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कमेरिनो में ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा कमेरिनो में ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा 

कमेरिनो में पोप का मिस्सा ˸"याद, मरम्मत, पुनर्निर्माण...एकजुट"

संत पापा फ्राँसिस ने रविवार 16 जून को इटली के कमेरिनो शहर का दौरा किया जहाँ उन्होंने ख्रीस्तयाग अर्पित किया। कमेरिनो शहर 2016 में आये भूकम्प से बुरी तरह प्रभावित हुआ था और पुनःनिर्माण कार्य अब भी नहीं हो पाये हैं। लोग आपालकालिन आवासों में रह रहे हैं।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

इटली, सोमवार, 17 जून 2019 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने रविवार 16 जून को इटली के कमेरिनो शहर का दौरा किया जहाँ उन्होंने ख्रीस्तयाग अर्पित किया। कमेरिनो शहर 2016 में आये भूकम्प से बुरी तरह प्रभावित हुआ था और पुनःनिर्माण कार्य अब भी नहीं हो पाये हैं। लोग आपालकालिन आवासों में रह रहे हैं।  

संत पापा ने प्रवचन में स्तोत्र ग्रंथ के 8वें अध्याय पर प्रकाश डालते हुए कहा, "मनुष्य क्या है, जो तू उसकी सुधि ले?" (स्तोत्र 8.5) उन्होंने कहा, "आप लोगों की याद करते हुए मेरे मन में ये ही शब्द आये। अपने घरों को गिरते और मालबे में परिणत होते देखने के कारण पीड़ित लोगों को देखकर यही सवाल उठता है कि मनुष्य क्या है? यदि जिसको आपने खड़ा किया था वह पल भर में ध्वस्त गया तो उसका क्या? यदि आपकी आशाएं धूल में बदल गयीं तो क्या हुआ?"

मनुष्य क्या है?

मनुष्य वास्तव में क्या है? इनका उत्तर आगे के पदों में मिलता है। अनिश्चितताएँ जिनको हम अपने अंदर और बाहर महसूस करते हैं प्रभु उसमें निश्चितता प्रदान करते हैं। वे हमें याद करते हैं।वे हमारी ओर आते हैं क्योंकि वे हमारी चिंता करते हैं। ऐसे समय में जब चीजें शीघ्र भूला दिये जाते हैं, ईश्वर हमें विस्मरण में नहीं छोड़ते। उनकी नजरों में कोई भी तुच्छ नहीं है। सभी का एक असीम मूल्य है। जब धरती हिल जाती है तब हम आकाश के नीचे नगण्य और शक्तिहीन हो जाते हैं किन्तु ईश्वर के लिए हम सब कुछ से बढ़कर हैं।  

स्मृति

संत पापा ने कहा कि स्मृति जीवन का एक प्रमुख शब्द है। हम प्रतिदिन यह याद रखने की कृपा के लिए प्रार्थना करें कि हम प्रभु द्वारा नहीं भुलाए जाते हैं। हम उनके प्रिय संतान हैं, अनुठे एवं अपरिहार्य हैं। स्मृति हमें शक्ति प्रदान करती है कि हम जीवन की असफलताओं के सामने हार न मानें। उदास होने के प्रलोभन के सामने हम याद करें कि हम श्रेष्ठ हैं। बुरी घटनाओं की याद तब भी आती है जब हम उनकी याद करना नहीं चाहते किन्तु वे केवल उदासी एवं विषाद छोड़ जाते हैं। दुःखद यादों से मुक्त हो पाना सचमुच कठिन है। यह उस कहावत के समान है कि इस्राएल के हृदय से मिस्र को निकालने की अपेक्षा ईश्वर के लिए इस्राएलियों को मिस्र से निकलना अधिक आसान था।  

