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गरीबों के संग भोजन करते संत पापा गरीबों के संग भोजन करते संत पापा   (ANSA)

गरीबों की आशा व्यर्थ नहीं है

संत पापा फ्रांसिस ने विश्व गरीब दिवस के अवसर पर अपने संदेश में कहा कि गरीबों की आशा व्यर्थ नहीं जाती है।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, गुरूवार 13 जून 2019 (रेई) संत पापा फ्रांसिस ने 33वें विश्व गरीब दिवस के अवसर पर अपना संदेश प्रेषित करते हुए कहा कि गरीबों की आशा कभी व्यर्थ नहीं होगी।

संत पापा ने स्तोत्र 9 के पद 19 को अपने संदेश का सार बनाया “गरीबों की आशा व्यर्थ नहीं जायेगी।”  यह वाक्य उनके हृदय के गहरे विश्वास को व्यक्त करता है। इस वाक्य के द्वारा स्तोत्रकार गरीबों की स्थिति और उन्हें प्रताड़ित करने वालों के घमंड को प्रस्तुत करते हैं। ईश्वर कैसे यह अन्याय सहन कर सकते हैंॽ वे कैसे गरीबों को इतना अपमानित होता देख उनकी सहायता नहीं करते हैंॽ वे अत्यचारियों को क्यों फलने-फूलने देते विशेष कर गरीबों के परिपेक्ष मेंॽ

स्तोत्र का संदर्भ

स्तोत्रकार ने इस स्तोत्र को उस समय लिखा जब अर्थव्यवस्था विकासित हो रहती थी। वे सामाजिक परिस्थिति का आकंलन करते औऱ एक वास्तविक स्थिति को चित्रित करते हैं। धनी लोगों अपने घमंड में गरीबों की उन सारी चीजों का भी हनन कर लेते हैं जो थोड़ा उनके पास है और इस भांति वे उन्हें अपना दास बना लेते हैं। प्रकाशना ग्रंथ की पुस्तिका हमें इस बात की याद दिलाते हुए कहती है, “मैं धनी हूँ, मैं समृद्धि हो गया, मुझे किसी बात की कमी नहीं और तुम यह नहीं समझते कि तुम अभागे हो, दयनीय हो, दरिद्र, अंधे और नंगे हो। (प्रका.3.9) ये वाक्य अतीत नहीं वरन वर्तमान के हैं जहां हम ईश्वर के न्याय को पाते हैं।

दुनिया की स्थिति

आज हमें इस बात को स्वीकार करने की जरुरत है कि वर्तमान समय में बहुत सारी चीजें हैं जो हमें हजारों लाखों लोगों, महिलाओं, बच्चों औऱ युवाओँ को गुलाम बनाती हैं। हम रोज दिन परिवारों को अपनी जीविका के लिए अपनी जमीर को छोड़ने हेतु बाध्य होता देखते, अनाथों को हिंसा का शिकार होना पड़ता, युवा अपने को व्यावसायिक रुप में स्थापित करने की चाह रखते लेकिन अर्थव्यवस्था की नीतियों में दूरदर्शिता की कमी के कारण वे हताश हो जाते, शोषण और हिंसा के शिकार, देह व्यपार का बाजार अपने में फूलता-फलता है। हम प्रवासियों के प्रति अन्याय और आश्रयविहीन लोग जो शहर की गलियों में भटकते रहते हैं कैसे नजरअंदाज कर सकते हैं।

गरीब कूड़ादान बन जाते

संत पापा ने कहा कि कितनी बार हम गरीबों को कूड़े दानों में अपनी जीविका की खोज करते पाते हैं। वे स्वयं अपने जीवन में कूड़ादान बन जाते हैं। वे अपनी गरीबों के कारण दूसरों के द्वारा एक तरह से भय के रुप में देखे जाते हैं। वे एक काम, निवास और प्रेम की खोज में एक शहर से दूसरे शहर में भटकते रहते हैं। उनकी गरीबी का सुरंग कभी अंत नहीं होता है। वे कार्य करते लेकिन उन्हें सही वेतन नहीं मिलता। वे असुरक्षित परिस्थिति में बिना मुआवज़ा और लाभ के कार्य करते हैं।

स्तोत्रकार गरीबों के प्रति धनियों के व्यावहार की चर्चा करते हुए कहते हैं, “वह झाड़ी में सिंह की तरह छिप कर घात में बैठा रहता है वह दीन-हीन की घात मैं बैठा है। वह उस पकड़कर अपने जाल में फंसाता है। (स्तो.10.9) हमारी आंखों के समाने कितने ही गरीबों पर अत्याचार होता है। उनकी आवाज समाज के द्वारा नहीं सुनी जाती है। वे हमारे घरों और पड़ोस में अपरिचित और परित्यक्त रुप में रहते हैं।

