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मोजाम्बिक में प्रेरितिक यात्रा के अंतिम दिन ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा फ्राँसिस मोजाम्बिक में प्रेरितिक यात्रा के अंतिम दिन ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

ख्रीस्त की शांति हृदयों में राज करे, ख्रीस्तयाग प्रवचन में पोप

मोजाम्बिक में अपनी प्रेरितिक यात्रा समाप्त करने के पूर्व 6 सितम्बर को संत पापा फ्राँसिस ने मापूतो के जिम्पेतो स्टेडियम में ख्रीस्तयाग अर्पित किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

मापूतो, शुक्रवार, 6 सितम्बर 2019 (रेई)˸ संत पापा ने प्रवचन में संत लूकस रचित सुसमाचार से लिए गये पाठ पर चिंतन करते हुए कहा, "अपने शिष्यों को चुनने और धन्यताओं की घोषणा करने के बाद येसु कहते हैं, ‘मैं तुम लोगों से, जो मेरी बात सुनते हो, कहता हूँ-अपने शत्रुओं से प्रेम करो।’" (लूक. 6:27) संत पापा ने कहा कि आज उनके ये शब्द हमें भी सम्बोधित कर रहे हैं जो इस स्टेडियम में उन्हें सुन रहे हैं। 

संकरा रास्ता

येसु स्पष्ट, सरल और दृढ़ शब्दों में बतलाते हैं कि एक संकरा रास्ता है जो सदगुणों की मांग करता है। जिसको उन्होंने धन्यताओं में प्रस्तुत किया है। येसु वास्तविक शत्रुओं के बारे बतलाते हैं जो हमसे घृणा करते, हमारा तिरस्कार करते, हमें भला-बुरा कहते और हमारा अपमान करते हैं।

संत पापा ने कहा कि आप में से कई अपनी ही कहानी बतला सकते हैं कि आपको हिंसा, घृणा और संघर्ष का सामना करना पड़ा। दुःख देने वाले जिंदे हों अथवा न हों, डर के कारण पुराने घाव फिर खुल जाते और शांति यात्रा में बाधा डालते हैं जैसा कि काबो डेलगादो में हुआ।

प्रेम के रास्ते पर चलने का निमंत्रण

येसु हमको अमूर्त, अस्पष्ट या सैद्धांतिक प्रेम के लिए नहीं बुला रहे हैं, वे उस रास्ते पर चलने के लिए बुला रहे हैं जिसपर वे स्वयं चले। उस रास्ते ने उन्हें प्रेम करने के लिए प्रेरित किया, उस व्यक्ति को भी जिसने उन्हें धोखा दिया, उनके साथ अन्याय किया और उन्हें मार डाला।

मेल-मिलाप पर चर्चा करना अथवा क्षमाशीलता की ओर कदम बढ़ाना आसान नहीं है जब वर्षों के संघर्ष के बाद घाव ताजा हो। यह दुःखों को अनदेखा करना अथवा हमारी यादों एवं विचारों को त्याग देना भी नहीं है। येसु ख्रीस्त हमें प्रेम और भलाई करने का निमंत्रण दे रहे हैं जो हानि पहुंचाने वाले व्यक्ति को अनदेखा करने अथवा उनका सामना करने से बचने की कोशिश, से बढ़कर है। येसु हमें उन लोगों के प्रति सक्रिय, निष्पक्ष और असाधारण परोपकार प्रदर्शित करने का आदेश दे रहे हैं, जिन्होंने हमें चोट पहुंचाई है। येसु यहीं नहीं रूकते। वे हमें उन्हें आशीर्वाद देने और उनके लिए प्रार्थना करने को कहते हैं। दूसरे शब्दों में, उनके साथ शुभकामना भरे शब्दों में बातें करने, मौत नहीं जीवन के शब्दों का प्रयोग करने, उनका अपमान करने या बदला लेने नहीं बल्कि एक नया संबंध स्थापित करने का परामर्श देते हैं जो शांति लाती है। यह एक बड़ा उदाहरण है जिसको प्रभु हमारे सामने रखते हैं।

