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रिमिनी सभा रिमिनी सभा 

रिमिनी सभा को संत पापा की शुभकामनाएँ

संत पापा फ्राँसिस ने इटली के रिमिनी शहर में मैत्री संगोष्ठी के प्रतिभागियों को एक संदेश भेजा तथा उनसे अपील की कि वे अपने समय के लोगों को प्रभु का चेहरा दिखलायें जो जीवन की समस्याओं से जूझ रहे हैं।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पीयेत्रो परोलिन ने संत पापा की ओर शनिवार को 40वीं रिमिनी सभा के प्रतिभागियों को शुभकामनाएं अर्पित की। सभा 18 से 24 अगस्त तक चलेगी।

उत्तरी इटली में यह एक वार्षिक सभा है जिसमें विभिन्न आस्था एवं संस्कृति के लोगों को मित्रता एवं शांति के महौल में एक साथ लाने का प्रयास किया जाता है।

सच्ची छवि

इस वर्ष रिमिनी सभा की विषयवस्तु को संत पापा जॉन पौल द्वितीय की कविता से ली गयी है, "तुम्हारे नाम की उत्पति वहाँ से हुई है जहाँ तुमने नजर लगाया।" यह संत वेरोनिका के संदर्भ में कही गयी है जिन्होंने कलवारी के रास्ते पर क्रूस ढोये येसु का चेहरा पोंछा था।

कार्डिनल परोलिन ने लिखा कि संत पापा फ्राँसिस रिमिनी सभा के प्रति अपनी इच्छा प्रकट करते हैं कि यह लोगों के सच्चे चेहरे के साथ मुलाकात करने का स्थान बने। उन्होंने "वेरोनिका" शब्द का लातीनी भाषा में संधि विच्छेद किया, "वेरा+इकोना" जिसका अर्थ है "सच्ची छवि"।     

जीवन का बोझ

कार्डिनल परोलिन ने कहा कि विषयवस्तु हमें स्मरण दिलाता है कि "येसु हमें प्यार करते हैं और उन्होंने हमारी अनूठी और अप्रतिरोध्य छवि की पुष्टि करने के लिए हमें अपना जीवन दिया है।"

उन्होंने कहा कि यह सच्चाई, हमारे समय के कई लोगों की याद दिलाती है जो जीवन के बोझ से दबे हैं तथा वंचित कर दिये गये हैं।

कार्डिनल ने सभी का आह्वान करते हुए कहा, "आइये हम उन हजारों लोगों की याद करें जो प्रतिदिन युद्ध और गरीबी के कारण भाग रहे हैं। वे वैध सदस्य नहीं हैं किन्तु उनके चेहरे, व्यक्तित्व, नाम और इतिहास हैं। हमें उन्हें कभी नहीं भूलना चाहिए। विशेषकर, ऐसे समय में जब हमारी फेंकने की संस्कृति उन्हें हाशिये पर रखती, उनसे भेदभाव करती, उनको उपयोग करती और उनके मानवीय प्रतिष्ठा को भय दिखाती है।"

अपने आपकी पुनः खोज

कार्डिनल परोलिन ने कहा कि कई लोग हैं जिन्हें प्रभु के चेहरे को देखना है ताकि वे अपने आप की खोज कर पायेंगे।

भय तथा आत्मारोपित निर्वासन में रहने की अपेक्षा, उन्होंने सलाह दी कि हम अपनी नजर येसु के चेहरे पर लगायें जो हमारी नजरों को शुद्ध करेंगे और हमें सब कुछ को नई आखों से देखने के लिए तैयार करेंगे।

हमारे समय में आशा प्रदान किये जाने की जरूरत है, वह आशा जिसको येसु प्रदान करते हैं।

कार्डिनल ने कहा कि हम उन्हें आशा प्रदान कर सकते हैं। अपने सच्चे चेहरे को प्रकट करने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि हम तभी सच्चे चेहरे को प्रकट कर पायेंगे, जब हमारा चेहरा पुनर्जीवित ख्रीस्त को प्रतिबिम्बित करने में दर्पण के समान काम करेगा।

17 August 2019, 16:52