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अमाजोन पर सिनॉड का तीसरा दिन अमाजोन पर सिनॉड का तीसरा दिन  (AFP or licensors)

नशीली पदार्थों की तस्करी की त्रासदी, पारिस्थितिक बदलाव की मांग

अमाजोन पर धर्माध्यक्षीय धर्मसभा के तीसरे दिन 9 अक्टूबर की दूसरी बैठक में, संत पापा फ्राँसिस के साथ 180 धर्माचार्यों ने भाग लिया। सिनॉड 27 अक्टूबर तक जारी रहेगा।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 10 अक्टूबर 2019 (रेई)˸ अमाजोन पर धर्माध्यक्षीय धर्मसभा के तीसरे दिन 9 अक्टूबर की दूसरी बैठक में, संत पापा फ्राँसिस के साथ 180 धर्माचार्यों ने भाग लिया। सिनॉड 27 अक्टूबर तक जारी रहेगा।  

बुधवार की दूसरी बैठक में नशीली पदार्थों की तस्करी की त्रासदी और उसके परिणामों पर बहस की गयी। अमाजोन के कुछ प्रांतों में कोका की खेती 12 हजार से बढ़कर 23 हजार हेक्टर जमीन पर हो रही है। इसके कारण अपराध की दर में वृद्धि के विध्वंसकारी प्रभाव पड़ रहे हैं और प्राकृतिक संतुलन में उथल-पुथल हो रहा है। साथ ही साथ, मिलियन हेक्टेयर जमीन प्राधिकृत आग और जलविद्युत बांधों के निर्माण द्वारा नष्ट किये जा रहे हैं। इसका कुछ क्षेत्रों में पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। यही कारण है कि पारिस्थितिक बदलाव की मांग आवश्यक है। सिनॉड हॉल में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय निकायों के एजेंडे में समग्र परिस्थितिकी की विषयवस्तु को डालने हेतु कलीसिया को नबी की आवाज बनने की आवश्यकता है।  

संस्कृतिकरण और सुसमाचार प्रचार  

सिनॉड के धर्माध्यक्षों ने संस्कृतिकरण और सुसमाचार प्रचार के बीच संतुलन पर भी चर्चा की तथा इसके लिए येसु का उदाहरण लेने का निमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि शरीरधारण ही संस्कृतिकरण का एक महान उदाहरण है क्योंकि इसमें ईश वचन मानव शरीर धारण करता है ताकि उनके प्रति प्रेम को दृश्यमान रूप में प्रकट कर सके। उसी तरह कलीसिया भी लोगों के दैनिक जीवन में प्रवेश करने के लिए बुलायी गयी है जैसा कि अमाजोन के मिशनरियों ने किया।

मिशनरी सिनॉडालिटी

सभा में विचार व्यक्त किये गये कि अमाजोन को उस क्षेत्र में रहने वाले लोगों एवं कलीसिया की अच्छाई के लिए, स्थायी मिशनरी धर्मसभा (सिनॉडालिटी) की प्रयोगशाला बनना चाहिए। संस्कृतिकरण के महत्व पर भी जोर दिया गया तथा संस्कृतियों एवं आदिवासी लोगों की आबादी में वृद्धि पर बल दिया गया ताकि आमघर की देखभाल को मदद दिया जा सके।    

बुलाहट की चुनौतियाँ एवं "वीरी प्रोबाती" की संभावना

सुसमाचार प्रचार के मुद्दे पर पुरोहितीय एवं धर्मसमाजी बुलाहट की चुनौतियों पर भी चर्चा की गयी। धर्माध्यक्षों ने "वीरी प्रोबाती" (विश्वास में पक्के एवं निश्चित उम्र के विवाहित पुरूषों का पुरोहित अभिषेक जो उन ख्रीस्तीय समुदायों में ख्रीस्तयाग अर्पित कर सकते हैं जहाँ पुरोहितों की कमी है और जहाँ पुरोहितों की नियमित पहुँच संभव नहीं है।) की संभावना पर भी विचार किया। इस सदर्भ में कहा गया कि यह संभावना पुरोहितों को एक महादेश से दूसरे महादेश अथवा एक धर्मप्रांत से दूसरे धर्मप्रांत में जाने के उत्साह को कमजोर करेगा। उन्होंने कहा कि पुरोहित चूँकि समुदाय का नहीं बल्कि कलीसिया का है अतः वह किसी भी समुदाय का हो सकता है।

दूसरी बात ये भी कही गयी कि न केवल पुरोहितों की आवश्यकता है बल्कि उससे भी बढ़कर लोकधर्मी उपयाजकों की जरूरत है। पुरोहितों के बेहतर प्रशिक्षण एवं लोकधर्मियों की जिम्मेदारियों को भी मूल्य देने के बुलावे पर भी जोर दिया गया।  

