Cerca

Vatican News
देवदूत प्रार्थना करते पोप फ्राँसिस देवदूत प्रार्थना करते पोप फ्राँसिस   (ANSA)

संत पापा ने देवमूर्तियों की पूजा के खिलाफ चेतावनी दी

आज का सुसमाचार पाठ (लूक. 6: 17-20-26) जो संत लूकस रचित सुसमाचार से लिया गया है, धन्यताओं को प्रस्तुत करता है। पाठ में चार आशीर्वचन एवं चार चेतावनियाँ हैं। चेतावनी देने के लिए उन्होंने "धिक्कार" शब्द का प्रयोग किया है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार, 18 फरवरी 2019 (रेई)˸ वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 17 फरवरी को, संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया। देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, अति प्रिय भाइयो एवं बहनो सुप्रभात।

आज का सुसमाचार पाठ (लूक. 6: 17-20-26)  जो संत लूकस रचित सुसमाचार से लिया गया है, धन्यताओं को प्रस्तुत करता है। पाठ में चार आशीर्वचन एवं चार चेतावनियाँ हैं। चेतावनी देने के लिए उन्होंने "धिक्कार" शब्द का प्रयोग किया है। इन कड़े शब्दों द्वारा येसु हमारी नजरों को खोलते हैं तथा अपनी निगाहों से सीमा के परे, सतह के भीतर देखने तथा परिस्थितियों को विश्वास के अनुसार परखने की शिक्षा देते हैं।   

येसु ने गरीब, भूखे, अपमान एवं अत्याचार के शिकार लोगों को धन्य घोषित किया तथा धनी, तृप्त, आनन्द मनाने वाले एवं प्रशंसा पाने वालों को धिक्कारा। इस विरोधाभासी परमानंद का कारण है कि जो लोग पीड़ित हैं ईश्वर उनके करीब हैं और वे उन्हें उस दुःख की गुलामी से मुक्त करेंगे। येसु इस सच्चाई को देख लेते हैं। दूसरी ओर येसु उन लोगों को धिक्कारते हैं जिन्हें किसी चीज की कमी नहीं है। येसु उन्हें स्वार्थ के खतरनाक धोखे से सचेत करना चाहते हैं तथा उनके सामने प्रेम के तर्क को खोलना चाहते हैं।

मूर्ति पूजा का खतरा   

संत पापा ने कहा कि आज का सुसमाचार पाठ हमें निमंत्रण देता है कि हम विश्वास के गहरे अर्थ पर चिंतन करें, जिसका अर्थ है पूर्ण रूप से प्रभु पर भरोसा रखना। यह सांसारिकता रूपी देवमूर्तियों को तोड़ना तथा जीवित एवं सच्चे ईश्वर के लिए हृदय खोलना है। केवल वे ही हमारे जीवन को पूर्णता प्रदान कर सकते हैं।

संत पापा ने आधुनिक युग की देवमूर्तियों की ओर ध्यान खींचते हुए कहा, "आज भी कई लोग हैं जो अपने आपको सुख प्रदान करने वाले के रूप में प्रकट करते हैं, अपने आपको शीघ्र सफलता और बड़ा लाभ प्रदान करने वाले बतलाते हैं, समस्याओं का समाधान जादू मंतर से करने की बात करते हैं।" संत पापा ने कहा कि यदि हम यहाँ ईश्वर के स्थान पर उन लोगों पर भरोसा रखने लगते हैं हम प्रथम आज्ञा के विरूद्ध देवमूर्तियों की पूजा करने के प्रलोभन में आसानी से पड़ सकते हैं। देवमूर्ति और देवमूर्तियों की पूजा किसी दूसरे युग की बातों के समान लगती हैं किन्तु वास्तव में, वे हर युग में पाये जाते हैं, और आज भी हम उन्हें देख सकते हैं।

संसाधनों को भाई-बहनों के बीच बांटें

यही कारण है कि येसु हमारी आखों को सच्चाई के लिए खोलते हैं। हम आनन्द प्राप्त करने एवं धन्य बनने के लिए बुलाये गये हैं और यह तभी संभव है जब हम अपने को ईश्वर करीब रखते, उनके राज्य के करीब, उस स्थान पर जो अल्पकालिक नहीं बल्कि अनन्त काल तक बना रहने वाला है। हम आनन्दित हो सकते हैं यदि हम ईश्वर के सामने जरूरतमंद महसूस करते हैं। यह अत्यन्त महत्वपूर्ण है। हमें उनसे प्रार्थना करना है, "प्रभु, मुझे इसकी आवश्यकता है।" ईश्वर के सामने दरिद्र महसूस करते हुए, हम उनके समान और उनके साथ गरीब, पीड़ित और भूखे लोगों के नजदीक आते हैं। हम भी ईश्वर के सामने गरीब, पीड़ित और भूखें हैं। हम भी इस दुनिया के साधनों को प्राप्त कर हर समय खुश रह सकते हैं किन्तु हम उन्हें अपनी देवमूर्ति न बनाये क्योंकि इसके द्वारा हम अपनी आत्मा को खो देंगे। हम उन संसाधनों को भाई-बहनों के बीच बांटें।

आशीर्वचन एक महत्वपूर्ण संदेश

संत पापा ने चिंतन करने हेतु प्रेरित करते हुए कहा कि आज की धर्मविधि हमें आत्मजाँच करने एवं अपने हृदय में सच्चाई को जगह देने का आह्वान करती है।     

उन्होंने कहा कि येसु का आशीर्वचन एक महत्वपूर्ण संदेश है जो प्रोत्साहन देता है कि हम भौतिक वस्तुओं एवं नश्वर चीजों पर भरोसा न रखें, आनन्द की खोज करने के लिए मौत का सौदा करने वालों का अनुसरण न करें, जो माया के जाल में फंसाना अच्छी तरह जानते हैं। वे हमें उम्मीद दिलाने में भी सक्षम होते हैं।

प्रभु हमें अपनी आँखों को खोलने में मदद करें, ताकि हम सच्चाई को और अच्छी तरह देख सकें, सांसारिक मनोभाव के दृष्टिदोष से चंगाई पा सकें। इन विरोधाभासी शब्दों से येसु हमें जगाते तथा यह पहचानने में मदद देते हैं कि हमें क्या सचमुच धनी बनाता, संतोष प्रदान करता और आनन्द एवं सम्मान प्रदान करता है। संक्षेप में, यही हमारे जीवन को अर्थ और पूर्णता प्रदान करता है।

कुँवारी मरियम सुसमाचार को खुले मन-हृदय से सुनने में मदद दे

संत पापा ने माता मरियम से प्रार्थना की कि धन्य कुँवारी मरियम हमें इस सुसमाचार पाठ को खुले मन और हृदय से सुनने हेतु सहायता दे ताकि यह हमारे जीवन में फल उत्पन्न करे तथा उस आनन्द का साक्षी बने जो कभी निराश नहीं करता क्योंकि प्रभु हमें निराश कभी होने नहीं देते हैं।   

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

18 February 2019, 14:22