Vatican News
जिम्पेटो अस्पताल में बीमार बच्चे को पुचकारते हुए संत पापा फ्राँसिस जिम्पेटो अस्पताल में बीमार बच्चे को पुचकारते हुए संत पापा फ्राँसिस  (AFP or licensors)

संत पापा द्वारा जिम्पेटो अस्पताल के एड्स रोगियों को सांत्वना

संत पापा फ्राँसिस मोजांबिक में अपनी आखिरी दिन की शुरुआत जिम्पेटो अस्पताल की यात्रा के साथ की। एचआईवी-एड्स पीड़ित माताओं और बच्चों की देखभाल करने वाले चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को येसु के हृदय का प्रतीक माना।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

मापुतो, शुक्रवार 6 सितम्बर 2019 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार 6 सितम्बर अपनी प्रेरितिक यात्रा के दूसरे दिन मापूतो राजदूत निवास से सुबह 8 बजे 19 किलोमीटर दूर जिम्पेटो अस्पताल के दौरे पर निकले और 45 मिनट की यात्रा कर अस्पताल पहुँचे। वहाँ मुख्य द्वार पर अस्पताल की निदेशिका, संत इजीदियो समुदाय के अध्यक्ष और अस्पताल के कुछ चिकित्सकों ने संत पापा का स्वागत किया।

भला समारी

संत पापा ने निदेशिका के स्वागत भाषण के लिए धन्यवाद देते हुए सभी चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों एवं वहाँ उपस्थित रोगियों और उनके परिजनों का अभिवादन किया। उन्होंने चिकित्सकों और स्वास्थ्य-कर्मियों को रोगियों की सेवा में जीवन समर्पित करने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा,“आप जिस योग्यता, व्यावसायिकता और प्यार से एचआईवी-एड्स के रोगियों, विशेष रूप से माताओं और बच्चों की देखभाल करते हैं, मुझे भला समारी के दृष्टांत की याद दिलाते हैं।”

निराशा और पीड़ा के साथ यहाँ आने वाले सभी लोग सड़क के किनारे पड़े बेसुद आदमी की तरह हैं। आप में से हर कोई भले समारी के समान, इस अस्पताल में बड़े प्यार और करुणामय हृदय से रोगियों का स्वागत करते हैं। आप गंभीर रोगियों को भी अपनी सेवा देने से पीछे नहीं हटते। आप यह नहीं कहते कि इस रोगी का "कुछ भी नहीं किया जा सकता" या "इस संकट से लड़ना असंभव है।" इसके बजाय, आप समाधान खोजने में हर संभव प्रयासरत हैं। आप ने समाज से तिरस्कृत, हाशिये पर जी रही महिलाओं के रोने की आवाज सुनी है। कैंसर तथा तपेदिक से पीड़ित लोगों और सैकड़ों कुपोषितों, विशेषकर बच्चों और युवाओं के लिए आपने यह अस्पताल खोला। आपने इन बीमार लोगों में रहने वाले येसु का स्वागत किया है।”

बीमारों का क्रंदन

संत पापा ने अस्पताल के विभिन्न विभागों में काम करने वाले स्वास्थ्य-कर्मियों को येसु के हृदय का प्रतीक माना। यहाँ हर गरीब, बीमार व्यक्ति का रोना कभी अनसुनी नहीं होता। संत पापा ने कहा,“आप जरूरतमंद लोगों के साथ अपना जीवन साझा करते हैं और आप उन्हें भाई या बहन की सक्रिय उपस्थिति का एहसास कराने में सक्षम हैं। गरीबों को बिचौलियों की जरूरत नहीं है, बल्कि आप उन सभी के रोने की आवाज़ सुनते हैं। उनका रोना सुनकर आपको एहसास होता है कि चिकित्सा उपचार, हालांकि आवश्यक है,परंतु पर्याप्त नहीं है। आप इसकी संपूर्णता में समस्या से निपटते हैं, महिलाओं और बच्चों की गरिमा को बहाल करते हैं और उन्हें बेहतर भविष्य की ओर आगे बढ़ने में मदद करते हैं।( गरीबों का विश्व दिवस 2018 का संदेश, 18 नवंबर 2018)

