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पादुवा के बारबारिगो स्कूल के छात्रों,शिक्षकों के साथ संत पापा फ्राँसिस पादुवा के बारबारिगो स्कूल के छात्रों,शिक्षकों के साथ संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

बारबारिगो स्कूल के छात्रों के सवालों का संत पापा ने दिया जवाब

बारबारिगो स्कूल के छात्रों से मुलाकात कर संत पापा ने उन्हें महत्वपूर्ण लक्ष्यों तक पहुंचने हेतु कठिन प्रयास करने तथा रास्ते में आने वाली कठिनाईयों का साहस के साथ सामना करने को कहा। वे अपने में बंद न रहें और न ही जीवन में समझौता और मध्यस्थता को स्वीकार करें, बल्कि सभी के साथ मिलकर रहें।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार 23 मार्च 2019 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 23 मार्च को वाटिकन के संत पॉल छठे सभागार में पादुवा बारबारिगो स्कूल के करीब 1,150 छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से मुलाकात की और उनके तीन प्रतिनिधियों दवारा पूछे गये सवालों का जवाब दिया।

पहला सवाल सोफिया द्वारा 

पहला सवाल सोफिया ने किया। उन्हें पहली बार हाई स्कूल में दाखिला लेने के महत्वपूर्ण निर्णय लेने में कठिनाई महसूस की। हालंकि अपने माता-पिता और अपने शिक्षकों का साथ था, पर कभी-कभी युवाओं के लिए उन वयस्कों को ढूंढना आसान नहीं होता जो उनके आदर्श हो जिन्हें देख कर वे अपने लिए सही दिश निर्देश का चुनाव कर सकते हैं। सोफिया ने संत पापा से इस तथ्य को समझने हेतु सवाल पूछा कि वे वास्तव में किस पर भरोसा कर सकते हैं?

संत पापा ने कहा कि युवा खुद अपने आप में संदर्भ का मुख्य बिंदु हैं। आपमें जो शक्ति और उत्साह है उसे बनाये रखना चाहिए। युवाओं को महत्वपूर्ण लक्ष्यों तक पहुंचने हेतु एक कठिन प्रयास करना है। रास्ते में आने वाली कठिनाइयों से आप आँखें बंद नहीं कर सकते हैं और न ही जीवन में समझौता और न ही मध्यस्थता, बल्कि सभी के साथ मिलकर रहें, विशेष रूप से सबसे कमजोर लोगों का साथ दें। संत पापा ने कहा कि कलीसिया आप युवाओं पर भरोसा करती है। आपमें अच्छी भावना है और आप अपना समय और शक्ति देने के लिए उदार और सक्षम हैं। इस कारण से आपके शिक्षक और आपके पुरोहित आपको दूसरों से अलग नहीं कर सकते हैं, वे आपको अपने जीवन में हमेशा महत्वपूर्ण लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए और आपस में एकजुट रहने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।”

दूसरा सवाल आल्दो द्वारा

आलदो ने संत पापा को बताया कि "बारबारिगो" एक ऐसा स्कूल है, जहाँ न केवल पढ़ाई होती है, बल्कि अक्सर लोग जीवन के बड़े सवालों से भी रूबरू होते हैं: ऐसे बहुत से मौके आते हैं जिनमें शिक्षक हमें खुद से सच्चाई, न्याय और सुंदरता के बारे में सवाल पूछने के लिए आमंत्रित करते हैं; ऐसे प्रस्ताव जो हमें अपने आप को दूसरों की सेवा में रखने की खुशी का अनुभव करने में मदद करते  हैं, जैसे कि चालीसा के तीसरे रविवार को संत एजीदियो समुदाय के साथ मिलकर हमारे शहर के जरूरतमंद लोगों को दोपहर का भोजन प्रदान करते हैं। हम उन क्षणों को जीते हैं जिनमें एक साथ अनुप्राणदाता या शिक्षक होते हैं। हम सुसमाचार पढ़ते और आपस में प्रभु सदेश को साझा करते हैं। लेकिन हमें येसु के साथ संबंध बनाने में कठिनाई होती है। आलदो ने संत पापा से पूछा कि जब वे उनके उम्र के थे विश्वास में बने रहने और येसु को ढूँढ़ने में किसने मदद की।