लोकप्रिय भक्ति

लोकप्रिय भक्ति विषय पर भी प्रकाश डाला गया जो सुसमाचार प्रचार का एक आयाम है जिसे नजरांदाज नहीं किया जाना चाहिए। कहा गया कि यह अमाजोन के लोगों की एक मूल विशेषता है तथा येसु ख्रीस्त पर चिंतन करने हेतु इसकी रक्षा एक खजाना के समान की जानी चाहिए। इसी आधार पर लोकप्रिय भक्ति के विचार को कलीसिया के द्वारा साथ एवं प्रोत्साहन दिया जाता है।

सृष्टि का ईशशास्त्र

उसके बाद सिनॉड के धर्माध्यक्षों ने सृष्टि के ईशशास्त्र पर विचार किया जहाँ ईश्वर के वचन ने मानव का रूप लेकर निवास किया। इसके साथ ही उन्होंने ईशशास्त्र एवं सकारात्मक विज्ञान के बीच वार्ता के महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि सृष्टि को भूलने का अर्थ है सृष्टिकर्ता को भूलना।

अमाजोन के आदिवासी लोगों के अधिकारों की रक्षा करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। कहा गया कि उनके साथ संवाद करना आवश्यक है, जो हमें उन्हें योग्य वार्ताकारों एवं आत्मनिर्भर व्यक्ति के रूप में महत्व देने में मदद देता है।   

कलीसिया एवं समाज में महिलाओं की भूमिका

छटवीं बैठक में महिलाओं की भूमिका को प्रोत्साहन दिये जाने पर भी जोर दिया गया। कहा गया कि परिवार, समाज एवं कलीसिया में उनके नेतृत्व को मूल्य दिया जाना चाहिए। उन्हें जीवन के रक्षक, सुसमाचार प्रचारक, आशा के शिल्पकार, ईश्वर की शीतल हवा और कलीसिया का ममतामय चेहरा आदि की संज्ञा दी गयी। अमाजोन की महिलाएँ किस तरह सुसमाचार का प्रचार करती हैं उसे भी महत्व दिये जाने पर जोर दिया गया। वे बहुधा चुपचाप रहती हैं किन्तु समाज में बहुत अधिक सक्रिय रूप से भाग लेती हैं।    

अंतरधार्मिक एवं ख्रीस्तीय एकता वर्धकवार्ता

सिनॉड हॉल में अंतरधार्मिक वार्ता के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। जिसमें  विविधताओं को अवसरों के रूप में देखे जाने एवं एक-दूसरे पर भरोसा रखने के लक्ष्य पर बात की गयी, जो धार्मिक उपनिवेशवाद से दूर रखता तथा विविधताओं के प्रति जागरूक एवं सुनने के लिए तैयार रहता है। ख्रीस्तीय एकतावर्धक वार्ता पर विचार करते हुए आदिवासी लोगों के अधिकारों की रक्षा के आम रास्तों के महत्व पर प्रकाश डाला गया। आदिवासियों को, खासकर, अमाजोन की धरती को, हिंसक खान प्रणाली अथवा जहरीली खेती के द्वारा नष्ट किया जा रहा है।  

कहा गया कि ख्रीस्तियों का एक साथ मिलकर सुसमाचार का प्रचार, इन अपराधों का मुकाबला करने का एक रास्ता हो सकता है। यह भी गौर किया गया कि अमाजोन और यहाँ को लोगों को जब हिंसा एवं अन्याय का सामना करना पड़ रहा है तब ख्रीस्तीय चुप नहीं रह सकते। सुदूर क्षेत्रों में ईश्वर के प्रेम का प्रचार करने का अर्थ है सृष्टि की सुन्दरता पर हर प्रकार के शोषण को दूर करना।

अमाजोन सभी के लिए एक प्रमाणिक स्थान

इस बात पर भी गौर किया गया कि अमाजोन एक प्रमाणिक स्थल है जहाँ हमारे समय की कई वैश्विक चुनौतियों दिखाई पड़ रही हैं जो सभी लोगों को प्रभावित कर रही हैं। अमाजोन के लोगों की पीड़ा वास्तव में, शाही जीवनशैली से उत्पन्न हुई है जिसमें जीवन को एक साधारण वस्तु की तरह देखा जाता है और जिसके कारण असमानता को बल मिलता है। आदिवासी लोग चीजों के परस्पर संबंध की समझ में हमारी मदद कर सकते हैं कि वैश्विक सहयोग संभव और अति आवश्यक है।

संत पापा का उदाहरण

संत पापा ने बैठक के आरम्भ में कहा कि उन्हें किस बात ने सबसे अधिक प्रभावित किया वह है कि उन्होंने अपने काम की शुरूआत योम किप्पुर के दिन यहूदी भाई-बहनों के लिए प्रार्थना करते हुए की तथा दिन का समापन जर्मनी के हाल्ले स्थित सभागृह में हमले के शिकार लोगों के लिए प्रार्थना करते हुए की।  

10 October 2019, 16:19