गरीब ईश्वर पर भरोसा रखते

स्तोत्र गरीबों के दुःख और अन्याय की चर्चा करता है। यह गरीबों की मार्मिक परिभाषा हमारे समाने प्रस्तुत करता है “वे अपना भरोसा ईश्वर पर रखते हैं” इस निश्चितता के साथ कि उनका परित्याग कभी नहीं किया जायेगा। धर्मग्रंथ में गरीब वे हैं जो ईश्वर पर भरोसा रखते हैं। इसका कारण यह है कि वे जानते हैं कि उनका परिचय ईश्वर से है। यहां जानना हमारे लिए एक व्यक्तिगत संबंध को दिखलाता है जहाँ स्नेह और प्रेम है।

यह हमारे लिए ईश्वर की महानता को व्यक्त करता है खास कर गरीबों के साथ उनके संबंध को। ईश्वर की शक्तिमत्ता आशा से परे है जहाँ वे सभों की चिंता व्यक्तिगत रुप में करते हैं। यह विश्वास कि ईश्वर हमारा परित्याग कभी नहीं करेंगे, गरीबों में आशा उत्पन्न करता है। वे अपने जीवन में ईश्वर की उपस्थिति का एहसास करते हैं जो उनके लिए अपार शक्ति और साहस का कारण बनता है।

गरीबों के रक्षक ईश्वर

धर्मग्रंथ गरीबों के प्रति उनके कार्यों की चर्चा करता है। वे उनकी कराह को सुनते और उनकी सहायता हेतु आते हैं। ईश्वर गरीबों की “रक्षा” करते और उन्हें “बचाते” हैं। वास्तव में गरीब ईश्वर को अपने प्रति कभी उदासीन नहीं पाते हैं विशेष कर जब वे अपनी प्रार्थना में उन्हें पुकारते हैं। (स्तो.40.18,70.6) ईश्वर गरीबों के आश्रय हैं वे उनकी सहायता में कभी असफल नहीं होते हैं। (स्तो.10.14)

हम अपने जीवन में दीवारों का निर्माण करते हुए अपने धन को व्यर्थ में सुरक्षित रखने का प्रयास करते हैं। यह हमें सुरक्षित नहीं रखेगा। “ईश्वर का दिन”, जैसे की नबियों के द्वारा हमारे लिए चर्चा किया गया है (अमोस. 5.18, इसा.2-5, योए. 1-3) हमारे बीच उत्पन्न अंतर की खाई को दूर करेगा। लाखों दुःखियों के दुःख-दर्द लम्बें समय तक व्याप्त नहीं रहेंगे। उनका रूदन सारी पृथ्वी को अपने में ढ़क लेगा। पुरोहित प्रीमो मज्जोलारी द्वारा गरीबों के लिए कहें गये शब्द “गरीब अन्याय के विरूद्ध हैं, वे बारूद के ढेर हैं जहाँ चिनगारी लगते ही विश्व में विस्फोट हो जायेगा।”

येसु का गरीबों संग संबंध

येसु ख्रीस्त अपने को गरीबों के साथ संयुक्त करने से नहीं डरते हैं, “जो कुछ तुमने मेरे इन छोटे भाइयों के लिए किया वह मेरे लिए किया।” (मत्ती.25.40) यदि हम अपने को गरीबों के साथ संयुक्त नहीं करते तो हम सुसमाचार को झुठलाते हैं और ईश्वरीय प्रकटीकरण को व्यर्थ कर देते हैं। येसु ने अपने पिता की उदरता, करुणा, शर्तहीन प्रेम को हमारे लिए व्यक्त किया है। वे विशेष रुप से उनके लिए जो अपने में हताश औऱ मायूस रहते भविष्य में आशावान बने रहने की कृपा प्रदान करते हैं।

हम येसु के धन्य वचनों को कैसे भूल सकते हैं जो स्वर्गराज्य को हमारे लिए व्यक्त करते हैं, “धन्य हैं वे जो गरीब हैं। (लूका.6.20) स्वर्ग का राज्य गरीबों के लिए है क्योंकि वे इसे अपने में ग्रहण करने हेतु तैयार हैं। इसका अर्थ हमारे लिए यही है कि येसु अपनी शिक्षा के केन्द्र-बिन्दु में गरीबों को रखते हैं। वे अपने राज्य की घोषणा करते हुए गरीबों के लिए आशा की किरण बनते और हमें अपने कामों को उत्तरदायित्व के रुप में आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी प्रदान करते हैं।  