मोजाम्बिक के युवा
मोजाम्बिक के युवा

प्रतिशोध के नियम से दूर सहने की सलाह

इन चीजों को करने का निमंत्रण देते हुए येसु प्रतिशोध के नियम को ख्रीस्तियों के जीवन से हमेशा के लिए दूर करना चाहते हैं। हम हिंसा के आधार पर भविष्य को नहीं देख सकते अथवा न्यायसंगत राष्ट्र का निर्माण ही कर सकते हैं। हम येसु का अनुसरण नहीं कर सकते यदि हम आँख के बदले आँख और दाँत के बदले दाँत के नियम पर चलते हैं।

कोई भी परिवार, दल, जाति अथवा देश का भविष्य नहीं हो सकता, यदि उनको जोड़ने, उनकी समस्याओं का समाधान करने और उन्हें एक साथ लाने की शक्ति प्रतिशोध और घृणा पर आधारित हो। हम बदला लेने या हिंसा के बदले हिंसा करने के लिए एकजुट नहीं हो सकते और न ही जाहिर तौर पर कानूनी सहायता के तहत प्रतिशोध के अवसरों की साजिश रच सकते हैं। हल खोजने की अपेक्षा हिंसा का हथियार देने से नया और अधिक गंभीर संघर्ष शुरू होता है। हिंसा से उत्पन्न एकता हमेशा पेंचदार होता है जिससे कोई बच नहीं सकता और इसकी कीमत बहुत अधिक होती है। फिर भी एक रास्ता सम्भव है हमारे लोगों के लिए शांति एक अधिकार है।

येसु पहला स्वर्णीम नियम

अपनी आज्ञा को स्पष्ट करने और दैनिक जीवन में लागू करने के लिए येसु पहला स्वर्णीम नियम देते हैं जिसको सभी लोग अपना सकते हैं, "दूसरों से अपने प्रति जैसा व्यवहार चाहते हो, तुम भी उनके प्रति वैसा ही किया करो।" (लूक. 6:31) वे यह महसूस करने में मदद देते हैं कि दूसरों के लिए क्या महत्वपूर्ण हैः एक-दूसरे से प्रेम करना, एक-दूसरे की मदद करना और वापस पाने की आशा किये बिना उधार देना।  

संत पापा ने कहा कि हम एक-दूसरे से प्रेम करें जैसा कि येसु ने हमें करने का आदेश दिया है। संत पौलुस कहते हैं "आप लोगों को अनुकम्पा, सहानुभूति, विनम्रता, कोमलता और सहनशीलता धारण करनी चाहिए।" (कलो. 3:12)

गायक दल
गायक दल

दुनिया किस चीज को महत्व देती है

दुनिया करूणा और सहानुभूति के सदगुणों को महत्व नहीं देती और उन्हें दरकिनार करती है। यह विकलांग एवं बुजूर्ग लोगों को मार डालती अथवा त्याग देती है। यह घायलों और दुर्बलों का अंत करती है किन्तु जानवरों की पीड़ा पर बहुत अधिक सहानुभूति प्रकट करती है। यह पड़ोसियों के प्रति भलाई और दयालुता की भावना प्रकट नहीं करती है।   

विभाजन एवं हिंसा से ऊपर उठना हमसे मांग करता है कि हम मेल-मिलाप या शांति का अर्थ, संघर्ष का अभाव न समझे। यह हरेक से प्रतिदिन प्रतिबद्धता की मांग करता है कि हम अपने लिए जिस दया और अच्छाई की उम्मीद करते हैं दूसरों के साथ वैसा ही करने का ख्याल रख सकें।

