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देवदूत प्रार्थना के दौरान संत पापा फ्राँसिस देवदूत प्रार्थना के दौरान संत पापा फ्राँसिस 

सुसमाचार प्रचार की कुंजी, गतिशीलता, तत्परता, निश्चितता

आज के सुसमाचार पाठ में (लूक. 9,51-62), संत लूकस, येरूसालेम की ओर येसु की अंतिम यात्रा की कहानी शुरू करते हैं जिसका अंत अध्याय 19 में होता है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार, 1 जुलाई 2019 (रेई)˸ वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 30 जून को, संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

आज के सुसमाचार पाठ में (लूक. 9,51-62), संत लूकस, येरूसालेम की ओर येसु की अंतिम यात्रा की कहानी शुरू करते हैं जिसका अंत अध्याय 19 में होता है।

संत पापा ने कहा कि यह एक लम्बी यात्रा है न केवल भौगोलिक और स्थानिक बल्कि मसीह के मिशन की पूर्णता की ओर एक आध्यात्मिक एवं ईशशास्त्रीय यात्रा भी। येसु का निर्णय मौलिक एवं पूर्ण है और जो लोग उनका अनुसरण करते हैं उन्हें उनके समान चलना है। आज सुसमाचार लेखक हमारे सामने तीन व्यक्तियों को प्रस्तुत करते हैं और उनके द्वारा येसु का अनुसरण पूर्ण रूप से करने की चाह रखने वालों का पथ आलोकित करते हैं।

पहला व्यक्ति

पहले व्यक्ति ने येसु से प्रतीज्ञा की, - ''आप जहाँ कहीं भी जायेंगे, मैं आपके पीछे-पीछे चलूँगा''। (पद. 57) संत पापा ने कहा कि यह व्यक्ति उदार था किन्तु येसु जवाब देते हैं, ''लोमड़ियों की अपनी माँदें हैं और आकाश के पक्षियों के अपने घोंसले, परन्तु मानव पुत्र के लिए सिर रखने को भी अपनी जगह नहीं है''। (पद. 58) यह येसु की अत्यधिक गरीबी को दर्शाता है। येसु ने ईश्वर की खोयी हुई भेड़ के लिए उनके राज्य की घोषणा करने हेतु अपने माता-पिता के घर को छोड़ दिया और हर प्रकार की सुरक्षा का त्याग किया। हम जो उनके शिष्य हैं येसु हमें दिखलाते हैं कि दुनिया में हमारा मिशन स्थिर नहीं बल्कि गतिशील है। कलीसिया खुद गतिशील है। यह अपने घेरे में सुस्त और शांत नहीं रहती किन्तु विस्तृत क्षितिज के लिए खुली है। यह सुसमाचार प्रचार करने एवं लोगों के पास जाने के लिए भेजी गयी है।

दूसरा व्यक्ति

दूसरा व्यक्ति जिससे येसु की मुलाकात हुई, येसु ने उसे सीधे रूप से बुलाया किन्तु उसने जवाब दिया, ''प्रभु! मुझे पहले अपने पिता को दफ़नाने के लिए जाने दीजिए''। (पद. 59) यह एक उचित आग्रह था, जो माता-पिता का सम्मान करने की आज्ञा पर आधारित था। (निर्ग. 20,12) तब भी येसु जवाब देते हैं, "मुरदों को अपने मुर्दे दफनाने दो।" (पद. 60) यह जान - बूझकर चिढ़ानेवाला शब्द है परिवार की महत्वपूर्ण सच्चाई है फिर भी, इसके द्वारा येसु ईश्वर के राज्य की घोषणा की प्राथमिकता को पुष्ट करना चाहते हैं। सुसमाचार का प्रचार करना अति आवश्यक है जो मृत्यु के बंधन को तोड़ डालता तथा अनन्त जीवन प्रदान करता है। यह देर स्वीकार नहीं करता किन्तु तत्परता और पूर्ण उपलब्धता की मांग करता है। अतः कलीसिया गतिशील एवं निर्णयात्मक है। यह प्रतीक्षा किये बिना शीघ्र और सही समय पर कार्य करती है।

तीसरा व्यक्ति

तीसरा व्यक्ति येसु का अनुसरण करना चाहता था किन्तु एक शर्त पर, कि वह पहले अपने रिश्तेदारों से विदा ले ले। उससे प्रभु कहते हैं, - ''हल की मूठ पकड़ने के बाद जो मुड़ कर पीछे देखता है, वह ईश्वर के राज्य के योग्य नहीं''।  (पद. 62)

येसु का अनुसरण पछतावा करने अथवा पीछे पलटकर देखने वालों के लिए नहीं है किन्तु निर्णय लेने के सदगुण की मांग करता है।

येसु का अनुसरण करने के लिए कलीसिया गतिशील रहती, तत्परता, शीघ्रता एवं दृढ़ता से कार्य करती है। येसु द्वारा जारी गतिशीलता, तत्परता एवं निर्णय करने जैसे शर्तों का महत्व जीवन के अच्छे एवं मूल्यवान चीजों को बरम्बार न कहने में नहीं है बल्कि ख्रीस्त के शिष्य होने में है। एक मुक्त एवं अंतःकरण की आवाज का चुनाव, जिसको प्रेम से किया जाता है। खुद की गरिमा के लिए नहीं किन्तु ईश्वर के मुफ्त कृपादानों के बदले दिया जाता है। धिक्कार उन लोगों को येसु का अनुसरण, महत्वपूर्ण समझे जाने एवं सम्मानित स्थान पाने के लिए एवं अपनी गरिमा के लिए करते हैं। वे इसे एक पेशा बनाते हैं।

ख्रीस्त एवं सुसमाचार के लिए उत्साही बनें

येसु चाहते हैं कि हम उनके प्रति एवं सुसमाचार के लिए उत्साही बने रहें। हृदय का उत्साह सामीप्य के ठोस चिन्ह में प्रकट होता है, उन भाई-बहनों की देखभाल करने एवं स्वागत करने के द्वारा जो जरूरतमंद हैं।     

धन्य कुँवारी मरियम जो आनन्द और प्रेम से येसु का अनुसरण करने और मुक्ति के सुसमाचार का प्रचार करने में कलीसिया का प्रतीक है, हमें सहायता प्रदान करे।

01 July 2019, 16:49