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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

संपत्ति से अधिक मूल्यवान है व्यक्ति, देवदूत प्रार्थना में संत पापा

इस रविवार के सुसमाचार पाठ में निहित दृष्टांत (लूक.16,1-13) में एक नायक है जो एक चतुर और बेईमान करिंदा है जिसपर अपने स्वामी के धन का अपव्याय करने का आरोप है और जिसे निकाल दिया जाएगा। इस विकट परिस्थिति में वह प्रत्यारोप नहीं करता, न ही सफाई देने की कोशिश करता और न निराश होता है बल्कि शांतिपूर्ण भविष्य के लिए एक रास्ता निकालता है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार, 23 सितम्बर 2019 (रेई)˸ वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 22 सितम्बर को, संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया, देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

इस रविवार के सुसमाचार पाठ में निहित दृष्टांत (लूक.16,1-13) में एक नायक है जो एक चतुर और बेईमान करिंदा है जिसपर अपने स्वामी के धन का अपव्याय करने का आरोप है और जिसे अपने उत्तरदायित्व से निष्कासित किया जाएगा। इस विकट परिस्थिति में वह प्रत्यारोप नहीं करता, न ही सफाई देने की कोशिश करता और न निराश होता है बल्कि शांतिपूर्ण भविष्य के लिए एक रास्ता निकालता है। सबसे पहले वह अपनी कमजोरियों को स्वीकार करते हुए स्पष्ट प्रतिक्रिया व्यक्त करता है, "मैं क्या करूँ? मेरा स्वामी मुझे कारिन्दगरी से हटा रहा है। मिट्टी खोदने का मुझ में बल नहीं; भीख माँगने में मुझे लज्जा आती है।" (पद. 3) तब वह चतुराई से काम करता है और अपने स्वामी को अंतिम बार लूटता है।

येसु बेईमानी को बढ़ावा नहीं देते

वह कर्जदारों को बुलाता है तथा उनके साथ मित्रता स्थापित करने के लिए, स्वामी से लिए गये कर्ज की मात्रा  कम कर देता है जिससे वे बाद में उसका स्वागत करें।

संत पापा ने कहा, "येसु इस दृष्टांत को प्रस्तुत करते हुए निश्चय ही बेईमानी को बढ़ावा नहीं देते बल्कि चतुराई को दिखलाते हैं। "स्वामी ने बेईमान कारिन्दा को इसलिए सराहा कि उसने चतुराई से काम किया; क्योंकि इस संसार की सन्तान आपसी लेन-देन में ज्योति की सन्तान से अधिक चतुर है।" (8) बुद्धिमानी और चतुराई हमें कठिन परिस्थितियों से बाहर निकलने में मदद करते हैं। इस कहानी को समझने की कुँजी येसु के निमंत्रण में है, "झूठे धन से अपने लिए मित्र बना लो, जिससे उसके समाप्त हो जाने पर वे परलोक में तुम्हारा स्वागत करें।" (9) बेईमानी से अर्जित धन को शैतान का ड्रग भी कहा जाता है जिसमें साधारण भौतिक चीजें होती हैं।

धन का दुरूपयोग

धन दीवार खड़ा करने के लिए मजबूर कर सकता है, विभाजन ला सकता है और भेदभाव उत्पन्न कर सकता है। येसु दूसरी ओर अपने शिष्यों को रास्ता बदलने के लिए निमंत्रण देते हैं, "झूठे धन से अपने लिए मित्र बना लो।" यह इस बात के लिए निमंत्रण है कि हम चीजों और समृद्धि को किस तरह संबंधों में बदलें क्योंकि व्यक्ति सम्पति से अधिक मूल्यवान है और उसके पास जो धन है उससे बढ़कर गिना जाना चाहिए, क्योंकि जो लोग धन के द्वारा बहुत अधिक संबंध स्थापित करते और उसे बनाये रखते हैं यह एक कृपादान है जिसको ईश्वर ने उन्हें प्रदान किया है।

येसु के आह्वान का अंतिम उद्देश्य 

येसु अपने आह्वान के अंतिम उद्देश्य की ओर संकेत देते हैं। झूठे धन से अपने लिए मित्र बना लो, जिससे उसके समाप्त हो जाने पर वे परलोक में तुम्हारा स्वागत करें।" स्वर्ग में हमारा स्वागत किये जाने के लिए हमें धन को भाईचारा एवं एकात्मता के उपकरण के रूप में बदलना होगा क्योंकि वहाँ केवल ईश्वर नहीं होंगे बल्कि वे सभी लोग होंगे, जिसके साथ मैंने अपने जीवन को साझा किया। उन लोगों के बीच अच्छी तरह व्यवस्था की जिनको ईश्वर ने हमें दिया।

हमारी कमजोरियों एवं असफलताओं में येसु का आश्वासन 

यह सुसमाचार पाठ बेईमान करिंदा के सवाल को हममें प्रतिध्वनित करता है जो अपने स्वामी द्वारा निकाला जानेवाला था, "अब मैं क्या करूँगा?" (पद.3) हमारी कमजोरियों एवं असफलताओं के क्षण येसु हमें आश्वासन देते हैं कि हम अच्छाई के द्वारा हमेशा ही बुराई पर विजय पा सकते हैं। हम शोक मनाते हैं ताकि दूसरों को खुशी मिले, दूसरों का समान लेकर जरूरतमंद लोगों को दान कर देते हैं, ऐसा करने के द्वारा हम प्रभु की स्तुति करते हैं क्योंकि हमने चतुराई से काम किया है। यह उस प्रकार की चतुराई है जिसके द्वारा व्यक्ति अपने आपको ईश्वर का बेटा या बेटी स्वीकार करता तथा स्वर्ग राज्य के लिए खेल खेलता है।  

माता मरियम हमें चतुर बनने में मदद करे

संत पापा ने माता मरियम से प्रार्थना की कि वे हमें चतुर बनने में मदद करें ताकि हम दुनिया की सफलताओं के लिए नहीं बल्कि अनन्त जीवन के लिए निश्चिंत हो सकें, जिससे कि अंतिम न्याय के समय वह जरूरतमंद व्यक्ति हमारे लिए साक्ष्य दे सके कि इसके माध्यम से हमने प्रभु को देखा और उनकी सेवा की है।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

23 September 2019, 15:48