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रविवारीय देवदूत प्रार्थना में संत पापा रविवारीय देवदूत प्रार्थना में संत पापा 

ईश्वरीय करुणा का गलत फायदा न उठायें, संत पापा

संत पापा फ्राँसिस ने 24 मार्च के रविवारीय देवदूत प्रार्थना के पूर्व दिये गये अपने संदेश में ख्रीस्तीय विश्वासियों को मन परिवर्तन हेतु आहृवान किया।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार 25 मार्च 2019 (रेई): संत पापा फ्राँसिस ने 24 मार्च को, संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में देवदूत प्रार्थना हेतु जमा हुए हज़ारों विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को  संबोधित करते हुए कहा, प्रिय भाई और बहनो, सुप्रभात।

चालीसा के तीसरे रविवार का सुसमाचार हमें ईश्वर की दयालुता और हमारे परिवर्तन की बात कहता है। येसु एक फलहीन वृक्ष की चर्चा करते हैं। एक व्यक्ति ने अपनी दाखबारी में एक अंजीर का वृक्ष लगाया था और वह बड़े विश्वास के साथ हर गर्मी के मौसम में फल की खोज हेतु उस वृक्ष के पास जाता है लेकिन उसे कोई फल प्राप्त नहीं होता क्योंकि वृक्ष अपने में फलहीन है। फल की तलाश में तीन साल से निराश वह व्यक्ति उस वृक्ष को काटने की सोचता है। वह माली को बुलाकर अपनी असुष्टि व्यक्त करता और उसे काटने का निर्देश देता है जिससे वह भूमि को व्यर्थ में घेरे न रहे। लेकिन माली दाखबारी के मालिक से धैर्य में बने रहने का आग्रह करता और एक साल की मोहलत मांगता है जिसके दौरान वह उस वृक्ष की अच्छी तरह देखभाल करने का आश्वासन दिलाता है जिससे वह फल उत्पन्न करे। यह एक दृष्टांन है। इसका अर्थ हमारे लिए क्या हैॽ इस दृष्टांत के चरित्र हमारा ध्यान किसकी ओर करते हैंॽ

येसु हमारे लिए याचना करते हैं

संत पापा ने कहा कि दाखबारी का मालिक हमारा ध्यान ईश्वर की ओर करता है और बागवान स्वयं येसु ख्रीस्त हैं जबकि अंजीर का पेड़ उदासीन मानवता का प्रतीक है। येसु ख्रीस्त मानव जाति के लिए ईश्वर पिता से सदैव याचना करते हैं-वे उन्हें थोड़ा इंतजार करने को कहते और अपने लिए कुछ समय की मांग करते हैं, जिससे प्रेम और न्याय का फल उत्पन्न हो सके। दाखबारी का मालिक अंजीर के पेड़ को काटना चाहता है जो हमारा ध्यान उसकी फलहीनता की ओर करता जिसमें कोई अच्छाई नहीं दिखाई देती है। यह हमें वृक्ष का स्वयं अपने लिए जीने की बात ब्यां करता है जहाँ हम उसे अपनी पूर्णतः, शांति, आराम में जीवन यापन करते देखते हैं, जो दूसरो की ओर ध्यान नहीं देता जो उनके निकट रहते हैं जो अपने में दुःख, गरीबी और असुविधा की स्थिति में पड़े हैं। स्वार्थ के इस मनोभाव और आध्यात्मिक सुखेपन की स्थिति को माली अपने प्रेम से सिंचित करते हैं जो दाखबारी के मालिक को इंतजार करने और धैर्य में बने रहने हेतु आग्रह करता है क्योंकि माली अंजीर के वृक्ष की सेवा में अपना समय देता है। वह दाखबारी के स्वामी से प्रतिज्ञा करता है कि वह उस शुष्क पेड़ की विशेष देख-रेख करेगा।

ईश्वर हमारे परिवर्तन की प्रतीक्षा करते हैं

बागवान का यह कार्य ईश्वर की करूणा को व्यक्त करता है जो हमें अपने में परिवर्तन लाने हेतु एक समय प्रदान करता है। संत पापा ने कहा कि हम सभों को अपने में परिर्वतन लाने की जरुरत है जहाँ हम अपनी ओर से ईश्वर की ओर एक कदम बढ़ाने हेतु बुलाये जाते हैं क्योंकि ईश्वर धैर्य और करुणा में हमारे साथ चलते हैं। हमारी फलहीनता के बावजूद ईश्वर हमारे साथ धैर्य से पेश आते हैं जिससे हम अपने में परिवर्तन लाते हुए अच्छाई के मार्ग में अग्रसर हो सकें। माली द्वारा समय की मांग और मोहलत दिया जाना इस बात की ओर हमारा ध्यान आकृष्ट कराता है कि हमें अपने में परिवर्तन लाने की आवश्यकता है। माली स्वामी से कहता है, “इस साल रहने दीजिए।” परिवर्तन की संभावना अपने में असीमित नहीं है अतः यह आवश्यक है कि हमें इसका फायदा उठाना है नहीं तो यह अपने में हमेशा के लिए समाप्त हो जायेगा। संत पापा ने कहा, “हम सबों को इस चालीसा के समय में यह पूछने की जरुरत है कि मुझे ईश्वर के निकट आने हेतु क्या करना चाहिए। उन बातों को जो मेरे जीवन में अच्छी नहीं हैं उन्हें अपने से “दूर” करने हेतु मुझे क्या करने की आवश्यकता हैॽ “नहीं, नहीं मैं आने वाले चालीसा का इंतजार करूंगा।” लेकिन क्या आप आने वाले चालीसा तक जीवित रहेंगे। हम सब इस बात पर विचार करें, “ईश्वर की करूणा जो मेरा इंतजार करती, जो मेरे पापों से मुझे मुक्त करती, मुझे क्या करने का आहृवान करती हैॽ मैं क्या करूंॽ हम सभी ईश्वर की करूणा में अपने को आश्रित रख सकते हैं लेकिन हम इसका दुरूपयोग न करें। हम अपनी आध्यात्मिक सुस्तीपन को न्यायसंगत घोषित न करें लेकिन हम अपनी निष्ठा में ईश्वरीय करुणा का उत्तर ईमानदारी पूर्ण हृदय से दें। चालीसा के इस काल में ईश्वर हमें अपने जीवन को बदले हेतु बुलाते हैं। हम इस बुलावे को चुनौती पूर्ण ढ़ग से लें और अपने जीवन की कुछ चीजों में, हमारे सोचने विचारने, कार्य करने और दूसरों से अपने संबंध में परिवर्तन लायें। साथ ही हम ईश्वर के धैर्य का अनुकरण करें जो हम सभों की योग्यता पर विश्वास करते हैं, हम सभों में अपनी जीवन यात्रा को पुनः “शुरू करने” की योग्यता है। ईश्वर वे पिता हैं जो कमजोर दीयों को नहीं बुझाते लेकिन वे उनकी चिंता करते और उनके साथ चलते हैं जिससे वे अपने जीवन में मजबूत होते हुए समुदायों के लिए प्रेम की खुशी ला सकें। माता मरियम हमारी पास्का की तैयारी हेतु इस अवधि में हमारी मदद करें जिससे हम ईश्वर की कृपा हेतु अपने को खुला रखें जिससे उनकी कारुणा पर विश्वास हमारे आध्यात्मिक जीवन में नवीनता ला सके।

इतना कहने के बाद संत पापा फ्रांसिस ने सभों के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया और सभों को अपने प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया। 

25 March 2019, 14:47