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रोमानिया में ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा रोमानिया में ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा 

रोमानिया में संत पापा, मरियम मिलन और खुशी का आदर्श

संत पापा फ्रांसिस ने रोमानिया की अपनी तीन दिवसीय प्रेरितिक यात्रा के दौरान बुखारेस्ट के संत जोसेफ महागिरजाघर में मरियम के अभ्यागमन के त्योहार का मिस्सा बलिदान अर्पित किया।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

संत पापा ने मिस्सा बलिदान के दौरान अपने प्रवचन में कहा कि हमने दो नारियों के मिलन के बारे में सुना जो एक दूसरे के लिए खुशी और महिमा की परिपूर्ण को व्यक्त करती हैं। शिशु एलिजाबेद के गर्भ में खुशी से उछल पड़ा औऱ वह अपनी चचेरी बहन के विश्वास हेतु उसे धन्य कहती है। मरियम वहीं ईश्वर के महान कार्यों के लिए जिसे उन्होंने अपनी दीन दासी हेतु किये हैं उनका महिमागान करती है। उनका गीत उन लोगों की आशा को अपने में समाहित करता है जो अपने स्वर को ईश्वर की ओर उठा नहीं पाते क्योंकि उन्होंने अपनी आवाज खो दी है। मरियम की आशा का गीत हमें भी अपने स्वर को ईश्वर की ओर उठाने हेतु प्रेरित करें। संत पापा ने कहा कि हम मरियम के जीवन की तीन बहुमूल्य बातों पर चिंतन कर सकते हैं।

मरियम की यात्रा

मरियम नाजरेत से जकरियस और एलीजबेद के पास गई। धर्मग्रंथ इसे मरियम की प्रथम यात्रा के रुप में  प्रस्तुत करता है। वह गलीलिया से बेतलेहम को जाती जहाँ येसु का जन्म होता है, वह मिस्र देश की यात्रा करती जिससे वह बालक येसु को हेरोद से बचा सके। वह हर साल पास्का पर्व के लिए येरुसलेम की यात्रा करती है और अंत में वह कलवारी की यात्रा करते हुए येसु का अनुसारण करती है। उनकी इन सारी यात्राओं में हम एक बात को सामान्य रुप में देखते हैं, उनकी ये यात्राएं अपने में सहज नहीं थीं उन यात्राओं के लिए साहस और धैर्य की जरुरत थी। यह हमें यही बतलाता है मरियम को पता था कि पहाड़ पर चढ़ाने का अर्थ क्या है। वह यह जानती है कि हमारे लिए पहाड़ चढ़ने का मतलब क्या है वे हमारी राह में सदैव एक माता की भांति हैं। जीवन में राह चलने में होने वाले थकान से वह वाकिफ हैं और हमारे मुसीबतों, जोखिमों और जीवन के टेड़े-मेड़े राहों में वे हमारा हाथ पकड़ कर हमें ले चलती हैं।

एक अच्छी माता के रुप में वह जानती हैं कि प्रेम की वृद्धि जीवन में छोटी चीजों के द्वारा होती है। माता के प्रेम और अपनी कुशग्रबुद्धि के कारण वह गौशाले को येसु के घर के बदल देती हैं, जहाँ हम येसु को कपड़ों में लिपटा प्रेम से भरा पाते हैं। मरियम के जीवन में चिंतन हमें इस धरती के उन नारियों, माताओं और नानियों की ओर दृष्टि दौड़ने में मदद करता है जो अपने त्याग, समर्पण और तपस्या के कारण वर्तमान का निर्माण करते हुए भविष्य के सपनों को देखते हैं। उनका त्याग अपने में मौन, दृढ़ाग्रही और अचर्चित है। वे अपने “आस्तीन को मोड़ने” हेतु भय का अनुभव नहीं करते और “आशा के विरुद्ध आशा” करते हुए अपने कंधों में परिवार और बच्चों की कठिनाइयों को वहन करने में पीछे नहीं रहते हैं। आप के लोगों ने अपने जीवन में आशा को बनाये रखा है। मरियम और उन सारी माताओं के चेहरों को देखते हुए हम अपने को आशा के अनुभव से पोषित होता हुआ पाते हैं जो हमारे लिए जीवन और भविष्य में नई क्षितिजों को जन्म देता है। हम इस बात पर बल दें कि हमारे लोगों में आशा भरी हुई थी। यही कारण है कि मरियम की यात्रा आज भी जारी है जहाँ वे हमें अपने साथ चलने हेतु निमंत्रण देती हैं। 

मरियम का एलिजबेद से मिलन

एलिजबेद अपने में उम्रदार है, लेकिन वह भविष्य के बारे में कहती और अपने को “पवित्र आत्मा से परिपूर्ण” पाती है। वह सुसमाचार के अंतिम धन्यवचनों की भविष्यवाणी करती है, “धन्य हैं वे जो विश्वास करते हैं” (यो. 20.29) एक युवा नारी बुजुर्ग स्त्री से भेंट करने को जाती है जो अपने में खास है जिससे वह उनसे सीख सकें, वहीं बुजुर्ग नारी युवा स्त्री के भावी जीवन की भविष्यवाणी करती है। यहां हम युवा को एक बुजुर्ग से मिलता हुआ देखते हैं। मिलन की संस्कृति अपने में चमत्कार लाती है जहाँ कोई अपने आप में सीमित हो कर नहीं रहता वरन सभी एक दूसरे की चिंता करते हैं जिससे वे ईश्वर के चेहरे की झलक दे सकें। वे एक साथ चलने से नहीं डरते औऱ जब ऐसा होता है तो येसु अपने को प्रकट करते हुए लोगों के लिए आश्चर्यजनक कार्य करते हैं। पवित्र आत्मा हमें अपने आप से बाहर निकलने को प्रेरित करता है उन बातों से बाहर निकलें को जिनमें हम चिपके रहते हैं।

