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कैथोलिक बाइबिल फेडरेशन के संग संत पापा कैथोलिक बाइबिल फेडरेशन के संग संत पापा  (Vatican Media)

पवित्र आत्मा ईश वचन के माध्यम से सक्रिय रहते, सन्त पापा फ्राँसिस

वाटिकन में शुक्रवार, 26 अप्रैल को विश्वव्यापी काथलिक बाईबिल संघ के सदस्यों को, संघ की 50वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में, सम्बोधित करते हुए सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा कि ईश वचन के द्वारा ही पवित्र आत्मा विश्व एवं विश्व के प्रत्येक विश्वासी में सक्रिय रहते हैं।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 26 अप्रैल 2019 (रेई, वाटिकन रेडियो): वाटिकन में शुक्रवार, 26 अप्रैल को विश्वव्यापी काथलिक बाईबिल संघ के सदस्यों को, संघ की 50वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में, सम्बोधित करते हुए सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा कि ईश वचन के द्वारा ही पवित्र आत्मा विश्व एवं विश्व के प्रत्येक विश्वासी में सक्रिय रहते हैं।

सन्त पापा ने कहा कि वस्तुतः, ईश वचन विश्व में ईश्वर की प्राण वायु फूँकता तथा प्रत्येक के हृदय को प्रेम की गरमाहट से परिपूर्ण कर देता है।  

शैक्षणिक योगदान

सन्त पापा ने कहा, "सभी शैक्षणिक योगदानों एवं प्रकाशित किए गए ग्रन्थों को इसी की सेवा में होना चाहिये। वे लकड़ी की तरह हैं, जो कठिन श्रम से इकट्ठी की जाती है और जिसका उपयोग गरमाहट के लिये किया जाता है। तथापि, जैसे लकड़ी अपने आप गर्मी पैदा नहीं करती, उसी प्रकार बेहतर से बेहतर अध्ययन भी गरमाहट उत्पन्न नहीं कर सकता। इसके लिये आग ज़रूरी है, आन्तरिक भावना की ज़रूरत है ताकि बाईबल की ज्योति दिल प्रज्वलित होकर जीवन में परिणत हो सके।"

सन्त पापा ने कहा, "बाईबिल केवल पवित्र ग्रन्थों का एक सुन्दर संकलन मात्र नहीं है अपितु यह जीवन का शब्द, जीवन का बीज है जिसे बोया जाना ज़रूरी है। बाईबिल वह वरदान है जिसे पुनर्जीवित ख्रीस्त ग्रहण करने तथा लोगों में प्रसारित करने का आग्रह करते हैं ताकि उनके नाम में सब लोग यथार्थ जीवन प्राप्त कर सकें।"

शब्दों की भरमार के बीच ईश वचन

सन्त पापा ने कहा कि कलीसिया में शब्द का अहं महत्व है इसीलिये उपदेश एवं प्रवचन महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा, "उपदेश बयानबाजी के अभ्यास नहीं हैं और न ही ये बुद्धिमान मानव धारणाओं का प्रसार है बल्कि ये ईश्वर का वचन है जिसे आत्मसात कर जीवन में वरण किया जाना अनिवार्य है।"

उन्होंने कहा, "हमारे कानों में रोज़ाना बहुत सारे शब्द प्रवाहित होते हैं, सूचना प्रसारित होती है और कई इनपुट मिलते हैं; कई शब्द, शायद बहुत अधिक शब्द, प्रायः जिन्हें ग्रहण करने की हममें क्षमता भी नहीं होती है। शब्दों की भरमार के बीच हम एकमात्र शब्द यानि येसु के वचन का परित्याग नहीं कर सकते जो अनन्त जीवन है।"

26 April 2019, 11:47