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मोरांदी पुल मोरांदी पुल  (ANSA)

मोरांदी पुल ध्वस्त होने की बरसी पर संत पापा का संदेश

इटली के जेनोवा स्थित मोरांदी पुल दुर्घटना जिसमें 43 लोगों की मौत हो गयी थी और करीब 600 लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा, उसकी पहली बरसी पर संत पापा फ्राँसिस ने उस दुःखद दिन की याद की।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 13 अगस्त 2019 (रेई)˸ इटली के जेनोवा स्थित मोरांदी पुल दुर्घटना जिसमें 43 लोगों की मौत हो गयी थी और करीब 600 लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा, उसकी पहली बरसी पर संत पापा फ्राँसिस ने उस दुःखद दिन की याद की। मोरांदी पुल 14 अगस्त 2018 को सुबह 11.30 बजे भारी वर्षा के बीच ध्वस्त हो गया था।

जेनोवा के समाचार पत्र "इल सेकोलो दिचानोवे" एवं गेदी न्यूज नेटवर्क में संत पापा के पत्र को प्रकाशित किया गया है।  

"इल सेकोलो दिचानोवे" समाचार को प्रेषित पत्र में संत पापा ने याद किया है कि "एक घाव जेनोवा के हृदय में है, यह उन लोगों के लिए एक त्रासदी है जिन्होंने अपने रिश्तेदारों को खोया है। यह एक दिल दहलानेवाली घटना है जिन्होंने लोगों को अपना घर छोड़ने और अन्यत्र जाने के लिए मजबूर किया है।"

संत पापा ने याद किया है कि कई परिवार छुट्टियों पर जा रहे थे अथवा छुट्टियों से लौट रहे थे और कुछ लोग काम पर जा रहे थे। संत पापा ने इस भयंकर घटना से प्रभावित सभी लोगों के लिए प्रार्थना की है।

उन्होंने कहा, "मैं आपको बतलाना चाहता हूँ कि मैंने आपको नहीं भूला है। मैंने घटना के शिकार लोगों, उनके प्रियजनों, घायलों, विस्थापितों एवं जेनोवा के सभी लोगों के लिए प्रार्थना की है और अब भी करता हूँ। इस तरह की घटनाओं के सामने, प्रियजनों को खोने का दर्द, जिसको शांत नहीं किया जा सकता, उस त्रासदी के सामने जिसको रोका जा सकता था उसे स्वीकार करना कठिन है।     

सबसे बढ़कर हम प्रार्थना करें

संत पापा ने लिखा है कि उनके पास इसका तैयार जवाब नहीं है क्योंकि ऐसी परिस्थितियों के सामने मानवीय शब्द कम पड़ जाते हैं।

उन्होंने कहा, "मेरे पास कोई जवाब नहीं है क्योंकि इस त्रासदी के बाद हमें आँसू बहाना है, मौन रहना है, हम जो निर्माण करते हैं उसकी भंगुरता पर अपने आप से सवाल करना है और सबसे बढ़कर हमें प्रार्थना करना है।"

याद को न भूलें

संत पापा ने एक पिता और एक भाई के रूप में कहा है कि समुदाय का निर्माण करने वाले रिश्तों को जीवन की इन घटनाओं द्वारा टूटने न दें, उस याद को मिटा दें जिसने इसके इतिहास को इतना महत्वपूर्ण बनाया है।

उन्होंने कहा, "मैं जब कभी जेनोवा की याद करता हूँ तब मुझे बंदरगाह की याद आती है। मैं उस स्थान की याद करता हूँ जहाँ से मेरे पिताजी प्रस्थान किये थे। मैं जेनोवा के लोगों के प्रतिदिन के कार्यों, उनकी दृढ़ इच्छा और आशा को सोचता हूँ।"

ईश्वर हमें अकेले नहीं छोड़ते हैं

संत पापा ने आह्वान किया है कि हम अपनी निगाह येसु की ओर लगायें जो हमारे बीच दुःख भोगे और मर गये। उन्हें तिरस्कृत और अपमानित होना पड़ा, उन्हें पीटा गया, सूली पर चढ़ाया गया और बर्बरतापूर्वक मार डाला गया।" उन्होंने कहा कि यह हमारे दुःखों के लिए ईश्वर का उत्तर है, उनकी उपस्थिति है जो हमारा साथ देते हैं और हमें अकेले नहीं छोड़ते हैं। हम यह जान लें कि ईश्वर हमारे पिता ने हमारे रूदन और हमारे सवालों का उत्तर दिया है, शब्दों से नहीं बल्कि अपने पुत्र की उपस्थिति एवं साथ द्वारा। आइये हम उनको देखें, हम अपने सवालों, पीड़ाओं एवं गुस्से को उन्हें अर्पित करें।

हम सभी लोग त्रुटियों और कमजोरियों से भरे हैं किन्तु हमारे पिता करूणावान हैं, उनके पुत्र जिन्होंने क्रूस उठाया और पुनर्जीवित हुए वे हमारे साथ चलते हैं तथा पवित्र आत्मा हमारी सहायता करते एवं साथ देते हैं। स्वर्ग में हमारी एक माता है जो हमें कभी नहीं छोड़ती तथा सदा अपनी करुणा का आंचल हमारे ऊपर फैलाती है।

आशा न खोयें

पत्र में संत पापा ने इस बात पर भी जोर दिया है कि जेनोवा के लोग एकात्मता के महान भाव को प्रकट कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि वे उस भाव को न त्यागें तथा उन लोगों की मदद करें जो निहायत आवश्यकता में पड़े हैं।

"मैं यह भी बतलाना चाहता हूँ कि आप अकेले नहीं हैं क्योंकि ख्रीस्तीय समुदाय, जेनोवा की कलीसिया आप के साथ है और आपके दुःखों एवं कठिनाइयों में सहभागी है। हम जितना अधिक अपनी कमजोरियों एवं परनिर्भरता की मानवीय परिस्थिति के प्रति सचेत होते हैं, उतना ही अधिक मानवीय रिश्तों की सुन्दरता की खोज करते हैं, और एकता के सूत्र में बांधने वाले, परिवार, समुदाय और नागरिक समाज के संबंधों को पहचानते हैं।"

संत पापा ने अंत में कहा कि इस भयंकर त्रासदी के बाद जिसने आपके परिवार एवं शहर को घायल किया है आप प्रतिक्रया व्यक्त कर सकते हैं, उठ सकते हैं और आगे नजर डाल सकते हैं। आप आशा न खोयें और उन लोगों का साथ देते रहें जो इससे बहुत अधिक प्रभावित हैं।

13 August 2019, 16:33