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संत पापा द्वारा प्रस्तावना में पोपुलर मूवमेंट को प्रोत्साहन

संत पापा फ्राँसिस ने 5 वर्षों की खोज के बाद प्रकाशित किताब "लोकप्रिय आंदोलनों का उद्भव: हमारे समय का रेरूम नोवारम" के लिए लिखे प्रस्तावना में कहा है कि यह सामाजिक बदलाव के लिए एक कड़ी मेहनत का फल है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 20 अगस्त 2019 (रेई)˸ "लोकप्रिय आंदोलनों का उद्भव: हमारे समय का रेरूम नोवारम" को लातिनी अमरीका के लिए परमधर्मपीठीय आयोग द्वारा तैयार किया गया है एवं वाटिकन पब्लिशिंग हाऊस (एलएवी) द्वारा स्पानी भाषा में प्रकाशित किया गया है।

इस नई किताब में अमरीका में 2014 से लेकर अब तक आयोजित विश्व स्तर की सभाओं पर खोज की गयी है। खोज में पोपुलर मूवमेंट के हजारों लोगों ने भाग लिया है।

सामाजिक बदलाव

अपनी प्रस्तावना में संत पापा फ्राँसिस ने कहा है कि जो लोग समाज के सुदूर क्षेत्रों में जीते हैं वे न केवल एक क्षेत्र के लोग हैं जिनके पास कलीसिया को पहुँचना है बल्कि "वे राई के दाने के समान अंकुरित हैं जो बहुत अधिक फल उत्पन्न करेंगे।"  

उपनगरों या दूरवर्ती क्षेत्रों के लोग सामाजिक सहायता को ग्रहण करने में निष्क्रिय नहीं होते किन्तु वे अपने भविष्य के सक्रिय कर्णधार होते हैं।

संत पापा ने कहा, "पोपुलर मूवमेंट एक महत्वपूर्ण सामाजिक विकल्प को प्रस्तुत करता है, जो अंदर से उठती आवाज, अंतर्विरोध के चिन्ह तथा एक आशा को बदल सकता है।"

उन्होंने कहा कि उनके विरोध का तरीका, कड़ी मेहनत और कष्ट दिखलाता है कि पोपुलर मूवमेंट बेहतर भविष्य का प्रहरी है।

लोकतंत्र को पुनर्जीवित करें

संत पापा ने प्रस्तावना में कहा कि मानवता एक युग परिवर्तन से होकर गुजर रहा है जिसमें उसे डर, जेनोफोबिया और जातिवाद का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पोपुलर मूवमेंट उस प्रवृत्ति का प्रतिकार कर सकता है क्योंकि वह हमारे लोकतंत्रों को पुनर्जीवित करने के लिए नैतिक ऊर्जा का स्रोत है।

काम का मूल्य एवं फेंकने की संस्कृति

संत पापा ने प्रस्तवना के अंत में मानव श्रम को एक परम अधिकार कहा जिसकी रक्षा कलीसिया के सामाजिक सिद्धांत के अनुरूप की जानी चाहिए। "लोकप्रिय आंदोलन एक ठोस और वास्तविक साक्ष्य है जो दिखलाता है कि नये तरीके के कामों का सृजन करने के द्वारा जो एकात्मता एवं समुदाय पर केंद्रित हो, फेंकने की संस्कृति में बदलाव लाया जा सकता है...।"  

अंततः संत पापा ने "नया मानवतावाद" का आह्वान किया ताकि सार्वजनिक भलाई के लिए सहानुभूति और चिंता की कमी से बाहर निकला जा सके जो हमारे समय में प्रचलित हो गयी है।  

20 August 2019, 16:14