचना की आवश्यकता

अमाजोन क्षेत्र के लिए विशेष धर्मसभा का 11वां सामान्य सम्मेलन "अमाजोनिया: कलीसिया और एक अभिन्न पारिस्थितिकी के लिए नए रास्ते" मंगलवार को वाटिकन में संत पापा फ्राँसिस और 180 सिनॉड धर्माचार्यों की उपस्थिति में हुआ।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार 16 अक्टूबर 2019 (वाटिकन न्यूज) :  अमाजोन में सिनोडालिटी को बढ़ावा देने के लिए, आरइपीएइम (पान-अमाजोनियन एक्लेसियल नेटवर्क) द्वारा समन्वित एक स्थायी और प्रतिनिधि धर्माध्यक्षीय संरचना बनाने की तत्काल आवश्यकता है: यह उन सुझावों में से एक था जो सुबह के सत्र से उभरा था। प्रस्तावित संरचना को सीइएलएएम (लैटिन अमेरिकी एपिस्कोपल काउंसिल) के साथ एकीकृत, अमाजोन कलीसिया में लागू करने में मदद करनी चाहिए,जिसका उद्देश्य अधिक प्रभावी, साझा प्रेरितिक देखभाल है।  

मानव अधिकारों और अमाज़ोन के संरक्षण के लिए वेधशाला

मंगलवार पूर्वाहन के सत्र में प्रतिभागियों ने अमाजोन के आदिवासियों की समस्याओं जैसे उपनिवेश, आंतरिक प्रवास और उपनिवेशवादी आर्थिक मॉडल की उन्नति में आने वाली समस्याओं पर ध्यान केंद्रित किया। यह उनके क्षेत्रों से समुदायों के विस्थापन और निष्कासन को मजबूर करता है, जिससे वे अपनी इच्छा के विरुद्ध पलायन करने को मजबूर होते हैं। खानाबदोश लोगों को एक विशिष्ट प्रेरितिक देखभाल के माध्यम से समझा जाना चाहिए, ताकि उनके मानवीय और पर्यावरणीय अधिकारों की हमेशा गारंटी रहे। इसमें उनके अधिकार क्षेत्र में किसी भी कार्रवाई से पहले परामर्श और सूचित करने का उनका अधिकार शामिल है। इस संबंध में, मानव अधिकारों और अमाज़ोन के संरक्षण के लिए एक स्थायी वेधशाला का सुझाव दिया गया था। पृथ्वी और अमाजोन के लोगों के रोने की आवाज़ सुनी जानी चाहिए, विशेषकर युवा लोगों को, क्योंकि यह अंतर-पीढ़ी के न्याय का सवाल है।

सांस्कृतिक अनुकूलन और शिक्षा

सांस्कृतिक अनुकूलन के विषय पर भी चर्चा की गई: कलीसिया के लिए अमज़ोनियन संस्कृतियों की समृद्ध विविधता में नए रास्ते खोलने और खोजने की आवश्यकता है, ताकि शिक्षिका और माता की तुलना में शिष्य और बहन की तरह, सुनने के दृष्टिकोण के साथ, सेवा, एकजुटता, सम्मान, न्याय और सामंजस्य अधिक हो। सांस्कृतिक अनुकूलन के विषय से जुड़ा, अमाजोनियन की शिक्षा को सत्र में फिर से लाया गया, जो दुर्भाग्य से, खराब गुणवत्ता वाली है। यह सुझाव दिया गया था कि आदिवासी लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए कलीसिया की विभिन्न संरचनाएं एक दूसरे के साथ बेहतर समन्वय करे। उदाहरण के लिए, काथलिक विश्वविद्यालय आदिवासी लोगों की शिक्षा के लिए एक तरजीही विकल्प पेश कर सकते हैं, या पेरू में नोपोकी जैसे आदिवासी विश्वविद्यालयों को आर्थिक रूप से समर्थन करने के लिए एकजुटता रणनीति तैयार कर सकते हैं। इसका उद्देश्य सांस्कृतिक पहचान के अधिकार की रक्षा करना और संस्कृतियों, संवेदनशीलता, भाषाओं और दर्शन पर संवाद और आदान-प्रदान के नाम पर अमाजोनियन लोगों के पैतृक ज्ञान की रक्षा करना होगा।

मिशनरी प्रतिबद्धता और शहीदों का साक्षी

धर्मसभा में प्रतिभागियों ने हिंसा के मुद्दों पर भी विचार किया। इस बात पर जोर देकर कहा गया कि अमाजोन एक महिला की तरह है, जिसका बलात्कार हुआ है और जिसके रोने की आवाज़ सुनने की ज़रूरत है, क्योंकि केवल इस तरह से प्रचार को फिर से जागृत किया जा सकता है। सुसमाचार का प्रभावी उद्घोषणा तभी होता है जब वह दुनिया के उस दर्द के संपर्क में आता है जो, मसीह के प्रेम द्वारा बचाये जाने की प्रतीक्षा कर रहा होता है। इस क्षेत्र के शहीद मिशनरियों, जैसे धर्माध्यक्ष अलेजांद्रो लाबाका, कपुचिन धर्मबहन इनसे अरंगो और धर्मबहन डोरोथी स्टैंग को याद किया गया, जिन्होंने अमाजोन क्षेत्र और रक्षाहीन लोगों की सुरक्षा के लिए अपनी जान दे दी थी। धर्मसभा भवन में इस बात को फिर से दोहराया गया कि अमाजोन क्षेत्र में मिशनरी काम को अधिक समर्थन दिया जाना चाहिए। इस कारण क्षेत्र में मिशन को मजबूत करने के लिए, विशेष रूप से परिवहन लागत को कवर करने, मिशनरियों को प्रशिक्षित करने हेतु राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय फंड बनाने के बारे में विचार किया।

अंतर-कलीसियाई चुनौतियाँ

मिशनरी प्रतिबद्धता को एक अंतर-कलीसियाई दृष्टिकोण से भी देखा जाना चाहिए क्योंकि एक मिशनरी कलीसिया एक अंतर-कलीसिया भी है। यह चुनौती अमाजोन के लिए भी है: किसी भी तरह के धर्मांतरण या अंतर-ख्रीस्तीय उपनिवेशवाद से दूर, ख्रीस्तीय धर्म प्रचार, दूसरों के साथ संवाद करने में संलग्न होने का स्वतंत्र निमंत्रण है। इसलिए, एक आकर्षक सुसमाचार प्रचार, विश्वसनीय अंतर-कलीसियाओं का प्रमाण होगा। चर्चा का दूसरा विषय था संगीत। संगीत एक आमभाषा है जो किसी को विश्वास के संचार पर प्रतिबिंबित करती है। इसके द्वारा धर्म के सिद्धांत का खंडन नहीं होना चाहिए और इसे मानवीय संवेदनशीलता के माध्यम से समझना चाहिए। इस तरह, सुसमाचार सभी के लिए आकर्षक होगी और विश्वास के जीवन को जीने में मदद करेगा जो अमाज़ोन के दूर-दराज के क्षेत्रों में रहते हैं।

16 October 2019, 16:50