मुक्ति सभों के लिए है

गरीबों का आलिंगन करने के द्वारा हम एक कलीसिया के रुप में सभों को गले लगाते हैं क्योंकि मुक्ति ईश्वर के द्वारा हरएक जन के लिए है। इसके द्वारा हम उनके पीड़ित येसु के निकट अपने को लाते हैं। हम व्यक्तिगत रुप से दुःखित और गरीबों का स्पर्श करने हेतु बुलाये जाते हैं जो हमारे द्वार सच्चे सुसमाचार की घोषणा है। गरीबों के प्रति हमारा समर्पण ख्रीस्तीय विश्वास और अतीत में इसकी सत्यता को प्रकट करता है।

वर्तमान में जेयान वानियेर की मृत्यु हमें शोकित करती है जो गरीबों के प्रेरित थे। गरीबों के लिए समर्पित उनका कार्य गरीबों के संग हमें अपने को संयुक्त करने हेतु एक नया मार्ग दिखता है। ईश्वर ने जेयान वानियेर को वह कृपा दी जिसके कारण उन्होंने अपने सम्पूर्ण जीवन को अपने भाई-बहनों की सेवा हेतु समर्पित कर दिया, जो अति अयोग्य स्थिति में थे। वे हमारे लिए “पड़ोस में” एक संत के समान थे। उन्होंने अपने चारो ओर युवाओं, पुरूषों और महिलाओं को जमा किया जिन्होंने अतिसंवेदनशील लोगों के लिए अपने को दिया जिससे वे दुःखियों और गरीबों के चेहरों पर खुशी ला सकें। उनके जीवन के द्वारा असंख्य लोग प्रभावित हुए और अपने को कम नसीब लोगों की सेवा हेतु समर्पित किया। उनके द्वारा लोगों ने ईश्वर के दृश्मान प्रेम का एहसास किया जिन्हें आज भी हम अपने हाथों से स्पर्श कर सकते हैं।

कलीसिया की प्रेरिताई का केन्द्र गरीब

समाज के द्वारा परित्यक्त लोगों के लिए कार्य करना कलीसिया की एक बड़ी प्रेरिताई है जिससे हम उनके जीवन में सच्ची आशा का संचार कर सकें। अपने करूणा के कार्यों द्वारा हम ख्रीस्त के सुसमाचार को ठोस रुप में घोषित करते हैं।

विश्व गरीब दिवस में ख्रीस्तियों के रुप में हमारी सहभागिता हमें सहायता के कार्यों से परे ले चलती है। प्रेम में हमारी सेवा सच्चे कार्यों को व्यक्त करता है जिसके द्वारा हम गरीबों और जरुरतमंदों के कल्याण हेतु अपने को देते हैं। भौतिकतावाद की इस परिस्थिति में ख्रीस्तीय आशा का साक्ष्य देना अपने में सहज नहीं है इसके लिए हमें अपनी मानसिकता को बदने की जरुरत है जो हमें ईश्वर के राज्य का संदेशवाहक बनाता है।  

हम अपने जीवन के द्वारा आशा का संचार गरीबों में थोड़े समय के अपने जोश में नहीं करते बल्कि यह हमें उनके साथ निरंतर बने रहने की मांग करता है। गरीबों में आशा का संचार हमारे निस्वार्थ प्रेमपूर्ण कार्य द्वारा होता है जिसके लिए हम कोई उपहार की चाह नहीं रखते हैं।

आध्यात्मिक आवश्यकता एक बड़ी कमी

संत पापा ने कहा कि आप गरीबों की सबसे जरुरी चीजों, उनकी पृष्टभूमि और उनके मानोभावों का ख्याल रखें क्योंकि ऐसा करना हमारे द्वारा उनके साथ सच्ची भ्रातृत्वपूर्ण वार्ता का प्रारुप होगा। हम अपने में व्याप्त विभाजनों को अलग रखें जो आदर्श और राजनीति कारणों से उत्प्रेरित हैं। हम उन बातों पर ध्यान दें जो अति महत्वपूर्ण हैं, जो शब्दों में नहीं बल्कि प्रेमपूर्ण कार्यो और हमारे हाथों को आगे बढ़ाने में पूरी होती है। आप गरीबों की आध्यात्मिक जरुरत को पूरा करने हेतु न भूलें जो उनके जीवन की सबसे बड़ी कमी है।