सैद्धांतिक और व्यावहारिक शिक्षा

संत पापा ने कहा कि एक ऐसे स्कूल में पढ़ना एक शानदार अवसर है जहाँ जीवन के अर्थ के बारे में प्रश्नों को संबोधित किया जाता है, न्याय,संस्कृति और जीवन के बारे बताया जाता है। ऐसा विद्यालय एक महान संसाधन है। एक अच्छा काथलिक स्कूल सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं देता परंतु जीवन निर्माण और चरित्र निर्माण के लिए अच्छे प्रश्नों को उत्तेजित करता है। यह बहुत महत्वपूर्ण है, अच्छे प्रश्नों को उत्तेजित करना कम से कम अच्छे उत्तर देने के समान है। यदि स्कूल के अंत में आप एक अतिरिक्त प्रश्न के साथ घर वापस जाते हैं,  बेहतर समझने की इच्छा के साथ, प्रश्न पर चिंतन करते हैं तो यह एक अच्छा संकेत है, इसका मतलब है कि प्रशिक्षण प्रक्रिया काम करती है।

संत पापा ने कहा कि स्कूल में केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक शिक्षा दी जाती है। वर्तमान परिस्थितियों से अवगत कराया जाता है। वे भाग्यशाली हैं कि उन्हें सुसमाचार के संपर्क में रखा जाता है और यह एक अनमोल उपहार है, वे उन बीज के समान हैं जो समय आने पर फल प्रदान करेंगे। संत पापा ने उन्हें खुले दिल और दिमाग से स्कूल के सभी कार्यक्रमों में भाग लेने हेतु प्रेरित किया।  

तीसरा सवाल जॉन द्वारा

हाई स्कूल के अंतिम वर्ष में पढ़ाई करने वाले जॉन ने संत पापा से कहा कि उसे लगता है कि उसने अपने भविष्य के लिए महत्वपूर्ण विकल्प बनाना है। स्कूल ने यह समझने में मदद की है कि हर दिन की प्रतिबद्धता के माध्यम से अपने दिमाग और अपने दिल को खोला जा सकता है। उसने आने वाले कल की अनिश्चितता के देखते हुए संत पापा से पूछा कि वे ईश्वर की योजना को किस तरह पहचान पायेंगे?

जॉन के सवालों का जवाब संत पापा ने इस तरह से दिया, “जॉन आपको सबसे पहले तो प्रार्थना करनी है। केवल मुँह से नहीं पर दिल से प्रार्थना करनी है और प्रभु से पूछना है प्रभु आप मुझसे क्या चाहते हैं? ईश्वर आप युवाओं को वर्तमान की चुनौतियों का सामना करने में एक निर्णायक कार्य सौंपते हैं, जिसमें निश्चित रूप से भौतिक चुनौतियां हैं, लेकिन सबसे पहले वे मनुष्य की दृष्टि की चिंता करते हैं। वास्तव में, आर्थिक समस्याओं के साथ, एक नौकरी खोजने की कठिनाई और भविष्य के लिए अनिश्चितता के साथ, नैतिक मूल्यों और जीवन के अर्थ के नुकसान का संकट है। इस विकट परिस्थिति का सामना करते हुए, कोई व्यक्ति पलायन, प्रलोभन, स्वार्थ, अलगाव विचारधाराओं की प्रवृत्ति में बंद हो सकता है, शराब, ड्रग्स में शरण ले सकता है। वे वास्तविकताएं हैं जिन्हें हम सभी अच्छी तरह जानते हैं। यही कारण है, मैं आपको प्रोत्साहित करता हूँ कि आप अपने आप में बंद न हों, बल्कि अपने लोगों और ख्रीस्तीय समुदाय के साथ रहें। सामाजिक कार्यों में अपना सहयोग दें। आप युवा लोग, कलीसिया और समाज की ताकत हैं। यदि आप अपने आप को मसीह से संयुक्त रखें, सुसमाचार नियमित रुप से पढ़ेंगे और उसपर मनन करेंगे तो आप आशा के गवाह बन जाएंगे। आपको प्रभु इस मिशन के लिए बुलाते हैं।

संत पापा ने सभी को एक साथ प्रणाम मरिया प्रार्थना करने के लिए आमंत्रित किया। सभी ने मिलकर प्रार्थना की और अंत में संत पापा ने उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

23 March 2019, 16:07