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रोमानिया के सात शहीद धर्माध्यक्षों की धन्य घोषणा रोमानिया के सात शहीद धर्माध्यक्षों की धन्य घोषणा 

रोमानिया की ग्रीक काथलिक कलीसिया, एक पुनर्जीवित समुदाय

रोमानिया की ग्रीक काथलिक कलीसिया एक पुनर्जीवित कलीसिया है। कम्युनिस्ट शासन के विघटन के बाद 1948 में रोमानिया की ग्रीक काथलिक कलीसिया चार दशकों तक एक अंधकार युग से होकर गुजरी। 7 शहीद धर्माध्यक्षों की धन्य घोषणा, पुनर्निर्माण के क्रम में इस छोटी कलीसिया के लिए मृत्यु पर जीवन के विजय का प्रतीक है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

रोमानिया, रविवार, 2 जून 2019 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस के कर कमलों से की गयी धन्य घोषणा, विश्वव्यापी कलीसिया के साथ इसकी पहचान का एक महत्वपूर्ण चिन्ह है।   

रोमानिया में ट्रानसिलवेनिया के एक छोटा शहर ब्लाज, ग्रीक काथलिक कलीसिया का केंद्र है जहाँ संत पापा ने अपनी प्रेरितिक यात्रा की चरम सीमा पर पहुँचते हुए वहाँ 7 शहीद धर्माध्यक्षों की धन्य घोषणा की। पवित्र पूजनविधि का अनुष्ठान अलबा जुलिया के महाधर्माध्यक्ष 88 वर्षीय कार्डिनल लुचियन मुरेसान ने किया।

7 शहीद धर्माध्यक्ष जिन्हें सीधे रूप से नहीं मारा गया था जिनकी मृत्यु 1950 से 1970 के बीच कैदखाने में हो गयी थी। वे मास्को के दबाव में साम्यवादी राज्यतंत्र द्वारा दमन के शिकार हुए थे, जिसको रोम से जुड़कर पश्चिम के साथ गहरा संबंध रखने के कारण, नष्ट करने का फैसला लिया गया था।

"एकीकरण कानून"

कम्युनिस्ट अधिकारियों द्वारा घोषित तथाकथित "एकीकरण कानून" ने उन्हें ऑर्थोडॉक्स कलीसिया में विलय होने के लिए मजबूर किया तथा रोम के साथ उनके हर प्रकार के संबंधों को तोड़ डाला, जिसको उनके पूर्वजों ने 1700 में छोड़ दिया था। अत्यधिक हस्तक्षेप के कारण कुछ विश्वासियों ने ऑर्थोडॉक्स कलीसिया को स्वीकार कर लिया, किन्तु धर्माध्यक्षों तथा बड़ी संख्या में पुरोहितों एवं धर्मसमाजियों ने"एकीकरण कानून" को अस्वीकार किया। फल यह हुआ कि उन्हें आजीवन कारावास की सजा मिली जहाँ भूख, प्यास और बीमारी के कारण वे मौत के शिकार हो गये।

सात शहीद धर्माध्यक्षों के नाम इस प्रकार हैं-

1.वासिल अफ्तेनी (1899-1950) – वे बुखरेस्ट भिखारियट के लिए ब्लाज के सहायक धर्माध्यक्ष थे। उनका धर्माध्यक्षीय अभिषेक 1940 में हुआ था तथा उन्होंने 1948 में एकीकरण के कानून को अस्वीकार किया जिसके लिए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उनसे मई 1949 से 10 महीनों तक हिंसक रूप से पूछताछ की गयी। मार्च 1950 को वे अपने कमरे में बेहोश होकर गिरे क्योंकि उन्हें आंशिक पक्षाघात हो गया था। उसके 45 दिनों बाद उनकी मृत्यु हो गयी।

2.भलेरियु त्राइयान फ्रेंतीयू (1875-1952) – वे लुगोज के धर्माध्यक्ष थे। वे 1912 में धर्माध्यक्ष बने थे जिन्हें 73 साल की उम्र में 1948 में गिरफ्तार किया गया था। वे गंभीर रूप से बीमार हुए एवं 1952 में जेल में ही मृत्यु के शिकार हो गये।

3.इयोवन सुकू (1907-1953) – वे ओरादेया के सहायक धर्माध्यक्ष थे। उनका पुरोहिताभिषेक 33 वर्ष की आयु में 1940 में हुआ था। वे 1948 में गिरफ्तार हुए तथा भूख के कारण 1953 में मौत के शिकार हो गये। वे गरीबों के कब्रस्थान में दफनाये गये और उनके कब्र की पहचान कभी नहीं हो पायी।

4.तित लिवियू (1904-1955) – ब्लाज़ के सहायक धर्माध्यक्ष थे। उन्हें भी एकीकरण कानून के उलंघन के कारण गिरफ्तार किया गया था, जहाँ उनकी मृत्यु जेल में हो गयी।  

5. इयोन बालान (1880-1959) - वे लुगोज के धर्माध्यक्ष थे। उनका धर्माध्यक्षीय अभिषेक 1936 में हुआ था। उन्हें 1948 में जेल भेजा गया जहाँ 1959 में उनका देहांत हो गया।

6. अलेक्सांड्रू रूसू (1884-1963)- वे मारामुरेस के धर्माध्यक्ष थे। उनका धर्माध्यक्षीय अभिषेक 1931 को हुआ था। उन्हें कुछ दिनों के लिए जेल में और कुछ दिनों के लिए ऑर्थोडॉक्स के एकांत मठवास में रखा गया था। उन्हें खतरनाक धर्माध्यक्ष कहकर मृत्यु दण्ड की सजा दी गयी थी और 1963 में घेरला जेल में उनकी मौत हो गयी।

7.कार्डिनल यूलियु होस्सु (1885-1970)- वे घेरला, क्लूज़ के धर्माध्यक्ष थे। उनका धर्माध्यक्षीय अभिषेक 1917 को हुआ था। उन्हें 1 दिसम्बर 1918 में अल्बा यूलिया की राष्ट्रीय सभा में, रोमानिया से ट्रानसिलवेनिया के एकीकरण की घोषणा पढ़ने का आदेश दिया गया था। 1948 में उन्हें गिरफ्तार किया गया, जहाँ उन्हें कुछ समय के लिए जेल में और कुछ समय के लिए ऑर्थोडॉक्स एकान्त मठवास में रखा गया। उनका निधन 1973 में हुआ।

ग्रीक काथलिक कलीसिया का पुनःउद्धार

इस अंधकार युग को पार करने के बाद ग्रीक काथलिकों ने अपनी स्वतंत्रता 1990 में पुनः प्राप्त की। रोमानिया में मृत्यु की योजना पर पास्का की आशा पुनः जाग उठी।

ग्रीक काथलिक रीति में ख्रीस्तयाग के दौरान इन्हीं सात शहीद धर्माध्यक्षों की धन्य घोषणा की धर्मविधि सम्पन्न हुई। पवित्र मिस्सा के दौरान संत पापा फ्राँसिस ने प्रवचन में व्यक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला तथा निमंत्रण दिया कि हम भी लोगों की जरूरतों के सामने अंधे बनकर न रहें।

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रोमानिया के सात शहीदों की धन्य घोषणा संत पापा फ्राँसिस ने की
02 June 2019, 16:18