संत पापा ने कहा, "हमें पुरानी यादों से हृदय को मुक्त करना, विशेषकर, नकारात्मक यादों से जो हमें पछतावे की भावना का गुलाम बनाकर रखता है, हमें विकलांग बना देता है जिसके कारण हम अपने अंदर के भार को ढोने में समर्थ हो जाते हैं। आज येसु कह रहे हैं कि क्या तुम अपना बोझ उठाने में असमर्थ हो? संत पापा ने कहा कि वे हमारे बोझ दूर नहीं करते जैसा कि हम शीघ्र एवं आसान समाधान की आशा करते हैं बल्कि वे हमें पवित्र आत्मा प्रदान करते हैं। हमें पवित्र आत्मा की आवश्यकता है क्योंकि वह हमें सांत्वना देता है। जीवन के बोझ में वह हमें अकेला नहीं छोड़ता। वह हमारी गुलाम यादों को मुक्त यादों में परिणत करता है। अतीत के घावों को मुक्ति की यादों में बदल देता है। उसने येसु के लिए जो किया है वही हमारे लिए भी करता है। येसु के घाव जो बुराई से ढंके थे, पवित्र आत्मा की शक्ति से करूणा के स्रोत बन गये। वे प्रकाश युक्त घाव बन गये, जिनमें ईश्वर का प्रेम प्रकट हुआ, एक ऐसा प्रेम जो पुनर्जीवित है। संत पापा ने कहा कि यदि हम पवित्र आत्मा को निमंत्रण देंगे तो वे हमारे साथ भी यही करेंगे। वे आशा के तेल से दुःखद यादों का विलेपन करेंगे क्योंकि वह आशा के पुनःनिर्माता हैं।  

आशा

यह किस प्रकार की आशा है? यह समाप्त हो जाने वाली आशा नहीं है। दुनियावी आशाएँ क्षणिक होती हैं और उनकी समाप्ति की तिथि निश्चित होती है। वे दुनिया की वस्तुओं से बनी होती हैं जिसके कारण कभी न कभी बिगड़ जायेंगी। पवित्र आत्मा द्वारा प्रदान की जाने वाली आशा स्थायी है। यह कभी समाप्त नहीं होती क्योंकि यह ईश्वर के प्रति निष्ठा पर आधारित है।

पवित्र आत्मा की आशा हृदय की गहराई में, ईश्वर से प्रेम किये जाने की निश्चितता के द्वारा उत्पन्न होती है। यह अकेला नहीं होने के साहस को बूंद-बूंद कर बढ़ाती है। यह आशा ही है जो बाहर चाहे कुछ भी हो हमारे अंदर आनन्द और शांति लाती है। इसकी एक मजबूत जड़ है जिसको जीवन की कोई भी आँधी उखाड़ नहीं सकती। संत पौलुस कहते हैं कि यह आशा कभी व्यर्थ नहीं होती (रोम. 5.5) आशा कभी निराश नहीं करती बल्कि वह हर प्रकार की परीक्षाओं पर विजय पाने की शक्ति प्रदान करती है।

जब हम घायल अथवा परेशान होते हैं हम अपने लिए उदासी एवं भय का घोंसला बनाते हैं। पवित्र आत्मा हमें हमारे घोंसले से बाहर निकालते, हमें उड़ने देते तथा उस ओर आगे बढ़ने के लिए मुक्त करते हैं जिधर हमारा अनोखा लक्ष्य और जिसके लिए हम जन्म लिए हैं। आत्मा हमें जीवित आशा से भर देता हैं। संत पापा ने प्रार्थना करने का निमंत्रण देते हुए कहा, "आइये, हम उनका आह्वान करें। हे सांत्वनादाता, आइये हमें आलोकित कीजिए, हमें इस दुःखद घटना का अर्थ समझाइये, हमें वह आशा प्रदान कीजिए जो कभी व्यर्थ नहीं होती।"

