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  द्वितीय दिन की प्रेस विज्ञप्ति में संत पापा द्वितीय दिन की प्रेस विज्ञप्ति में संत पापा 

नाबालिकों की सुरक्षाः द्वितीय दिन की प्रेस विज्ञप्ति

“कलीसिया में नाबालिकों की सुरक्षा” हेतु चल रहे धर्माध्यक्षों की सम्मेलन के दूसरे दिन की विषयवस्तु “उत्तरदायित्व” रही जहाँ कार्डिनल कपिच और कार्डिनल ओ'मेल्ली ने अपने साक्ष्य प्रस्तुत किये।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

प्रेस विज्ञप्ति की शुरूआत सभा के संचालक येसु समाजी फादर फेदरिको लोम्बार्दी के टिप्पणी से शुरू हुई जहाँ उन्होंने “कलीसिया में नाबालिकों की सुरक्षा” सम्मेलन के माहौल को “सकारात्मक, रचनात्मक, उपयोगी और आवश्यक बतलाया।

उन्होंने वाटिकन और मार्ता सैंटोस पेस, "बच्चों के खिलाफ हिंसा" पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव के विशेष प्रतिनिधि के बीच सहयोग की बात का जिक्र किया। संयुक्त राष्ट्रों के इस कार्यालय ने अपने कार्यों का हवाला देते हुए बच्चों की सुरक्षा हेतु किये गये प्रयास के आकड़ें प्रस्तुत किये जिसकी प्रति शुक्रवार को वाटिकन में उपस्थिति सभी धर्माध्यक्षों को उपलब्ध करायी गई।

फादर लोम्बर्दी ने सम्मेलन के प्रथम दिन संत पापा फ्रांसिस द्वारा “कलीसिया में नाबालिकों की सुरक्षा” हेतु चिंतन के लिए प्रस्तावित “21 विन्दुओं” की चर्चा की जो धर्माध्यक्षों के छोटे समुदायों में वाद-विवाद और विचार मंथन की आधारशिला बन रही है यह संत पापा की मांग अनुरूप ठोस कदम लेने में निर्णयक सिद्ध होगा। 

द्वितीय दिन की सभा का संक्षेपण

वाटिकन संचार विभाग के अधिकारी पॉलो रूफीनी ने गुरूवार को छोटे समुहों में हुए विचारों और कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया। यह धर्माध्यक्षों का एक साथ मिलकर कार्य करने की चर्चा करता है जिससे यौन शोषण को अपराध के रुप में चिन्हित किया जा सके चाहे वह किसी भी विशिष्ट देश और संस्कृति का क्यों न हो। शुक्रवार सुबह की सभा में यह बात उभर कर आई कि नाबालिकों की सुरक्षा हेतु नियमों और दिश निर्देशों के प्रति कलीसिया के समर्पण से दुनिया के कई हिस्सों में यौन शोषण की संख्या में कमी आई है। यद्यपि, इस बात पर जोर दिया गया कि लौंगिता के बारे में चर्चा निषेधात्मक नहीं जिसे गुरूकुल में प्रशिक्षण का अंग बनाया जाये।

गुरूवार को छोटे दलों में हुए विचार मंथन में कई विषयों पर जिक्र किया गया, लेकिन उनमें मुख्य रुप से इस विषय पर बल दिया गया कि यौन शोषण के शिकार हुओं को प्राथमिकता दिया जाये जिससे उस चक्र को तोड़ा जा सकें जहाँ शोषण के शिकार अपने को शोषक बना लेते हैं। इस मुद्दे पर छोटी कलीसियाओं को मिलकर सहायता देने पर भी विचार किया गया। 

शोषण के शिकारों पर ध्यान

कार्डिनल सीन पैट्रिक ओ'मेलली, बोस्टन महाधर्माप्रांत के महाधर्माध्यक्ष ने प्रेस विज्ञप्ति में इस बात पर जोर दिया कि नाबालिकों की सुरक्षा पर बल देने से “महत्वपूर्ण और कोई भी विषय नहीं” है। उन्होंने यौन शोषण के शिकार लोगों पर ध्यान देने पर बल दिया। “जब हम उनसे मिलते और उनकी बातों को सुनते केवल तब कलीसिया के अधिकारियों को पता चलता है कि उनका जीवन कितना टूटा है।” उन्होंने इसी रोकथाम हेतु “कार्य योजना” पर बल देते हुए शिकागो को महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल ब्लेज़ कपिच द्वारा प्रस्तुत किये गये “ठोस विचारों” की सराहना की।

कार्डिनल ब्लेज़ कपिच ने अपनी ओर से कहा कि यौन शोषितों से मिलना हमें अपने को “क्रेन्दित रहने” में मदद करता है। हर कहानी अपने में अभूतपूर्व है। कर्डिनल ने कहा कि घटनाओं के विषय में धर्माध्यक्षों और धर्मप्रान्त की ओर से जिम्मेदारी लेना हमें अपने में विभाजित करता है। एक स्थान की घटना हर एक को, प्रत्येक जगह को प्रभावित करती है। उन्होंने “योजना” के महत्व के अलावे इस बात पर बल दिया कि संत पापा इस मुद्दे पर “ठोस कदम और परिणाम” की चाह रखते हैं।

लोकधर्मियों का सहभागिता

प्रेस विज्ञप्ति के दौरान माल्टा के महाधर्माध्यक्ष चार्ल्स सिसलुना ने कार्डिनल ग्रेशियस के वक्तव्य में उपयोग किया गये “ कोलेजियालिटी” को दुहराया। उन्होंने कहा कि धर्माध्यक्षों के रुप में हम विश्व  की कलीसियाके सेवा हेतु बुलाये गये हैं,“हम अपने लोगों के प्रएति उत्तरयादी है।” उन्होंने नाबालिकों की सुरक्षा के संबंध में लोकधर्मियों की सहभागिता के बारे में कहा, “लोकधर्मियों की सहभागिता इस संदर्भ में “एक विकल्प, अतिरिक्त बात” नहीं है। लोकधर्मी कलीसिया की भलाई हेतु एक मूलभूत अंग हैं, क्योंकि हम एक साथ मिलकर चल रहें हैं।” 

23 February 2019, 10:13