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विमान में पत्रकारों से बातें करते हुए संत पापा फ्राँसिस विमान में पत्रकारों से बातें करते हुए संत पापा फ्राँसिस 

'जो दीवारों का निर्माण करेगा, वह उसी में कैद हो जाएगा', संत पापा

मोरक्को से वापसी की उड़ान पर पत्रकारों द्वारा संत पापा से पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए, उन्होंने इस्लाम के साथ बातचीत, प्रवासियों के अधिकारों की रक्षा करने की आवश्यकता और विवेक की स्वतंत्रता सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा की।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

विमान, सोमवार 1 अप्रैल 2019 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस मोरक्को की दो दिवसीय प्रेरितिक यात्रा समाप्त कर 31 मार्च शाम को राबाट साले हवाई अड्डे से संध्या 5.15 बजे रोयल ऐर मोरक्को द्वारा रोम के लिए रवाना हुए। विमान में संत पापा ने पत्रकारों के प्रेस कान्फ्रेंस में विभिन्न विषयों पर करीब आधे धंटे तक बातें की।

ख्रीस्तीय-मुस्लिम संवाद

विश्व शांति और विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद हेतु इस यात्रा के परिणाम के बारे उनके विचार पूछे जाने पर संत पापा फ्राँसिस ने कहा, "मैं कहूंगा कि अभी फूल लगे हैं, फल बाद में आएंगे"।

उन्होंने मोरक्को की यात्रा के दौरान और अबू धाबी की पिछली यात्रा के दौरान शांति, एकता और बंधुत्व के बारे में बात करने में संतोष व्यक्त किया, जिसके दौरान उन्होंने मानवीय भाईचारे के महत्वपूर्ण दस्तावेज को याद किया जिसमें उन्होंने अल अजहर के ग्रैंड ईमाम के साथ हस्ताक्षर किए थे।

उन्होंने मोरक्को में खीस्तियों की धार्मिक स्वतंत्रता को देखा और सभी भाइयों और बहनों के सम्मान के साथ स्वागत किये जाने की प्रशंसा की। उन्होंने कहा,“यह सह-अस्तित्व का एक सुंदर फूल है जो फलदायी होने का वादा करता है। हमें हार नहीं माननी चाहिए!”

संत पापा ने स्वीकार किया कि अभी भी कठिनाइयाँ हैं, "हर धर्म में हमेशा एक कट्टरपंथी समूह होता है जो आगे नहीं जाना चाहता और अतीत के संघर्षों की कड़वी यादों में रहता है, युद्ध की तलाश में रहता है और भय का बीज भी बोता है।"

संत पापा ने भाईचारे संवाद के लिए काम करना जारी रखने की बात दोहराई और कहा कि विभिन्न स्तरों पर मानवीय संबंध होने पर ही संवाद आगे बढ़ सकता है।

उन्होंने राबाट में येरुसलेम के लिए आम अपील की पर हस्ताक्षर का उल्लेख करते हुए कहा कि "अगर हम दिल, दिमाग और हाथ वाले मानव हैं तो इस प्रकार समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाते हैं।" उन्होंने कहा कि यह समझौता मोरक्को के एक प्राधिकारी द्वारा और वाटिकन के प्राधिकारी द्वारा नहीं बनाया गया था, लेकिन उन सभी विश्वासियों द्वारा जो आशा के इस शहर को पीड़ित देखते हैं हम सभी ख्रीस्तीय, मुस्लिम और यहूदी इसे सार्वभौमिक देखना चाहते हैं। सभी विश्वासी, "हम सभी, येरूसालेम के नागरिक हैं।”

पुलों का निर्माण करें, दीवारों का नहीं

जो लोग पुलों के बजाय दीवारों का निर्माण करना पसंद करते हैं, उनके बारे में उन्होंने कहा कि "वे उन दीवारों में कैद हो जाएंगे जिसे उन्होंने दूसरों के लिए बनाई हैं," जबकि पुल का निर्माण करने वाले बहुत आगे निकल जाएंगे।

संत पापा फ्राँसिस ने माना कि पुल का निर्माण के लिए बहुत प्रयास और लगातार काम करना पड़ता है। उन्होंने इस बात का खुलासा किया कि उन्हें इवो एंड्रीच के उपन्यास "द ब्रिज ऑन द ड्रिना" के एक वाक्यांश ने उन्हें छुआ है, जिसमें वे कहते हैं कि पुल को ईश्वर ने स्वर्गदूतों के पंखों से बनाया है ताकि मनुष्य संवाद कर सकें... "

उन्होंने कहा, दीवार बनाने वाले, संचार के खिलाफ हैं, वे अलगाव के लिए हैं और जो दीवार बनाते हैं वे उसी में कैद हो जाएंगे।

प्रवासी

संत पापा फ्राँसिस द्वारा बार-बार नीति-निर्माताओं और सरकार के नेताओं से प्रवासियों की रक्षा और मदद करने की अपील करने के बावजूद, यूरोपीय राजनीति बिल्कुल विपरीत दिशा में जा रही है और लोकलुभावन नीतियां ज्यादातर ख्रीस्तीय मतदाताओं की राय को दर्शाती हैं। इस दुःखद स्थिति के बारे में एक पत्रकार ने संत पापा की राय पूछी।

संत पापा ने कहा, "मैं देख रहा हूँ कि न केवल काथलिक लोग बल्कि भली इच्छा रखने वाले कई लोग…भय से ग्रसित दिखाई देते हैं", यह लोकलुभावनवाद का चारा है।

उन्होंने कहा कि भय तानाशाही की शुरुआत है।

उन्होंने वईमार गणराज्य के पतन और जर्मनी में नाजीवाद के जन्म को याद किया और कहा,“हमें इतिहास के सबक को नहीं भूलना चाहिए।”

उन्होंने कहा, “डर को फैलाने के लिए क्रूरता, बंध्यापन और बाँझपन को बनाना पड़ता है। यूरोप में जनसंख्या की गिरावट के बारे में सोचिये। यहां तक कि हम जो इटली में रहते हैं, शून्य से नीचे हैं।”

संत पापा ने प्रवासियों के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि यूरोप प्रवासियों द्वारा "बनाया गया था।"

उन्होंने कहा कि यूरोपीय राष्ट्र यमन के बच्चों को मारने के लिए हथियार बेचते हैं, इस पर लगातार कहा जाता है कि यह "सुरक्षा" की आवश्यक है। "मैं इसे एक उदाहरण के रूप में कहता हूँ, लेकिन यूरोप हथियार बेचता है।"

संत पापा ने कहा कि “अनेक देशों में भूखमरी के कारण पलायन की समस्या है। अगर यूरोप इस समस्या को सुलझाना चाहती है तो समझदारी से देश में शिक्षा और विकास कार्यों में निवेश करके मदद करने की कोशिश करनी चाहिए।

उन्होंने कहा,“आप बल द्वारा पलायन को रोक नहीं सकते हैं, लेकिन उदारता, शिक्षा और आर्थिक निवेश के जरिए इसे रोका जा सकता है।

यूरोप में आने वाले प्रवासियों को स्वीकार करने और वितरित करने के तरीके पर विचार करते हुए, संत पापा ने कहा, “यह सच है कि एक एकल देश हर किसी को स्वीकार नहीं कर सकता है, "लेकिन प्रवासियों को वितरित करने के लिए पूरा यूरोप है" और उन्होंने दोहराया कि स्वागत के साथ होना चाहिए, एक खुला दिल, जो साथ देता है, बढ़ावा देता है और अपने साथ मिलाता है।”

01 April 2019, 16:36