पवित्र आत्मा हमें चेहरे से परे देखने को प्रेरित करता है जहां हम दूसरों की अच्छाई की चर्चा करते और उन्हें धन्य कहते हैं। यह हमारे उन भाई-बहनों के संबंध में सच है जो आश्रयहीन हैं जो अपने दैनिक जीवन की रोटी के लिए मोहताज हैं जिन्हें समुदाय अपनी मित्रता के भाव में स्वागत, आलिंगन करता औऱ उन्हें सहारा देता है। यह मिलन की संस्कृति के बारे सही है ख्रीस्तियों के रुप में यह हमें माता कलीसिया के चमत्कार का अनुभव करने को कहती है जो हमें खोजती, सुरक्षित रखती औऱ अपनी संतान के रुप में एकत्रित करती है। कलीसिया में जब विभिन्न रीतियों का मिलन होता है तो महत्वपूर्ण बात यह नहीं कि हम किसी समुदाय, दल या जातीयता से तल्लुकात रखते हैं वरन ईश्वरीय प्रजा के रुप उनका महिमागान हमारे लिए महान कार्यों का स्रोत बनता है। हम पुनः इस बात पर जोर दें कि धन्य हैं वे जो विश्वास करते हैं (य़ो.20.29) जो साहस के साथ मिलन और समुदायिकता को प्रोत्साहित करते हैं।

मरियम का एलिजबेद को भेंट करना हमें इस बात की याद दिलाती है कि ईश्वर हमारे मध्य निवास करना चाहते हैं जहाँ हम अपने में उनकी धड़कन को अनुभव करते हैं। वे अपने लोगों के बीच में रहते हैं, वे वहाँ रहते, वहाँ हमारा इंतजार करते हैं। हम अपने में नबी की पुकार को सुन सकते हैं जो हमें भयभीत होने को नहीं कहते हैं, हमारे हाथ कमजोर न हों। क्योंकि ईश्वर हमारे बीच में हैं, वे शक्तिशाली हैं। (जेफा.3.16-17) यह सभी ख्रीस्तियों का रहस्य है ईश्वर हमारे बीच में शक्तिशाली मुक्तिदाता के समान हैं। हमारा यह विश्वास हमें मरियम की तरह खुशी में आनंद के गीत गाने को मदद करता है।

मरियम का आनन्द

मरियम अपने में आनंदित होती है क्योंकि वह अपने गर्भ में एम्मनुएल “ईश्वर हमारे साथ है” को ग्रहण करती है। “ख्रीस्तीय जीवन पवित्र आत्मा में आनंदित होना है”(गऊदाते एत एसुलताते 122)। आनंद के बिना हमारा जीवन अपने में कोढ़ग्रस्त है जहाँ हम अपनी नखुशी के गुलाम हो जाते हैं। विश्वास की कमी हमारे जीवन की खुशी को कम कर देती है। हमारा विश्वास अपने में तब डगमगाता है जब हम अपने को उदासी और निराशा में तैरता हुआ पाते हैं। जब हम अपने को बंद कर लेते और अविश्वास में जीवन यापन करते तो हम अपने विश्वास का खंडन करते हैं। इस बात को अपने में अनुभव करने के बदलने कि ईश्वर की संतान है और वे हमारे जीवन में महान कार्य करते हैं, हम अपने को अपनी मुसीबतों में ही सीमित कर लेते हैं। हम इस बात को भूल जाते हैं कि हम अपने में अनाथ नहीं हैं क्योंकि हमारे एक पिता हैं जो शक्तिशाली हैं। माता मरियम हमारी सहायता करने हेतु आती हैं वे ईश्वरीय महिमा का गीत गाते हुए उनकी प्रशंसा करती हैं।

हम यहाँ आनंद के रहस्य को पाते हैं। मरियम अपनी जीवन की तकलीफों के बावजूद शुरू से ही अपने में दीन-हीन और नम्र हैं। वह आनंद से परिपूर्ण है क्योंकि उन्होंने अपने जीवन की सारी चीजों को ईश्वर के लिए सौंप दिया है। वे हमें इस बात की याद दिलाती हैं कि यदि हम ईश्वर और अपने भाई-बहनों के लिए अपने हृदय को खुला रखते तो वे हमारे लिए आश्चर्यजनक कार्य करते हैं। हम इस भूमि के महान साक्ष्यों की याद करें, वे लोग जिन्होंने अपने जीवन में सतावटों के बावजूद ईश्वर पर विश्वास किया। वे दुनिया में नहीं अपितु ईश्वर पर विश्वास करते हैं जिसके कारण वे अपने को सुरक्षित पाते हैं। मैं उन दीन लोगों के लिए ईश्वर का धन्यवाद अदा करता हूँ जिन्होंने हमें राह दिखलाई है। उनके आंसू अपने में व्यर्थ नहीं थे। उनकी प्रार्थना स्वर्ग की ओर अरोहित हुई और लोगों के लिए आशा का कारण बनी।

संत पापा ने कहा कि माता मरियम यात्रा करते हुए भेंट करती हैं जो उनमें खुशी का संचार करता है क्योंकि वह अपने से वृहद चीज को अपने में वहन करती हैं। वह अपने में आशीष को धारण करती हैं। उनकी तरह हम भी रोमानिया के लिए आशीष का कारण बनने से न डरें। आप मिलन की संस्कृति के वाहक बनें जो उदासीनता और विभाजन को दूर करती और इस धरती को ईश्वरीय करुणा का गीत गाने में मदद करती है।

31 May 2019, 18:43