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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

यहूदी केंद्र पर आतंकवादी हमले की संत पापा ने की याद

संत पापा फ्राँसिस ने अर्जेंटीना के एक यहूदी केंद्र में हुए आतंकवादी बमबारी की 25 वीं वर्षगांठ की याद में एक पत्र भेजा जिसमें 85 लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों लोग घायल हो गए थे।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार 13 जुलाई 2019 (वाटिकन न्यूज) : "25 साल बीत चुके हैं" और हर 18 जुलाई को "मैं यहूदियों और ख्रीस्तियों, दोनों परिवारों के पीड़ितों को अपने दिल में रखता हूँ।"  उक्त बात संत पापा फ्राँसिस ने ब्यूनस आयर्स के यहूदी केंद्र एएमआईए को एक पत्र में लिखा, जिसका मुख्यालय 18 जुलाई 1994 को एक आतंकवादी हमले में नष्ट हो गया था जिसमें 85 लोगों की मौत हो गई थी और 200 से अधिक लोग घायल हो गए थे।

संत पापा ने कहा कि “धर्म के नाम पर जीवन और आशाओं को नष्ट करना” तथा “ईश्वर के नाम की निन्दा करना” पागलपन है। हम अच्छी तरह से जानते हैं कि जो उकसाता है और युद्ध की ओर ले जाता है, वह धर्म नहीं है लेकिन तर्कहीन कार्य करने वालों के दिलों का अंधेरा है।”  

संत पापा पीड़ित परिवारों को यह विश्वास दिलाते हुए ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि जो लोग पागलपन के इस कृत्य में अपनी जान गवांयी है ईश्वर उन्हें अनंत शांति दें। साथ ही संत पापा उन लोगों के लिए भी प्रार्थना करते हैं जो विस्फोट से बच गए, उनके शरीर और उनकी आत्मा घायल हो गई थी।"

"तीसरे विश्व युद्ध को टुकड़ों में लड़े जाने" का जिक्र करते हुए संत पापा ने कहा कि यह पागलपन निश्चित रूप से अर्जेंटीना तक सीमित नहीं है, "यह जीवन और भविष्य को" हर जगह रौंदता है।

उन्होंने कहा, “इसकी कोई सीमा नहीं है और पूर्व से पश्चिम तक अपने क्रूर कारनामे दिखाता है, यह विधवाओं, बेटों और बेटियों को अनाथों में बदल देता है और यह सब धर्म के नाम पर, ईश्वर के नाम का निंदनीय उपयोग है।”

संत पापा ने पत्र के अंत में सभी विश्वासियों को भाईचारा बनाये रखने हेतु आमंत्रित किया जिसके लिए ईश्वर हमें बुलाते हैं, “ईश्वर ने हमें भाइयों के रूप में एक साथ रहने के लिए बुलाया है और यह भाईचारा हमें किसी भी भौगोलिक या वैचारिक सीमा से परे एकजुट करता है। हम मिलकर महान मानव परिवार बनाते हैं, हमें आने वाली पीढ़ियों के लिए सम्मान और सहिष्णुता के मूल्यों के साथ,  बंधुत्व की इस जागरूकता को आगे बढ़ाना चाहिए। ईश्वर ने हमें गरिमा, कर्तव्यों और अधिकारों में समान बनाया है। शांति केवल हमारा अधिकार ही नहीं होना चाहिए, परंतु  उसका निर्माण करना भी हमारा दायित्व होना चाहिए। इस हमले के 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर मैं आपके साथ हूँ और मैं आपके साथ प्रार्थना करता हूँ।”

13 July 2019, 14:44