खोज

Vatican News
संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

ईश्वर के शांति उपहार को बर्बाद न करें, संत पापा फ्राँसिस

संत पापा ने शांति के लिए 33वीं प्रार्थना सभा "शांति की कोई सीमा नहीं", के प्रतिभागियों को एक संदेश भेजा और सभी लोगों के बीच एकता और हमारे सामान्य घर के लिए सम्मान का आग्रह किया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार 16 सितम्बर, 2019 (वाटिकन न्यूज) : "यह देखकर मुझे खुशी होती है कि सालों से चलती आ रही ‘शांति तीर्थयात्रा’... कभी बाधित नहीं हुई और आगे बढ़ती ही जा रही है।" संत पापा फ्राँसिस ने मैड्रिड के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल कार्लोस ओसोरो सिएरा और शांति के लिए 33 वीं प्रार्थना सभा के प्रतिभागियों को संबोधित कर संदेश में कहा।

संत इजीदियो समुदाय द्वारा आयोजित शांति के लिए प्रार्थना सभा की शुरुआत 33 साल पहले की गई। इस वर्ष प्रार्थना सभा का आयोजन मैड्रिड में 15 से 17 सितम्बर तक किया गया है, जिसका विषयवस्तु है, "शांति की कोई सीमा नहीं।"

शांति के लिए प्रार्थना का योगदान

संत पापा फ्राँसिस ने 30 साल पहले बर्लिन की दीवार के गिरने की याद करते हुए अपना संदेश शुरू किया था, जब, "यूरोपीय महाद्वीप के इस भयानक विभाजन ने इतना कष्ट दिया था।"

उन्होंने कहा कि जिस दिन बर्लिन की दीवार को गिराया गया, तो यह दुनिया भर में "नई शांति और आशा" लेकर आया। हम आश्वस्त हैं, कि "ईश्वर के कई पुत्रों और पुत्रियों ने शांति के लिए प्रार्थना की, उन्होंने इस पतन में योगदान दिया।"

संत पापा ने जेरिको की कहानी का उल्लेख किया, जो हमें याद दिलाती है कि "दीवारें तब गिरती हैं जब वे शांति के लिए लालायित प्रार्थना करते हैं। हथियारों से इसे पा नहीं सकते परंतु जब सभी के अच्छे भविष्य के लिए सपने देखते हैं तो यह संभव है।" इस कारण से, "हमेशा प्रार्थना और शांति के परिप्रेक्ष्य में बातचीत करना आवश्यक है।" हम जानते हैं कि "प्रभु अपने लोगों की प्रार्थना जरुर सुनते हैं।"

ईश्वर के उपहार की बर्बादी

संत पापा ने कहा,“इस सदी के पहले दो दशकों में हमने युद्धों और "नई दीवारों एवं बाधाओं के निर्माण करके, "ईश्वर के उपहार शांति" को बर्बाद किया है। "अपने आप को लोगों से अलग रखना और अपने देश को दूसरों के लिए बंद करना मूर्खता है। यह लोगों की भलाई, और दुनिया की भलाई दोनों के लिए मूर्खता है। हमारी दुनिया, हमारा आम घर, "प्यार, देखभाल और सम्मान की मांग करता है ... उसी तरह मानवता शांति और भाईचारे की मांग करती है।"

दीवार नहीं, बल्कि दरवाजे

"दीवारों से अलग" करने के बजाय, आम घर को "खुले दरवाजे की ज़रूरत है, जहाँ सभी लोग विविधता का सम्मान कर सकें। आपसी सहयोग और शांति के साथ रहने की जिम्मेदारी ले सकें तथा मुलाकात की संस्कृति को मजबूत बनाते हुए आपसी भाईचारे के बंधन को मजबूत कर सकें।”  

निकटता

संत पापा फ्राँसिस ने बैठक में भाग लेने वाले सभी लोगों, विभिन्न ख्रीस्तीय कलीसियाओं और दुनिया भर के अन्य धर्मों के लोगों के साथ अपनी निकटता व्यक्त की।उन्होंने कहा,“यह प्रार्थना, "एक आम भावना में, बिना किसी भ्रम के हम सभी को एकजुट करती है, क्योंकि शांति विभिन्न धर्मों और परंपराओं की एक सामान्य इच्छा है।”

मानव भाईचारे का दस्तावेज

संत पापा फ्राँसिस ने फरवरी में अबू धाबी में विश्व शांति और एक साथ रहने के लिए "मानव शांति पर दस्तावेज़", पर हस्ताक्षर किया था। उन्होंने कहा, अल-अजहर के ग्रैंड इमाम के साथ, "हमने पुष्टि की कि धर्मों को कभी भी युद्ध, घृणास्पद व्यवहार, शत्रुता और अतिवाद को उकसाना नहीं चाहिए और न ही उन्हें हिंसा या खून बहाने के लिए उत्तेजित करना चाहिए।"

एक दिल से एक आवाज़

अंत में, संत पापा फ्राँसिस ने सभी प्रतिभागियों से "एक दिल और एक आवाज़" के साथ एकजुट होने का आग्रह किया, "शांति की कोई सीमा नहीं है।" लोगों के दिलों में शांति और भाईचारे की भावनाओं को बोया जाना चाहिए।

16 September 2019, 16:39