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अफ्रीका में छः दिवसीय यात्रा के प्रस्थान करते सन्त पापा फ्राँसिस 04.09.2019 अफ्रीका में छः दिवसीय यात्रा के प्रस्थान करते सन्त पापा फ्राँसिस 04.09.2019  (AFP or licensors)

मोज़ाम्बिक, मडागास्कर एवं मोरिशस में सन्त पापा फ्राँसिस

मैं आप सबको प्रार्थना में मेरे संग शामिल होने के लिये आमंत्रित करता हूँ ताकि ईश्वर, सबके पिता, सम्पूर्ण अफ्रीका में भ्रातृत्वपूर्ण सामंजस्य को सुदृढ़ करें, जो ठोस एवं स्थायी शांति की एकमात्र आशा है। हैशटेग प्रेरितिक यात्रा, मोज़ाम्बिक, मडागास्कर, मोरिशस।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार, 4 सितम्बर 2019 (रेई,वाटिकन रेडियो): मैं आप सबको प्रार्थना में मेरे संग शामिल होने के लिये आमंत्रित करता हूँ ताकि ईश्वर, सबके पिता, सम्पूर्ण अफ्रीका में भ्रातृत्वपूर्ण सामंजस्य को सुदृढ़ करें, जो ठोस एवं स्थायी शांति की एकमात्र आशा है। हैशटेग प्रेरितिक यात्रा, मोज़ाम्बिक, मडागास्कर, मोरिशस।

बुधवार, 04 सितम्बर को काथलिक कलीसिया के परमधर्मगुरु सन्त पापा फ्राँसिस ने इस ट्वीट सन्देश की प्रकाशना के साथ उक्त तीन देशों में अपनी प्रेरितिक यात्रा का शुभारम्भ किया।

आदर्श वाक्य

04 सितम्बर से 10 सितम्बर तक सन्त पापा फ्राँसिस अफ्रीका के उपसहारा क्षेत्र स्थित मोज़ाम्बिक, मडागास्कर एवं मोरिशस की प्रेरितिक यात्रा के लिये, बुधवार को, रोम समयानुसार प्रातः साढ़े सात बजे रवाना हो गये हैं। मोज़ाम्बिक में प्रेरितिक यात्रा का आदर्श वाक्य है, "आशा, शांति और पुनर्मिलन के तीर्थयात्री", मडागास्कर में यह है, "शांति और आशा को बोनेवाले" तथा मोरिशस में प्रेरितिक यात्रा का आदर्श वाक्य है, "शांति के तीर्थयात्री"।

मोज़ाम्बिक सितम्बर (04-06)

मोज़ाम्बिक उक्त छः दिवसीय प्रेरितिक यात्रा का प्रथम पड़ाव है।  

अगस्त माह में, सरकार और, पूर्व गुरिल्ला आन्दोलन एवं मुख्य विपक्षी दल में परिणत, रेनामो पार्टी के बीच एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किये गये थे ताकि दशकों की, प्रायः घातक, शत्रुता का औपचारिक रूप से अन्त किया जा सके।

मोजाम्बिक ने 1975 में पुर्तगाल से स्वतंत्रता प्राप्त की थी किन्तु अभी भी यह 16 वर्षीय गृहयुद्ध के दुष्प्रभावों से जूझ रहा है। 1992 में गृहयुद्ध आधिकारिक तौर पर समाप्त हो गया था।    

सन् 1988 में सन्त पापा जॉन पौल द्वितीय द्वारा सम्पन्न राष्ट्र की यात्रा के दौरान गृहयुद्ध जारी था। रक्तपात को समाप्त करने के लिये 1992 में किये गये युद्ध विराम से पूर्व 10 लाख से अधिक लोग मारे गए थे।

सन्त पापा फ्राँसिस सरकारी अधिकारियों, नागर समाज के नेताओं एवं कूटनीतिज्ञों से मुलाकातें करेंगे। आगामी माह के लिये निर्धारित आम चुनावों की पृष्ठभूमि में ये मुलाकातें शांति समझौते का पहला परीक्षण हो सकती हैं।  

युद्ध के अलावा मोज़ाम्बिक प्राकृतिक संकटों से भी अछूता नहीं रहा है। छः माह पूर्व ही यहाँ दो चक्रावातों ने मृत्यु का ताण्डव रचा जिसमें 1000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं।

मडागास्कर (सितम्बर 6-9)  

मडागास्कर ने सन् 1960 में फ्राँस से स्वतंत्रता हासिल की थी किन्तु इसके बाद से ही राष्ट्र राजनैतिक उथल-पुथल का रंगमंच रहा है तथा चुनावों में धोखाधड़ी के आरोप भी सामने आये हैं। देश के कार्डिनल डेज़ीरे साराहज़ाना ने इस वर्ष के प्रारम्भ में वाटिकन न्यूज़ से कहा था कि मडागास्कर के लोग राजनैतिक अस्थिरता से थक चुके हैं। सन्त पापा फ्राँसिस इसी वर्ष जनवरी माह में नियुक्त राष्ट्रपति आन्द्री राजोलीना से मुलाकात करेंगे।

विश्व खाद्य कार्यक्रम के अनुसार, हिंद महासागर द्वीप राज्य, मडागास्कर, अफ्रीका के सबसे गरीब देशों में से एक है, जहाँ इसके दो करोड़ पचास लाख की कुल आबादी में से 90 प्रतिशत लोग 2 डॉलर प्रतिदिन से कम पर गुज़ारा करते हैं।

