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चेक कार्डिनल जोसेफ बेरन के अवशेष को ढोते पुरोहित जिन्हें नाजी और कम्युनिस्टों के द्वारा अत्याचार का सामना करना पड़ा था। चेक कार्डिनल जोसेफ बेरन के अवशेष को ढोते पुरोहित जिन्हें नाजी और कम्युनिस्टों के द्वारा अत्याचार का सामना करना पड़ा था।  (AFP or licensors)

प्रार्थना की प्रेरिताई में पीड़ित ख्रीस्तियों के लिए प्रार्थना

संत पापा फ्राँसिस ने मार्च महीने के प्रार्थना की प्रेरिताई में ख्रीस्तीय समुदाय के लिए प्रार्थना की मांग की है, विशेषकर उन ख्रीस्तियों के लिए जो धार्मिक स्वतंत्रता एवं मानव अधिकार के अभाव के कारण अत्याचार के शिकार हो रहे हैं।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

संत पापा ने विश्वव्यापी प्रार्थना की प्रेरिताई का एक विडीयो प्रकाशित कर कहा, "हम प्रार्थना करें कि ख्रीस्तीय समुदाय, खासकर, जो अत्याचार के शिकार हैं वे ख्रीस्त के सामीप्य को महसूस कर सकें और उनके अधिकारों का सम्मान किया जाए।"

संत पापा ने कहा, "क्रूस का चिन्ह बनाना, बाईबिल पाठ करना, रविवार को यूखारिस्त में भाग लेना, येसु के बारे बातें करना, रोजरी प्रार्थना करना, ये सभी चीजें सामान्य, दैनिक क्रियाकलापों की तरह लगते हैं। फिर भी, विश्व के विभिन्न हिस्सों में ये सामान्य नहीं हैं। इन में से कोई एक कार्य को करने का अर्थ है जान को जोखिम में डालना, मार डाला जाना अथवा पत्थरवाह किया जाना या जबरन मजदूर कैम्पों में डाल दिया जाना।"  

विभिन्न क्षेत्रों में अत्याचार के शिकार ख्रीस्तीय

इस साल के शुरू में फिलिपींस के जोलो महागिरजाघर में ख्रीस्तयाग के दौरान हमला किया गया था, जिसमें 23 लोग मारे गये। पिछला साल दुनिया के विभिन्न हिस्सों में 40 मिशनरियों को मार डाला गया, जिनमें से 35 पुरोहित थे। उन मिशनरियों में से दो मध्य अफ्रीका रिपब्लिक के थे, जिनकी हत्या अन्य 80 ख्रीस्तीय विश्वासियों के साथ अलिनदाओ शरणार्थी शिविर में नवम्बर के अंत में की गयी थी।

पाकिस्तान की आसिया बीबी पर ईश निंदा कानून के उलंघन का आरोप लगाकर मृत्युदण्ड की सजा सुनायी गयी थी जिन्हें 9 सालों के कैद के बाद रिहा किया गया। 2015 में मिस्र के 21 कॉप्टिक ख्रीस्तियों का अपहरण कर, उनकी हत्या कर दी गयी। 2014 के दिसम्बर माह में पेशावर में आक्रमण किया गया था जिसमें 130 विद्यार्थियों की मौत हो गयी थी।

इस तरह के हजारों मामले हैं जिनके बारे में कोई बात नहीं की जाती है क्योंकि उन्हें खबरों में नहीं छापा जाता। परमधर्मपीठीय फाँडेशन "आवश्यकता में कलीसिया की सहायता" (एड टू द चर्च इन नीड) द्वारा प्रकाशित धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट के अनुसार ईसाई धर्मावलम्बी विश्व में सबसे अधिक प्रताड़ित है।

इस युग में अधिक शहीद

प्रार्थना की प्रेरिताई हेतु मार्च महीना के विडीयो संदेश में संत पापा ने कहा है कि "हमारे लिए इस बात को स्वीकार करना कठिन हो सकता है किन्तु आरम्भिक कलीसिया की अपेक्षा आज कहीं अधिक शहीद हैं क्योंकि वे सच्चाई को प्रकट करते हैं तथा येसु ख्रीस्त की घोषणा करते हैं, उन देशों में भी जहाँ सिद्धांतों एवं कागजों में धार्मिक स्वतंत्रता एवं मानव अधिकारों की रक्षा की जाती है।"  

संत पापा की विश्वव्यापी प्रार्थना की प्रेरिताई एवं यूखरिस्तीय युवा आंदोलन के अंतरराष्ट्रीय निदेशक फादर फ्रेडेरिक फोरनोस एस. जे. ने कहा, "दुनिया में सताए गए ईसाइयों की स्थिति हर दिन कम दूरस्थ और अमूर्त लगती है। ये वे लोग हैं किन्तु उसमें हम भी हो सकते हैं। जैसा कि संत पापा कहते हैं, ऐसे देश जहाँ धार्मिक स्वतंत्रता एवं मानव अधिकारों की रक्षा सिद्धांतों एवं कागजों में की जाती है, जटिल भेदभाव मौजूद है।

अत्याचार के शिकार लोगों के लिए महान पुरस्कार की घोषणा करते हुए येसु कहते हैं- "धन्य हो तुम जब लोग मेरे कारण तुम्हारा अपमान करते हैं, तुम पर अत्याचार करते हैं और तरह-तरह के झूठे दोष लगाते हैं।" (मती. 5:11)

05 March 2019, 15:54