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संत फ्राँसिस असीसी महागिरजाघर संत फ्राँसिस असीसी महागिरजाघर 

विश्व में परिवर्तन लाने हेतु युवा अर्थशास्त्री एक साथ

संत पापा फ्राँसिस ने विश्वभर के युवा अर्थशास्त्रियों और उद्यमियों को एक पत्र भेजकर निमंत्रण दिया है कि वे मार्च 2020 में आयोजित सम्मेलन में भाग लें। संत फ्राँसिस की अर्थव्यस्था विषय पर 26 से 28 मार्च 2020 को युवाओं के लिए एक सम्मेलन का आयोजन किया गया है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 11 मई 2019 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 11 मई को दुनिया भर के युवा अर्थशास्त्रियों और उद्यमियों को निमंत्रण दिया है कि एक सम्मेलन में भाग लें ताकि उन्हें विभिन्न प्रकार के अर्थशास्त्र से अवगत होने का अवसर मिल सके, खासकर, ऐसी अर्थशव्यवस्था जो जीवन लाती है न कि मृत्यु, जो समावेशी है न कि अलग करती, मानवीय हैं न कि अमानवीय, जो पर्यावरण की रक्षक है न कि भक्षक और जो लोगों को एक साथ लाती एवं एक-दूसरे से मुलाकात कराती है, जिसके द्वारा एक संबंध का निर्माण हो, जो आज की अर्थव्यवस्था को बदल सके एवं आने वाले कल की अर्थव्यवस्था को आत्मा प्रदान कर सके।

अर्थव्यवस्था को पुनःजीवित करने की आवश्यकता  

उन्होंने कहा, "निश्चय ही इस अर्थव्यवस्था को पुनःजीवित किये जाने की आवश्यकता है, असीसी से प्रेरित होने की, जो सदियों से भाईचारा का प्रतीक रहा है। संत पापा जॉन पौल द्वितीय ने असीसी को शांति की संस्कृति के रूप में चुना किन्तु यह मेरे लिए, एक नई अर्थव्यवस्था को प्रेरित करने के लिए भी उपयुक्त स्थान है। संत फ्राँसिस ने अपने आपको संसारिकता से पूरी तरह विरक्त किया तथा ईश्वर को अपने जीवन का दिशानिर्देश माना। वे गरीबों के साथ गरीब और सभी के भाई बने। निर्धनता को अपनाने का उनका निर्णय अर्थशास्त्र के दृष्टिकोण को ऊँचा उठाया। वह दृष्टिकोण जो हमारे भविष्य को आशा प्रदान करता है तथा यह न केवल अत्यन्त गरीब लोगों के लिए बल्कि समस्त मानव परिवार के लिए लाभदायक है। यही दृष्टिकोण पूरे ग्रह एवं हमारे आमघर, धरती माता के लिए भी आवश्यक है।

पृथ्वी की देखभाल एवं सामाजिक न्याय की रक्षा एक-दूसरे से जुड़े हैं

संत पापा ने दुर्बलों की सहायता एवं समस्त पर्यावरण की देखभाल हेतु असीसी के संत फ्राँसिस का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि संत फ्राँसिस ने क्रूसित येसु के शब्दों को सुनकर, जिन्होंने कहा था, फ्राँसिस जाओ और मेरे घर की मरम्मत करो जो नष्ट हो रहा है," उन्होंने कलीसिया को बचाने के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। संत पापा ने कहा कि यह बात कलीसिया, समाज एवं प्रत्येक के हृदय के लिए लागू होती है। जो तत्काल एक सही अर्थव्यवस्था और एक सतत् विकास की मांग कर रही है जो इसके घावों को ठीक कर सके और हमें एक योग्य भविष्य की आशा दिला सके।

इस तात्कालिक आवश्यकता को देखते हुए, हम प्रत्येक जन ईश्वर की आज्ञाओं और सामान्य भलाई की माँगों के अनुरूप, अपनी मानसिक और नैतिक प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार करने के लिए बुलाये जाते हैं किन्तु संत पापा ने युवाओं को विशेष रूप से निमंत्रण दिया क्योंकि बेहतर एवं खुशहाल भविष्य की उनकी चाह उन्हें नबी का नया चिन्ह बनाता तथा उस अर्थव्यवस्था की ओर इंगित करता है जो व्यक्ति एवं पर्यावरण पर ध्यान दे सकता है।

युवाओं को बदलाव लाने की जिम्मेदारी

संत पापा ने पृथ्वी की पुकार सुनने की सलाह देते हुए कहा, "प्रिय युवाओ, आप जानते है कि आप अपने हृदय में पृथ्वी एवं गरीबों द्वारा मदद की पुकार को अधिक स्पष्ट रूप से सुन सकते हैं जो उन लोगों को पुकार रहे हैं जो उन्हें प्रत्युत्तर दे सकते हैं, न कि अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हटते हैं। यदि आप अपने हृदय को सुनेंगे तब आप एक नये एवं साहसी संस्कृति को महसूस करेंगे। आप जोखिमों का सामना करने से नहीं डरेंगे तथा नये समाज के निर्माण के लिए कार्य करेंगे।"

पुनर्जीवित प्रभु हमारे बल हैं। अतः इसमें बदलाव लाने की जिम्मेदारी हम दूसरों पर न छोड़ें। भविष्य आपके हाथों में है। आपके द्वारा भविष्य दुनिया में प्रवेश करेगा। अतः संत पापा ने युवाओं को इस परिवर्तन के नायक बनने हेतु प्रेरित किया तथा कहा कि वे भविष्य का निर्माण करें एवं बेहतर दुनिया के लिए कार्य करें।

संत पापा ने अपने पत्र में युवाओं को लिखा, "आपके विश्वविद्यालय, आपके व्यवसाय और आपके संगठन, अर्थव्यवस्था और प्रगति को समझने के नए तरीकों को बनाने के लिए आशा की कार्यशाला हैं, जो नष्ट करने की संस्कृति का मुकाबला करने, आवाजहीनों की आवाज बनने तथा नई जीवन शैलियों का प्रस्ताव रखने हेतु प्रेरित करते हैं।

संत पापा ने कहा कि आसीसी के संत फ्राँसिस हमारे लिए एक आदर्श प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने कहा, "खासकर, वे मुझे लगातार प्रेरित करते हैं क्योंकि मैंने उनके नाम को अपने लिए चुना है। आपके साथ एवं आपके द्वारा मैं कुछ खास आर्थशास्त्रियों एवं उद्यमियों को निमंत्रण देता हूँ जो विश्व स्तर पर काम कर रहे हैं ताकि उनके आदर्शों पर आर्थिक सुसगठन स्थापित किया जा सके। मुझे पूर्ण आशा है कि वे इसका प्रत्युत्तर देंगे और सबसे बढ़कर, युवाओं से मेरी उम्मीद हैं जो स्वाप्न देख सकते हैं वे ईश्वर की सहायता से एक न्यायपूर्ण एवं सुन्दर विश्व का निर्माण करने में अपना योगदान देंगे।

11 May 2019, 14:04