संत पापा ने सीमित साधनों की ओर ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि वे बीमारों की नित्य "सुनने" के बदौलत अपनी सीमाओं और सीमित साधनों का अनुभव करते हैं। उन्होंने जो कार्यक्रम निर्धारित किया है, वह उन्हें दुनिया के अन्य स्थानों से जोड़ती है। अपनी सीमाओं को स्वीकार करना, विनम्रता का एक उदाहरण है। अपनी रचनात्मकता के कारण अब वे एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा बन गये हैं। संत पापा ने कहा, “अक्सर विश्वास के कारण नहीं बल्कि मानव एकजुटता से प्रेरित होकर अन्य पहलों के साथ हमारा सहयोग, हमारे लिए यह संभव बनाता है कि हम सहायता प्रदान करें। यह एहसास कि गरीबी के कारण, हमारी क्षमता सीमित, कमजोर और अपर्याप्त है, हमें दूसरों तक पहुंचने की ओर अग्रसर करती है, ताकि आपसी सहयोग से, हम अपने लक्ष्यों को और अधिक प्रभावी ढंग से प्राप्त कर सकें।”

पर्यावरण की सुरक्षा

संत पापा ने कहा कि गरीबों और बीमारों के रोने की आवाज उन्हें दुनिया के दूसरे हिस्से को देखने और सुनने के लिए प्रेरित करती है। “मुझे लगता है कि "बीमारी के लक्षण मिट्टी, पानी, हवा और जीवन के सभी रूपों में दिखाई देते हैं ... पृथ्वी खुद, बोझ से दबी हुई, परित्यक्त और बर्बादी के कगार पर है और मानवीय दुर्व्यवहारों के कारण वह भीतर-ही-भीतर कराहती है।(रोम 8:22)” (लौदातो सी, 2)। मकोंडे कला की मूर्तियों में, उज्मा ("विस्तृत परिवार" या "जीवन का वृक्ष"), जिसमें अनेक लोग एक-दूसरे से चिपके हुए हैं, एकजुटता को दर्शाता है। यह हमें यह देखने में मदद करता है कि हम सभी एक हैं और एक ही जगह से आते हैं। अगर आपने इसे पहचान लिया है तो यह पानी, उर्जा और पर्यावरण की सुरक्षा करने हेतु आपको प्रेरित करेगा।”  

रोगियों को स्वास्थ्य लाभ                     

संत पापा ने कहा कि भला समारी घायल व्यक्ति को सराय में लाकर सराय के मालिक को उसकी सेवा चिकित्सा करने के लिए रुपये दिया। फिर बाकी के रुपये लौटते वक्त चुकाने का वादा कर यात्रा पर आगे बढ़ा। संत पापा ने कहा कि इस स्वास्थ्य केंद्र में कैसिल्डा जैसी महिलाएं और लगभग 100,000 बच्चे जो एचआईवी-एड्स से मुक्ति इतिहास का एक नया पृष्ठ लिख सकते हैं। वे सभी लोग जो गरिमा के साथ ठीक हो गए आज मुस्कुराते हुए जीवन जी रहे हैं। वे लोग अपनी बीमारी के कारण पीड़ा सह रहे हैं, हमें आशा दिलाना चाहते हैं। संत पापा ने चिकित्सकों को बीमारों की सेवा में प्रयासरत रहने हेतु प्रेरित किया। क्योंकि उनकी पुरस्कार स्वर्ग में रखा हुआ है, "ये मेरे पिता के कृपापात्र हैं।"

अंत में संत पापा ने सभी चिकित्सकों, स्वास्थ्य-कर्मियों, मरीज़ों और परिवार के सदस्यों को आशीर्वाद दिया।

 

06 September 2019, 15:24