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प्रेरितिक राजदूतों से मुलाकात करते संत पापा प्रेरितिक राजदूतों से मुलाकात करते संत पापा  (ANSA)

परमधर्मपीठ के प्रतिनिधियों को संत पापा का संदेश

संत पापा फ्राँसिस ने 13 जून को, वाटिकन में हो रहे तीन दिवसीय सभा में भाग लेने वाले वाटिकन के प्रेरितिक राजदूतों एवं स्थायी पर्यावेक्षकों से मुलाकात की तथा उन्हें सम्बोधत किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, 13 जून 2019 (रेई)˸ अपने सम्बोधन में संत पापा ने सभी प्रतिनिधियों को उनकी सेवाओं के लिए धन्यवाद देते हुए उनके कार्यों एवं विशेषताओं पर प्रकाश डाला।

प्रेरितिक राजदूत एक ईश्वर का व्यक्ति

संत पापा ने कहा कि ईश्वर के व्यक्ति होने का अर्थ है हर चीज के लिए एवं सब कुछ में ईश्वर का अनुसरण करना। आनन्द से उनकी आज्ञाओं का पालन करना। ईश्वर के लिए जीना न कि दुनियादारी के लिए। एफेसियों को लिखे संत पौलुस के पत्र का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि ईश्वर का व्यक्ति, उनके सामने पवित्र एवं निर्दोष रहने का गंभीरतापूर्वक प्रयास करता है। वह अपने प्रभु के साथ विनम्रता से चलना जानता है और यह भी अच्छी तरह जानता है कि उसे किस प्रकार उन्हीं पर पूर्ण भरोसा रखना है। वह असफलता एवं समाज से बहिष्कार को भी खुले हृदय से स्वीकार करता है और किसी पर न्याय किये बिना वह लोगों की समस्याओं को सुनता है। ईश्वर का व्यक्ति वह है जो न्याय, प्रेम, क्षमादान, पवित्रता और दया जैसे सदगुणों का अभ्यास करता है।

एक प्रेरितिक राजदूत जो यह भूल जाता है कि वह ईश्वर का व्यक्ति है, वह खुद की और दूसरों की हानि करता है। वह रास्ते से भटक जाता एवं कलीसिया को भी चोट पहुँचाता है जिसके लिए उसने अपना जीवन अर्पित किया है।

प्रेरितिक राजदूत एक कलीसिया का व्यक्ति

प्रेरितिक राजदूत होने के कारण वह खुद का नहीं, बल्कि कलीसिया और खासकर, संत पेत्रुस के उत्तराधिकारी का प्रतिनिधित्व करता है। बाईबिल के बेईमान करिन्दे का उदाहरण देते हुए संत पापा ने कहा कि वह प्रेरितिक राजदूत, कलीसिया का व्यक्ति नहीं रह जाता, जब वह अपने सहकर्मियों एवं प्रेरितिक राजदूत आवास के लोगों के साथ सही वर्ताव नहीं करता। वह अपने बुरे व्यवहार के कारण पिता और चरवाहा नहीं रह जाता है।

संत पापा ने स्मरण दिलाया कि कलीसिया का व्यक्ति होने का अर्थ है बुराई की शक्तियों के सामने कलीसिया की रक्षा साहस के साथ करना। उन्हें धर्माध्यक्षों, पुरोहितों, धर्मसमाजियों एवं विश्वासियों के साथ मित्र की तरह व्यवहार करना तथा हमेशा उनकी मुक्ति की चिंता करना है।

प्रेरितिक उत्साह का व्यक्ति

प्रेरितिक राजदूत सुसमाचार की घोषणा करने वाला व्यक्ति है तथा सुसमाचार के प्रेरित होने के नाते उसे विश्व को पुनर्जीवित ख्रीस्त के प्रकाश से प्रकाशित करना है। ख्रीस्त को दुनिया के अंतिम छोर तक लाना है। वह एक यात्रा का व्यक्ति है जो लोगों के हृदयों में विश्वास का अच्छा बीज बोता है। संत पौलुस के शब्दों की याद दिलाते हुए संत पापा ने कहा कि उसे सुसमाचार के प्रचार में ही गर्व करना और उसे अपना परम कर्तव्य समझना चाहिए। प्रेरितिक उत्साह वह ऊर्जा है जो हमें ईमानदार बनाये रखता एवं माया-जाल के कैंसर से बचाये रखता है।

