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पवित्र शुक्रवार संत पापा फ्राँसिस पवित्र शुक्रवार संत पापा फ्राँसिस 

संत पापा द्वारा प्रभु के दुःखभोग धर्मविधि का अनुष्ठान

संत पेत्रुस महागिरजाघर में संत पापा ने प्रभु के दुःखभोग धर्मविधि का अनुष्ठान किया। इस दौरान परमधर्मपीठ के उपदेशक फादर रानिएरो कांतालामेस्सा ने पाठ के अंश "वह तिरस्कृत था और पुरुषों द्वारा अस्वीकार कर दिया गया था", पर उपदेश दिया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार 20 अप्रैल 2019 (वाटिकन न्यूज) :  पवित्र शुक्रवार की शाम को संत पेत्रुस महागिरजाघर में हजारों की संख्या में ख्रीस्तियों ने प्रभु येसु के दुःखभोग धर्मविधि में भाग लिय़ा। पवित्र शुक्रवार ही एक ऐसा दिन है जब पवित्र मिस्सा समारोह नहीं होता, पर धर्म विधि को तीन भागों में विभक्त किया जाता है। प्रभु येसु के दुःखभोग पाठ, पवित्र क्रूस की उपासना और परमप्रसाद वितरण।

संत योहन के सुसमाचार से प्रभु येसु के दुःखभोग का वृतांत गाकर सुनाया गया। उसके बाद फादर रानिएरो कांतालामेस्सा ने उपदेश दिया। उन्होंने अपना प्रवचन पाठ के अंश, “वह तिरस्कृत था और पुरुषों द्वारा अस्वीकार कर दिया गया था", से शुरु किया।

क्रूस पर येसु, तिरस्कृतों के प्रतिनिधि

फादर कान्तालामेस्सा ने कहा कि इसायस नबी द्वारा किये गये भविष्यवाणी में "दुःख के रहस्यमय व्यक्ति" की चर्चा की गई है। उस "दुःख के रहस्यमय व्यक्ति" का नाम है ‘येसु नाजरी।’ आज हम उसी क्रूसित येसु पर चिंतन करना चाहते हैं विशेष रुप से वे दुनिया के परित्यक्त, कमजोर, पीड़ित लोगों का प्रतिनिधत्व करते हैं जिनसे संसार अपना मुँह मोड़ लेती है।

उन्होंने कहा कि क्रूस पर येसु उन लोगों का प्रतीक बन जाते हैं जो समाज द्वारा 'अपमानित और तिरस्कृत' हैं।" उन्होंने कहा कि यह क्रूस का सबसे महत्वपूर्ण अर्थ नहीं है, सबसे महत्वपूर्ण अर्थ "आध्यात्मिक और रहस्यमय"है, "येसु ने मरकर दुनिया को पाप से छुटकारा दिलाया"। हालाँकि, जो अर्थ येसु में नीच और तिरस्कृतों के प्रतिनिधि के रूप में पाया जा सकता है, वह यह है, “सभी लोग, विश्वासी और गैर-विश्वासी, प्रभु को स्वीकार कर पापों से छुटकारा पा सकते हैं।”

पास्का आपका उत्सव है

फादर ने कहा कि सुसमाचार की कहानी येसु मसीह के क्रूस पर मारे जाने तक में समाप्त नहीं होती, परंतु क्रूसित येसु के जी उठने की कहानी को बयां करती है। पास्का "ईश्वर द्वारा निर्देशित और मसीह में संपन्न किया गया उत्सव है। अतः हम कह सकते हैं यह "गरीबों और परित्यक्त व्यक्तियों का अर्थात आपका उत्सव है।”

कलीसिया गरीबों के साथ

फादर कांतालामेस्सा ने जोर देकर कहा कि  कलीसिया ने, "गरीबों और कमजोरों के साथ खड़े होने हेतु अपने संस्थापक से जनादेश प्राप्त किया है"; शांति को बढ़ावा देने के अलावा, उनका यह कर्तव्य भी है कि सभी की भलाई को देखते हुए वह चुप नहीं रह सकती। उन्होंने कहा, "कोई भी धर्म गरीबों की दुर्दशा के प्रति उदासीन नहीं रह सकता है, खासकर तब जब" कुछ खास लोग जो अपने पास ज़रूरत से ज़्यादा चीजों को हड़प लेते हैं, "क्योंकि सभी धर्मों के ईश्वर इन लोगों के प्रति उदासीन नहीं हो सकते।”

अपने प्रवचन के अंत में फादर ने कहा कि दो दिनों में" येसु के पुनरुत्थान की घोषणा के साथ, धर्मविधि इस विजेता को एक नाम और एक चेहरा देगा। आइए, हम आशा के साथ मनन करते हुए शुभ घड़ी का इन्तजार करें।”  

20 April 2019, 16:30