लगभग आधी आबादी जनजातीय एवं जीववादी मान्यताओं का पालन करती है जबकि लगभग 40% लोग ईसाई धर्मानुयायी हैं, इनमें से लगभग पचास प्रतिशत काथलिक हैं।

सन्त पापा फ्राँसिस मडागास्कर में क्लोइस्टर कामेलाईट मठवासी धर्मसंघ में प्रवचन करेंगे। कारमेल  मठवासियों की जड़ें इस्राएल स्थित माऊन्ट कारमेल से जुड़ी हैं, जहाँ वे 12 शताब्दी में पहुँचे थे। मडागास्कर में कारमेल मठवासी धर्मसंघ की स्थापना सन् 1921 ई. में हुई थी।

यहाँ, सन्त पापा फ्राँसिस, 19 वीं सदी के उत्तरार्ध में जीवन यापन करनेवाली एक मलगाशी महिला  धन्य विक्टोरिया रासोमानारिवो की समाधि पर भी जाएंगे। अपने परिवार के घोर विरोध के बावजूद 15 साल की उम्र में विक्टोरिया रासोमानारिवो ने जीववादी लोकप्रथाओं का परित्याग कर काथलिक धर्म का आलिंगन कर लिया था। इसके दो वर्ष बाद ही उनका विवाह प्रधान मंत्री के बेटे से कर दिया गया था जिसके विषय में बताया जाता है कि वह एक हिंसक शराबी था।

सन् 1883 में जब फ्राँको मलगाशी युद्ध के दौरान विदेशी मिशनरियों को देश से निकाल दिया गया था, विक्टोरिया रासोमानारिवो ने सशस्त्र सैनिको का डटकर सामना किया था तथा काथलिकों को बन्द काथलिक गिरजाघरों में, सुरक्षित रूप से, प्रार्थना के लिये प्रवेश दिलाया था। बाद में वे कुष्ठ रोगियों, निर्धनों एवं बीमार लोगों की सेवा में समर्पित रहीं। सन् 1989 ई. में उन्हें धन्य घोषित किया गया था।

सन्त पापा फ्राँसिस राजधानी अन्तानाना रिवो के कई समुदायों में प्रार्थनाओं का नेतृत्व करेंगे तथा रविवार को ख्रीस्तयाग अर्पित करेंगे। इन काथलिक समुदायों में सन्त पापा फ्राँसिस के पूर्वछात्र रहे काथलिक पुरोहित फादर पेद्रो ओपेका द्वारा स्थापित संगठन भी शामिल है जिसने लगभग  25,000 निर्धनों की सेवा के लिये आश्रमों का निर्माण करवाया है।

अन्तानाना रिवो में ही सन्त पापा फ्राँसिस "मिनी मडागास्कर वर्ल्ड यूथ डे" शीर्षक से आयोजित युवा समारोह में देश के युवाओं को अपना सन्देश देंगे तथा इसी स्थल पर लगभग आठ लाख श्रद्धालुओं के लिये ख्रीस्तयाग अर्पित करेंगे।  

मोरिशस (सितम्बर 09)

प्रेरितिक यात्रा का समापन सन्त पापा फ्राँसिस 09 सितम्बर को मोरिशस की राजधानी पोर्ट लूईस में कर रहे हैं। यह लघु द्वीप राज्य अपने सुहावने समुद्री तटों एवं सुविधाजनक शुल्क संधियों के लिये विख्यात है, जिनपर निर्धनता विरोधी संगठनों ने विकासशील देशों की समृद्धि को नष्ट करने का भी आरोप लगाया है। मोरिशस की 14 लाख की कुल आबादी में लगभग 49 प्रतिशत हिन्दू, 17 प्रतिशत मुसलमान तथा शेष जनता ख्रीस्तीय धर्मानुयायी है जिनमें 25 प्रतिशत लोग काथलिक धर्मानुयायी हैं।  

सन्त पापा फ्राँसिस 09 सितम्बर की एक दिवसीय मोरिशियुस यात्रा के दौरान धन्य जाक्स डेज़ीरे लावाल की समाधि पर भी श्रद्धार्पण करेंगे, जो फ्राँस के एक चिकित्सक थे तथा बाद में एक पुरोहित बन गये थे। डेज़ीरे लावाल 1841 ई. में पोर्ट लूईस पहुँचे थे जब मोरिशस ब्रिटेन का एक उपनिवेश हुआ करता था। डेज़ीरे लावाल ने अपना सम्पूर्ण जीवन पूर्व गुलामों की सेवा में अर्पित कर दिया था।

मोरिशस में ही सन्त पापा फ्राँसिस पवित्र कुवांरी मरियम को समर्पित एक स्मारक पर ख्रीस्तयाग अर्पित करेंगे।

सन्त पापा फ्राँसिस के आगमन पर खुशी ज़ाहिर करते हुए मोरिशस के कार्डिनल मोरिस पियात ने स्थानीय मीडिया से बातचीत में कहा, "सन्त पापा फ्राँसिस शांति के सन्देशवाहक और तीर्थयात्री रूप में मोरिशस आ रहे हैं।" इसी बीच, प्रधान मंत्री प्राविन्द जुगनौथ ने कहा, "सन्त पापा फ्राँसिस की यह यात्रा केवल काथलिकों की यात्रा नहीं है बल्कि यह धार्मिक विविधता सहित मोरिशस के सभी नागरिकों के प्रति उनकी तीर्थयात्रा है।"   

04 September 2019, 11:58