करुणा एवं अच्छाई का मनोभाव

करुणा एवं अच्छाई का मनोभाव सबसे बढ़कर उन लोगों के प्रति रखें, जो समाज में अपने स्थान के अनुसार जल्द ही तिरस्कृत एवं बहिष्कृत महसूस करते हैं। यह कमजोर लोगों का नहीं बल्कि बलिष्ठ पुरूषों और स्त्रियों का मनोभाव है जो महसूस करते हैं कि खुद को महत्वपूर्ण दिखलाने के लिए दूसरों के साथ गलत व्यवहार करना, उन्हें बदनाम करना या उन्हें कुचलना देना आवश्यक नहीं है। बल्कि इसके विपरीत यह एक नबी की शक्ति का मनोभाव है जिसको स्वयं येसु ने उनके साथ पहचाने जाने की इच्छा से प्रकट किया है और सेवा करने की शिक्षा द्वारा दिखलाया है।

मोजाम्बिक प्रकृति एवं संस्कृति का एक धनी देश है फिर भी विडंबना यह है कि बड़ी संख्या में इसके नागरिक गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करते हैं। कई बार ऐसा लगता है कि जो लोग उनकी सहायता करना चाहते हैं उनकी रूचि अलग है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसा इसी भूमि के भाई-बहनों के द्वारा होता है जो अपने आपको भ्रष्ट होने देते हैं। यह सोचना बहुत खतरनाक है कि यह विदेशी सहायता के लिए भुगतान की जाने वाली कीमत है।

ख्रीस्तयाग में भाग लेते विश्वासी
ख्रीस्तयाग में भाग लेते विश्वासी

आनन्द, आशा, शांति और मेल-मिलाप के बीज बनें

संत पापा ने सभी विश्वासियों से कहा, "तुम में ऐसी बात नहीं होगी।" (मती. 20:26;  26-28) येसु के ये शब्द हमसे आग्रह करते हैं कि हम दूसरे तरह से व्यवहार करें जो उनके राज्य के अनुकूल हो। आनन्द, आशा, शांति और मेल-मिलाप के बीज बनें। पवित्र आत्मा जिस चीज को प्रदान करने आये हैं वह बेचैनी का कार्य नहीं है बल्कि दूसरों की चिंता करना, उन्हें अपने भाई-बहन की तरह पहचानना एवं उनकी सराहना करना और उनके सुख-दुःख में सहभागी होना है। यह किसी भी तरह की विचारधारा को समझने के लिए सबसे अच्छा बैरोमीटर है जो राजनीतिक या व्यक्तिगत हित के लिए गरीबों और उनके प्रति अन्याय की स्थितियों में हेरफेर करते हैं। इस तरह हम जहाँ कहीं भी मुलाकात करते हैं उन स्थलों पर शांति एवं मेल-मिलाप के उपकरण बन सकते हैं।

हम चाहते हैं कि हमारे हृदयों में तथा लोगों के जीवन में शांति का राज हो। हम शांति के भविष्य की कामना करते हैं। हम चाहते हैं कि ख्रीस्त की शांति हमारे बीच राज करे।

मोजाम्बिक के भविष्य की आशा

संत पापा ने सभी विश्वासियों के लिए कामना की कि ख्रीस्त की शांति हमारे हृदयों में एम्पायर की तरह राज करे, यदि ख्रीस्त की शांति हमारे हृदयों में राज करेगा तो जब कभी हमारी भावनाओं में संघर्ष होगा अथवा जब हम दो अलग-अलग भावनाओं में विभाजित महसूस करेंगे तब ख्रीस्त के अनुसार खेलेंगे, जिनका निर्णय हमें सबसे गरीब लोगों के प्रति प्रेम और दया के पथ पर आगे ले चलेगा और प्रकृति की रक्षा करने हेतु प्रेरित करेगा। इस तरह हम हम शांति के रास्ते पर आगे बढ़ेंगे। यदि येसु को हमारे देश के जटिल निर्णयों में, हमारे दिलों में परस्पर विरोधी भावनाओं के बीच कार्य करने देंगे, तो मोजाम्बिक के भविष्य की आशा सुनिश्चित होगा। तब आपका देश ईश्वर के प्रति हार्दिक आभार के साथ भजन और आध्यात्मिक गीत गाता रहेगा।

06 September 2019, 15:53