सामीप्य

संत पापा ने सामीप्य शब्द पर प्रकाश डालते हुए कहा, "आज हम पवित्र तृत्वमय ईश्वर का पर्व मना रहे हैं। पवित्र तृत्वमय ईश्वर कोई पहेली नहीं है किन्तु ईश्वर के सामीप्य का एक विशेष रहस्य है। पवित्र तृत्वमय ईश्वर हमें बतलाते हैं कि ईश्वर स्वर्ग में हमसे दूर और तटस्थ नहीं हैं। वे हमारे पिता हैं जिन्होंने हमें अपना पुत्र प्रदान किया जो हमारे समान मनुष्य बनें और हमारे अति करीब रहे और जीवन की समस्याओं का सामना कर पाने के लिए हमें अपनी आत्मा प्रदान की। वह आत्मा जो हमें सांत्वना प्रदान करता एवं ईश्वर की कोमलता हमें प्रदान करता है। ईश्वर के साथ जीवन के बोझ हमारे कंधों पर नहीं होते, पवित्र आत्मा द्वारा हमें उस बोझ को उठाने की शक्ति मिलती है। जब हम क्रूस का चिन्ह बनाते हुए अपने कंधों का स्पर्श करते हैं हमें शक्ति प्राप्त होती है। हमें साहस मिलता है कि हम उस बोझ को उठा सकें। वास्तव में वे पुनरूत्थान एवं पुनःनिर्माण के विशेषज्ञ हैं। निर्माण करने की अपेक्षा, पुनःनिर्माण करने, फिर से शुरू करने, मेल-मिलाप करने एवं सहमत होने में अधिक शक्ति की आवश्यकता होती है। यही शक्ति ईश्वर हमें प्रदान करते हैं। यही कारण है कि जो लोग ईश्वर के करीब आते हैं वे कभी गिरते बल्कि आगे बढ़ते जाते और पुनः निर्माण करते हैं। वे भी दुःख का अनुभव करते हैं किन्तु फिर से शुरू कर सकते हैं पुनः कोशिश एवं निर्माण करते हैं।

प्रार्थना

संत पापा ने कमेरिनो के विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा कि वे उनके करीब रहने आये हैं, उनके साथ प्रार्थना करने के लिए। उन्होंने कहा, "ईश्वर उनकी याद करते हैं क्योंकि वे उन लोगों को कभी नहीं भूलते जो परेशानी में होते हैं। आशा के ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ ताकि जो पृथ्वी पर स्थायी नहीं है वह हमारे हृदय को झकझोर न सके। मैं प्रार्थना करता हूँ कि सामीप्य का ठोस चिन्ह प्रकट किया जाए। करीब तीन साल गुजर चुके हैं और खतरा यह है कि इससे ध्यान न हट जाए। प्रतिज्ञाएँ बेकार न हो जाएँ। पीड़ितों को भुलाये बिना प्रभु हमें याद करने, मरम्मत करने, पुनःनिर्माण करने एवं इसका समाधान एक साथ करने हेतु प्रेरित करें।

ईश्वर जो हमारी याद करते हैं आशा के तेल से हमारे घायल यादों को चंगा करते हैं। ईश्वर जो हमारे करीब हैं और हमें अंदर से मजबूत करते हैं वे हमें अच्छाइयों के निर्माता और हृदयों के सांत्वनादाता बनायें। दूसरे का इंतजार किये बिना हर कोई अच्छा काम करे। हर कोई यह कह सके, मैं इसकी शुरूआत करूँगा। अपनी समस्या के समाधान का इंतजार किये बिना हर व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को सांत्वना दे सके। अपना क्रूस उठाते हुए दूसरों के प्रति सहानुभूति रख सके। मनुष्य जो आपकी योजना में सबसे बड़ा है जिसकी आप हमेशा याद करते हैं। प्रभु इन परिस्थितियों को समझना आसान नहीं है। लोग हमें भूल रहे हैं वे इस त्रासदी को भूल चुके हैं किन्तु आप नहीं भूलते। प्रभु हम यह याद कर सकें कि हम आशा और सामीप्य की दुनिया में जी रहे हैं क्योंकि हम आपके बच्चे हैं "जो हर प्रकार की सान्त्वना के ईश्वर हैं।" (2 कोर. 1: 3).

17 June 2019, 15:24