वह एक मेल-मिलाप का व्यक्ति है

यह हर प्रेरितिक राजदूत का एक महत्वपूर्ण कार्य है कि वह मध्यस्थता, एकता, संवाद और सामंजस्य का व्यक्ति बने। उसे हमेशा निष्पक्ष बने रहने की कोशिश करनी चाहिए ताकि सभी पक्ष, उसमें नकारात्मक रूप से शामिल हुए बिना एक सही मध्यस्थ पा सकें जो ईमानदारी से केवल न्याय और शांति की रक्षा करना चाहता है।

पोप का व्यक्ति

संत पापा ने कहा कि प्रेरितिक राजदूत होने के नाते एक नूनसियो संत पेत्रुस के उतराधिकारी का प्रतिनिधित्व करता है तथा विश्वासियों के बीच संत पापा की उपस्थिति का प्रतीक है। यह सच है कि हर व्यक्ति की अपनी पसंद और नपसंद होती है किन्तु एक सच्चा प्रेरितिक राजदूत पाखंडी नहीं होता, क्योंकि वह ख्रीस्त के प्रतिनिधि एवं वहाँ के लोगों के बीच संबंध जोड़ने की कोशिश करता है।

संत पापा ने कहा कि उन्हें समुदायों का दौरा करना चाहिए जहाँ संत पापा खुद नहीं पहुँच सकते, उन्हें ख्रीस्त और कलीसिया के सामीप्य का आश्वासन देना चाहिए।  

प्रयासों का व्यक्ति

संत पापा ने प्रेरितिक राजदूतों से कहा कि उन्हें आध्यात्मिक, मानसिक और मानवीय अकड़ता में पड़ने से बचने के लिए अपने व्यवहार को अनुकूल बनाने की अपनी क्षमता को विकसित करना है। एक पहल का व्यक्ति सकारात्मक रूप से जिज्ञासु होता है, वह गतिशीलता और प्रयासों से भरा होता एवं रचनात्मक और साहसी होता है जो खुद को अप्रत्याशित परिस्थितियों से दूर नहीं होने देता, लेकिन शांति, अंतर्ज्ञान और कल्पना के साथ, उन्हें मोड़ने और उन्हें सकारात्मक रूप से प्रबंधित करना जानता है।

आज्ञापालन का व्यक्ति

आज्ञापालन को स्वतंत्रता से अलग नहीं किया जा सकता क्योंकि स्वतंत्रत के द्वारा ही हम सच्चा आज्ञा पालन कर सकते हैं और सुसमाचार के पालन द्वारा ही हम पूर्ण स्वतंत्रता को प्राप्त कर सकते हैं। सभी ख्रीस्तीय, नाजरेथ के येसु के समान आज्ञापालन के लिए बुलाये जाते हैं। नाजरेथ के येसु जो ईश्वर के प्रति खुले एवं आज्ञाकारी थे और जिन्होंने ईश्वर को पिता पुकारा।

प्रार्थना का व्यक्ति

संत पापा ने कहा कि ख्रीस्त के साथ घनिष्टता, वाटिकन के एक प्रतिनिधि के लिए दैनिक पोषण के समान है क्योंकि यह एक ऐसा भोजन है जो उनके साथ पहली मुलाकात की याद द्वारा आता है। अतः प्रार्थना एवं यूखरिस्त में ख्रीस्त के साथ संयुक्ति को कभी भी नजरांदाज नहीं करना चाहिए। संत पेत्रुस के शब्दों को याद करें जिन्होंने कहा था, "यह उचित नहीं है कि हम भोजन परोसने के लिए ईश्वर का वचन छोड़ दे।" (प्रे.च. 6˸1-6) अतः सभी धर्माध्यक्षों का प्रथम कर्तव्य है प्रार्थना एवं वचन की सेवा में अपने आप को समर्पित करना।

सक्रिय उदारता का व्यक्ति

संत पापा ने कहा कि यदि हम ख्रीस्त से मुलाकात करना चाहते हैं तब हमें गरीबों में ख्रीस्त के घायल शरीर को स्पर्श करने की जरूरत है।

विनम्रता का व्यक्ति

संत पापा ने अपने वक्तव्य के अंत में सभी प्रेरितिक राजदूतों को विनम्र बने रहने हेतु प्रेरित किया।

13 June 2019, 16:18