गरीब अपने जीवन में ईश्वर और उनके प्रेम की चाह रखते हैं जिसका साक्ष्य संतों में अपने जीवन में हमें दिया है। ईश्वर कितने ही असंख्य माध्यमों से लोगों के हृदय को स्पर्श करना चाहते हैं। भोजन से अधिक गरीब हमारे जीवन में सहारा की मांग करते हैं, हम उन्हें उठा सकें, अपना हृदय उन्हें दें सकें, प्रेम दिखा सकें, अपनी उपस्थिति दे सकें जो उन्हें अकेलेपन से ऊपर उठाती है। हम उन्हें प्रेम कर सकें।

गरीब आकड़े नहीं 

आशा को स्थापित करने हेतु बहुत कम समय की जरुरत है यदि हम रुक कर उन्हें सुनें और उनके साथ मुस्कुरायें। गरीब हमारे लिए सांख्यिकी नहीं हैं कि हमने कितनों के लिए कार्य किया है जिस पर हम गर्व करते हैं। गरीब वे हैं जिनसे हमें मुलाकात करने की जरुरत है। उन्हें हमारी मित्रतापूर्ण बातों की जरुरत है। वे हमारे लिए मुक्ति का कारण बनते क्योंकि हम उनमें येसु ख्रीस्त के चेहरे को देखते हैं।

यह हमारे लिए तर्कविहीन लगता है कि गरीब और जरुरतमंद अपने में हमें बचाने की शक्ति वहन करते हैं। यह प्रेरितों की शिक्षा है जो हमें कहते हैं,“इस बात पर विचार कीजिए कि बुलाये जाते समय दुनिया की दृष्टि में आप लोगों में बहुत ही कम लोग ज्ञानी, शक्तिशाली अथवा कुलीन थे। ज्ञानियों को लज्जित करने के लिए ईश्वर ने उन लोगों को चुना है, जो दुनिया की दृष्टि में मूर्ख हैं। शक्तिशालियों को लज्जित करने के लिए उसने उन लोगों को चुना है, जो दुनिया की दृष्टि में दुर्बल हैं। गण्य-मान्य लोगों का घमण्ड चूर करने के लिए उसने उन लोगों को चुना है, जो दुनिया की दृष्टि में तुच्छ और नगण्य हैं, जिससे कोई भी मनुष्य ईश्वर के सामने गर्व न करे।” (1 कुरि. 1.26) मानवीय नजरों से हम ईश्वर की मुक्ति को देखने में असक्षम होते हैं लेकिन विश्वास की नजरों से यह हमारे जीवन में क्रियाशील है जिसका अनुभव हम व्यक्तिगत तौर पर करते हैं। हमारे इस जीवन में ईश्वर किसी को नहीं छोड़ते वरन वे हमारे द्वारा गरीबों को प्रेम करने की प्रेरणा प्रदान करते हैं।

ईश्वर हमें नहीं छोड़ते हैं

ईश्वर अपने खोजने वालों को कभी नहीं छोड़ते हैं उनके कान अपने पुकरने वालों के लिए सतर्क हैं। गरीबों की आशा उन्हें सभी प्रकार की कठिन परिस्थितियों में बचाती है वे यह जानते हैं कि ईश्वर उन्हें विशेष रुप से प्रेम करते हैं जो उनके जीवन की किसी भी कठिन परिस्थिति या दुःख से मजबूत है। गरीबी उन्हें ईश्वर से मिले सम्मान से विमुख नहीं करती है। ईश्वर उनका हाथ पकड़कर ले चलते और उन्हें शक्ति और साहस प्रदान करते हैं।

येसु के शिष्य आशा के बीज को बोते हुए सुसमाचार के सच्चे प्रचारक बनते हैं। संत पापा ने कहा कि विश्व गरीब दिवस सभी ख्रीस्तीय समुदायों और गरीबों के लिए आशा में बने रहने की प्रेरणा प्रदान करने वाले के लिए प्रेरणा का स्रोत बने जिससे कोई भी अपने में अछूत महसूस न करे। आप नबी मलाकी के वचनों को निधि के समान अपने में संजोये रखें, “तुम जो मुझ पर श्रद्धा रखते हो, धर्म के सूर्य का उदय होगा और उसकी किरणें तुम्हें स्वास्थ्य प्रदान करेगी।” (मलआकी 3.20)

13 June 2019, 17:10