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संत पापा फ्राँसिस और राबाट के महाधर्माध्यक्ष लोपेज संत पापा फ्राँसिस और राबाट के महाधर्माध्यक्ष लोपेज  (AFP or licensors)

महाधर्माध्यक्ष द्वारा संत पापा की यात्रा के परिणाम पर चर्चा

संत पापा फ्राँसिस के प्रेरितिक दौरे के समापन पर राबात के महाधर्माध्यक्ष ने काथलिक कलीसिया के भविष्य के बारे में बातें की।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

राबाट, मंगलवार 2 अप्रैल 2019 (वाटिकन न्यूज) : संत पापा के मोरक्को प्रेरितिक यात्रा के समापन पर राबाट के महाधर्माध्यक्ष क्रिस्टोबाल लोपेज रोमेरो ने वाटिकन संवाददाता जोन वाटर को संत पापा फ्राँसिस की यात्रा के प्रभाव और मोरक्को की छोटी कलीसिया के भविष्य के लिए उनकी आशाओं के बारे में बताया।

महाधर्माध्यक्ष लोपेज़ रोमेरो ने कहा कि वह उन सभी आशीषों के लिए ईश्वर के आभारी हैं, जो संत पापा की यात्रा द्वारा मोरक्को की कलीसिया को मिली। उन्होंने राज्य और कलीसिया के सभी अधिकारियों को धन्यवाद दिया जिन्होंने इस यात्रा की सफलता सुनिश्चित करने के लिए काम किया और संत पापा द्वारा संबोधित किए गए 3 विषयों को मोरक्को के लोगों के लिए विशेष रुचि के रूप में रेखांकित किया।

अंतर-धार्मिक संवाद

“हम अंतर-धार्मिक, इस्लामिक-ख्रीस्तीय संवाद से शुरू करते हैं: हम सोचते हैं कि राजा और संत पापा ने जो कहा है, उससे हम एक कदम आगे बढ़ सकते हैं। अब तक 'सह-अस्तित्व' और 'सहिष्णुता' की बहुत चर्चा हुई है, लेकिन राजा ने कहा है कि सहिष्णुता 'थोड़ी' है। मेरे एक साल के अनुभव के बाद मैं भी कह सकता हूँ : अर्थात्, हमें दोस्ती, आपसी ज्ञान, पारस्परिक संवर्धन के लिए आगे बढ़ना चाहिए। सार्वभौमिक भाईचारे को एक साथ बनाने के लिए इसकी शुरुआत खुद से करनी चाहिए। हमें इस्लामिक-ख्रीस्तीय संवाद में एक गुणात्मक छलांग लगानी चाहिए: "मुझे नहीं पता कि हम इसे करने में सक्षम होंगे, लेकिन हमारा यह काम इस क्षण से शुरू हो रहा है,” महाधर्माध्यक्ष लोपेज रोमेरो ने कहा।

प्रवास

प्रवासन के मुद्दे को संबोधित करते हुए, महाधर्माध्यक्ष लोपेज ने कहा कि, जैसा कि संत पापा फ्राँसिस ने कहा, प्रवासन लोगों का अधिकार है और उन्होंने प्रवासियों का स्वागत करने वाले देशों के सही रवैये का वर्णन करने के लिए चार शब्दों का इस्तेमाल किया: "स्वीकार करना, सुरक्षा करना, बढ़ावा देना और एकीकृत करना।"

महाधर्माध्यक्ष लोपेज ने इस संबंध में किए जाने वाले बदलावों को ध्यान में रखते हुए कहा, “हमें अपने दिलों को खोलना होगा। यह आवश्यक है कि हमारे दिल को खोलने के बाद दरवाजे खोले जाएं। हमें अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आर्थिक प्रणाली के कानूनों को बदलने की आवश्यकता है, ताकि हर कोई अपने देश में रह सके और युद्ध के कारण या आर्थिक कारणों से अपने देश को छोड़ने के लिए मजबूर न हो। प्रवासन एक अधिकार है, लेकिन इसे एक व्यवस्थित तरीके से करने में सक्षम होना चाहिए जो मानव अधिकारों का सम्मान करता है।”

धर्म परिवर्तन

राबाट में कलीसिया के पुरोहितों से बात करते हुए, संत  पापा फ्राँसिस ने अभियोजन पक्ष पर एक बयान दिया - लोगों को समझा-बुझाकर और तर्क द्वारा धर्म में परिवर्तित करने का प्रयास मोरक्को में गैरकानूनी है, जहां अधिकांश आबादी मुस्लिम है।

संत पापा ने मोरक्को के ख्रीस्तियों से कहा कि वे धर्म परिवर्तन न करें। महाधर्माध्यक्ष लोपेज ने बताया कि संत पापा ने अपने भाषण के लिए सावधानीपूर्वक अपने शब्दों को क्यों चुना।

“ऐसे ख्रीस्तीय हैं जो इस पहलू को नहीं समझते हैं: कलीसिया धर्म परिवर्तन करना नहीं चाहती।  संत पापा बेनेडिक्ट सोलहवें ने पहले ही कहा कि कलीसिया धर्म परिवर्तन द्वारा नहीं बल्कि आकर्षण से, साक्ष्य द्वारा बढ़ता है। यही कारण है कि हम मोरक्को में यहां आराम से हैं, जहां धर्म परिवर्तन निषेद्ध है, क्योंकि हम धर्म परिवर्तन करना नहीं चाहते हैं। हमारा लक्ष्य कलीसिया की संख्या को बढ़ाना नहीं है, हमारा लक्ष्य ईश्वर का राज्य है, शांति और भाईचारा बढ़े, जीवन के लिए सम्मान, अधिक प्यार और सच्चाई बढ़े। "

02 April 2019, 16:56