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चेक एवं स्लोवाकिया गणतंत्रों के सांसदों संग संत पापा चेक एवं स्लोवाकिया गणतंत्रों के सांसदों संग संत पापा   (ANSA)

चेक और स्लोवाक गणतंत्र के सांसदों को पापा का संदेश

सुसमाचार विभिन्न स्थानीय संस्कृतियों को कमज़ोर नहीं करता बल्कि उनमें व्याप्त अच्छाईयों को अभिव्यक्त करता है।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टोफर-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 22 मार्च 2019 (रेई, वाटिकन रेडियो):  चेक एवं स्लोवाक गणतंत्रों के सांसदों ने शुक्रवार को सन्त पापा फ्राँसिस का साक्षात्कार कर उनका सन्देश सुना। दोनों गणतंत्रों का सांसदीय प्रतिनिधिमण्डल सन्त सिरिल एवं सन्त मथेयुस के निधन की 1,150 वीं पुण्य तिथि के उपलक्ष्य में वाटिकन एवं रोम का दौरा कर रहा है।

सन्त सिरिल एवं सन्त मथेयुस की धरोहर

सन्त पापा ने सांसदों को स्मरण दिलाया कि सन्त सिरिल एवं सन्त मथेयुस के सुसमाचार प्रचार मिशन ने इन दोनों राष्ट्रों के इतिहास, कला एवं संस्कृति पर अपना अमिट प्रभाव छोड़ा है। उन्होंने कहा कि थेसोलोनिका के इन सन्तों की पुण्य तिथी पूर्वी यूरोप के देशों में छोड़ी गई सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक धरोहर पर मनन-चिन्तन का सुअवसर है।

सन्त पापा ने कहा कि चेक एवं स्लोवाक गणतंत्रों का इतिहास सिखाता है कि ख्रीस्तीय धर्म सदैव आपके राष्ट्रों के लिये आशा एवं शक्ति का स्रोत बना है, विशेष रूप से, दमनचक्र के काल में। उन्होंने स्मरण दिलाया कि सन्त सिरिल एवं सन्त मथेयुस के कार्यों के परिणास्वरूप ही बाईबिल धर्मग्रन्थ का अनुवाद प्राचीन स्लावी भाषा में हो सका तथा स्लावी देशों को लोग प्रभु ख्रीस्त के सुसमाचार के प्रकाश से आलोकित हो सके।   

सुसमाचार से भलाई खोज

सन्त पापा ने कहा कि सुसमाचार विभिन्न स्थानीय संस्कृतियों को कमज़ोर नहीं करता बल्कि उनमें व्याप्त अच्छाईयों को अभिव्यक्त करता है। उन्होंने कहा कि सुसमाचार लोगों एवं समुदायों को सत्य, सौन्दर्य एवं भलाई की खोज हेतु अनुप्राणित करता है।

सन्त पापा ने कहा कि चेक एवं स्लोवाक गणतंत्रों के नागरिकों के प्रतिनिधि होने के नाते सासंदों का आह्वान किया जाता है कि वे अपनी सांस्कृतिक अस्मिता एवं सुसमाचार के बीच व्याप्त घनिष्ठ सम्बन्ध की खोज करें तथा अपनी ख्रीस्तीय जडों का पुनर्मूल्यांकन करें जिससे परस्पर स्वीकृति, आपसी सम्मान और एकात्मता से परिपूर्ण समाज का निर्माण कर विकास की दिशा में अग्रसर हो सकें। 

22 March 2019, 12:06