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स्वर्ग की रानी प्रार्थना के उपरांत आशीष देते संत पापा स्वर्ग की रानी प्रार्थना के उपरांत आशीष देते संत पापा  (ANSA)

ईश्वर का प्रेम आशा की क्षितिज खोल देता है, संत पापा

आज का सुसमाचार पाठ हमें पिछली व्यारी के कमरे की ओर ले चलता है ताकि हम येसु के उन शब्दों को सुन सकें जिसको उन्होंने अपने दुःखभोग के पूर्व शिष्यों से विदाई लेते हुए कहा था।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार, 20 मई 2019 (रेई)˸  वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 19 मई को, संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ किया। जिसके पूर्व उन्होंने विश्वासों को सम्बोधित किया।

संत पापा ने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, "अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात। आज का सुसमाचार पाठ हमें पिछली व्यारी के कमरे की ओर ले चलता है ताकि हम येसु के उन शब्दों को सुन सकें जिसको उन्होंने अपने दुःखभोग के पूर्व शिष्यों से विदाई  लेते हुए कहा था। बारह शिष्यों के पैर धोने के बाद उन्होंने कहा, ''मैं तुम लोगों को एक नयी आज्ञा देता हूँ- तुम एक-दूसरे को प्यार करो। जिस प्रकार मैंने तुम लोगों को प्यार किया, उसी प्रकार तुम एक-दूसरे को प्यार करो।" (यो. 13,34)

यह आज्ञा किस अर्थ में नई है?

संत पापा ने कहा, "किस अर्थ में येसु इसे नयी आज्ञा कहते हैं?" क्योंकि हम जानते हैं कि यह पुराने व्यवस्थान में भी था, "तुम न तो बदला लो और न तो अपने भाइयों से मनमुटाव रखो। तुम अपने पड़ोसी को अपने समान प्यार करो। मैं प्रभु हूँ।" (लेवी.19˸18) येसु ने स्वयं उस व्यक्ति को जवाब देते हुए कहा था, जिसने येसु से पूछा था कि सबसे बड़ी आज्ञा क्या है। "यह सब से बड़ी और पहली आज्ञा है। दूसरी आज्ञा इसी के सदृश है- अपने पड़ोसी को अपने समान प्यार करो।" (मती. 22,38-39) तो फिर, इस आज्ञा में कौन सी नई बात आ गयी है जिसको येसु अपने शिष्यों को दे रहे हैं? इस दुनिया से विदा लेने के पूर्व वे इसे क्यों नई आज्ञा कह रहे हैं?

उन्होंने कहा कि पुराने व्यवस्थान का प्रेम इसलिए नया बन गया है क्योंकि इसमें एक वाक्य जुड़ गया है "जैसे मैंने तुम्हें प्रेम किया है वैसे तुम भी एक-दूसरे को प्यार करो।" यहाँ नवीनता येसु ख्रीस्त के प्रेम में है जिन्होंने हमारे लिए अपना जीवन अर्पित कर दिया। यह ईश्वर का प्रेम असीम एवं बेशर्त है जो क्रूस पर अपनी पराकाष्ठा को प्राप्त करता है। अपने आपको अत्यन्त छोटा बनाने एवं पिता द्वारा त्याग दिये जाने की इस घड़ी के द्वारा ईश्वर के पुत्र ने प्रेम की पूर्णता को प्रकट किया तथा उसे दुनिया को प्रदान किया। ख्रीस्त के इसी दुःखभोग एवं प्राण पीड़ा पर चिंतन करने के द्वारा शिष्य उनके शब्दों को समझ पायेंगे, "जैसे मैंने तुन्हें प्यार किया वैसे तुम भी एक-दूसरे को प्यार करो।"

येसु के प्रेम की कोई सीमा नहीं है

संत पापा ने कहा, येसु हमें पहले प्यार करते हैं। वे हमारी धोखाधड़ी, हमारी सीमाओं और मानवीय कमजोरियाँ के बावजूद हमें प्यार करते हैं। उन्होंने ही हमें अपने प्रेम के योग्य बनाया जिनके प्रेम की कोई सीमा नहीं है। नई आज्ञा देते हुए वे हमसे कहते हैं कि हम आपस में एक-दूसरे को प्यार करें। अपने प्रेम से नहीं बल्कि उनके प्रेम से जिसको पवित्र आत्मा हमारे हृदयों में डाल देते हैं जब हम विश्वास पूर्वक उनसे याचना करते हैं। केवल इसी के द्वारा हम एक-दूसरे को उनके समान प्रेम कर सकेंगे। ईश्वर हमसे कई गुणा अधिक प्यार करते हैं इस तरह हम प्रेम के बीज को सभी ओर फैला सकते हैं जो लोगों के बीच संबंध को नवीन बनाता एवं आशा की क्षितिज को खोल देता है। यह प्रेम हमें नवीन व्यक्ति बनाता एवं प्रभु में एक-दूसरे के भाई-बहन तथा ईश्वर की नई प्रजा बनाता है। यही कलीसिया हैं जहाँ ख्रीस्त से एवं एक दूसरे से प्रेम करने के लिए बुलाये जाते हैं।

ख्रीस्त का वह प्रेम जो क्रूस पर प्रकट हुआ, हमारा आह्वान करता है कि हम अपने पत्थर के समान कठोर हृदय को मांस के हृदय में बदलें। यह परिवर्तन येसु के प्रेम में ही सम्भव जिसके द्वारा हम भी उनके समान प्रेम कर सकते हैं और यही प्रेम हमें अपने शत्रुओं से भी प्रेम करने एवं हमारी बुराई करने वालों को क्षमा देने की शक्ति प्रदान करते हैं।

प्रेम भाईचारापूर्ण समाज के निर्माण में सहायक

संत पापा ने सभी विश्वासियों से सवाल किया तथा उसका उत्तर अपने हृदय में देने को कहा, "क्या मैं अपने शत्रुओं से प्रेम कर सकता हूँ? मैं कह सकता हूँ कि कई लोग हैं किन्तु मैं नहीं जानता कि वे मेरे शत्रु हैं जो मुझसे सहमत नहीं होते, जो दूसरों का पक्ष लेते हैं या जो मुझे दुःख देते हैं, क्या मैं उन लोगों से सचमुच प्रेम कर सकता हूँ? व्यक्ति जिसने मुझे दुःख पहुँचाया अथवा चोट दी है क्या मैं उन्हें क्षमा दे सकता हूँ? येसु का प्रेम हमें दूसरों को समुदाय में वर्तमान अथवा भविष्य में येसु के मित्र के रूप में प्रकट करता है। यह हमें बातचीत करने, एक-दूसरे को सुनने एवं जानने में मदद करता है। प्रेम हमें दूसरों के लिए खोलता है, मानव संबंधों का आधार बनाता है। यह हमें हमारी कमजोरियों एवं पूर्वाग्रहों के घेरे से बाहर निकलने में मदद देता है। येसु का प्रेम हमारे बीच सेतु का निर्माण करता है नये रास्तों के बारे बतलाता है, भातृत्व के संबंध को मजबूत करता है।  

धन्य कुँवारी मरियम हमें सहायता दे कि हम उनकी ममतामय मध्यस्थता द्वारा, उनके पुत्र से इस आज्ञा (प्रेम की आज्ञा) को ग्रहण करें तथा पवित्र आत्मा के सामर्थ्य से अपने दैनिक जीवन में इसका अभ्यास कर सकें।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

20 May 2019, 15:00