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सन्त पापा फ्राँसिस तथा अल अज़हर के ईमाम सन्त पापा फ्राँसिस तथा अल अज़हर के ईमाम   (ANSA)

अमीरात के नेताओं से मुलाकात, मानव भ्रातृत्व घोषणा पर हस्ताक्षर

संयुक्त अरब अमीरात में सोमवार को सन्त पापा फ्राँसिस ने अमीरात के नेताओं से मुलाकत की तथा, एक हज़ार वर्षों से सुन्नी मुसलमानों की पीठ रही, मिस्र स्थित अल अज़हर के प्रधान ईमाम शेख अहमद एल तायेब के साथ "मानव भ्रातृत्व" सम्बन्धी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किये।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

आबू धाबी, मंगलवार, 5 फरवरी 2019 (रेई, वाटिकन रेडियो): संयुक्त अरब अमीरात में सोमवार को सन्त पापा फ्राँसिस ने अमीरात के नेताओं से मुलाकत की तथा, एक हज़ार वर्षों से सुन्नी मुसलमानों की पीठ रही, मिस्र स्थित अल अज़हर के प्रधान ईमाम शेख अहमद एल तायेब के साथ "मानव भ्रातृत्व" सम्बन्धी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किये.  

विश्वव्यापी काथलिक कलीसिया के परमधर्मगुरु सन्त पापा फ्राँसिस रविवार को संयुक्त अरब अमीरात की तीन दिवसीय प्रेरितिक यात्रा के लिये रोम से रवाना हुए थे. 03 से 05 फरवरी तक निर्धारित सन्त पापा फ्राँसिस की यह यात्रा इटली से बाहर उनकी 27 वीं तथा संयुक्त अरब अमीरात में पहली यात्रा है.

ईमामों, मुफ्तियों, रब्बियों एवं स्वामियों के साथ

संयुक्त अरब अमीरात के आबू धाबी में मुसलमान बुजुर्गों की समिति की पीठ है जो एक स्वतंत्र संगठन है जिसका उद्देश्य इस्लामिक समुदायों में शान्ति को बढ़ावा देना है. यूएई के क्राऊन प्रिंस सहित सैकड़ों ईमामों, मुफ्तियों, रब्बियों एवं स्वामियों ने सोमवार को सम्पन्न अन्तरधार्मिक सभा में भाग लिया. धार्मिक नेताओं से सन्त पापा फ्राँसिस ने आग्रह किया कि वे युद्ध की दयनीय क्रूरता का बहिष्कार कर सीमाओं पर दीवार उठाने तथा उनपर सशस्त्र बल तैनात करने की तर्कणा से बचें. सन्त पापा ने कहा, "ईश्वर उन लोगों के साथ होते हैं जो शान्ति की तलाश में रहा करते हैं."     

800 वर्षों पूर्व असीसी के सन्त फ्राँसिस ने मिस्र के सुल्तान से मुलाकात की थी. उस घटना के बाद से पहली बार मुसलमान जगत के साथ भाईचारे तथा अन्तरधार्मिक सम्वाद को बढ़ावा देने के लिये सन्त पापा फ्राँसिस ने 03 से 05 फरवरी तक संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा की है. विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में मर्मान्धता और कट्टरपंथ की लहर के विरुद्ध सहिष्णुता एवं समझदारी को प्रोत्साहन प्रदान करना भी उनकी प्रेरितिक यात्रा का लक्ष्य रहा है.

"मानव भ्रातृत्व" पर आधारित दस्तावेज़

सोमवार को आबू धाबी में सन्त पापा फ्राँसिस तथा अल अज़हर के प्रधान ईमाम अहमद-एल-तायेब ने शान्ति, स्वतंत्रता तथा मानवाधिकारों सम्बन्धी एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किये जिसमें दोनों नेताओं ने आतंकवाद एवं हिंसा की भर्त्सना करते हुए कहा है, "ईश्वर नहीं चाहते कि उनका नाम लोगों को आतंकित करने के लिए इस्तेमाल किया जाए ".  

"विश्व शांति और सहअस्तित्व हेतु मानव भाईचारा" शीर्षक से, सन्त पापा फ्राँसिस एवं अल अज़हर के प्रधान ईमाम द्वारा, हस्ताक्षरित दस्तावेज़ केवल ख्रीस्तीय एवं इस्लाम धर्मों के बीच सम्बन्धों के लिये ही मील का एक पत्थर नहीं है बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर भी एक शक्तिशाली एवं प्रभावशाली संदेश का प्रतिनिधित्व करता है.

दस्तावेज़ के प्राक्कथन में यह पुष्ट करने के उपरान्त कि "विश्वास, विश्वासी को अन्य में भाई एवं बहन के दर्शन कराता है जिन्हें सहारे और प्यार की ज़रूरत रहा करती है", कहा गया कि यह ईश्वर में तथा मानव बिरादरी में विश्वास करनेवाले प्रत्येक व्यक्ति को आमंत्रित करता है कि वह एकता के सूत्र में बन्ध कर न्याय एवं शान्ति निर्माण हेतु काम करे. 

"ईश्वर के नाम पर जिसने सभी मनुष्यों का अधिकारों, कर्तव्यों और सम्मान के साथ सृजन किया", "निर्दोष मानव जीवन के नाम पर जिसे मारने से ईश्वर ने मना किया है", "गरीबों के नाम पर", "अनाथ, विधवा, शरणार्शी , निर्वासित ... और युद्धों से पीड़ित "और" उत्पीड़ित "लोगों के नाम पर उक्त दस्तावेज़ की शुरुआत की गई है. कहा गया कि काथलिक कलीसिया और अल अज़हर एकसाथ मिलकर “संवाद की संस्कृति को अपनाने, आचार संहिता के रूप में आपसी सहयोग को बढ़ावा देने तथा विधि और मानक के रूप में पारस्परिक समझ” के मार्ग पर अग्रसर होने की घोषणा करते हैं.

 

05 February 2019, 11:46