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रोगियों से मुलाकात करते संत पापा रोगियों से मुलाकात करते संत पापा  (ANSA)

विश्व रोगी दिवस पर उदारता की संस्कृति हेतु संत पापा का आह्वान

विश्व रोगी दिवस पर उदारता की संस्कृति हेतु संत पापा का आह्वान 27वें विश्व रोगी दिवस के उपलक्ष्य में प्रकाशित संदेश में संत पापा फ्राँसिस ने विश्वासियों से अपील की है कि वे उदारता की संस्कृति को बढ़ावा दें।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 8 जनवरी 2019 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने विश्व रोगी दिवस के उपलक्ष्य में प्रकाशित संदेश में कहा है कि जो लोग रोगियों की देखभाल करते हैं तथा उनके लिए उदारता पूर्वक अपने आपको समर्पित करते हैं जैसा कि कलकत्ता की संत मदर तेरेसा ने किया, वे कलीसिया के सबसे विश्वसनीय प्रचारक हैं।

विश्व रोगी दिवस 11 फरवरी को मनाया जाता है। अपने संदेश में संत पापा ने शिष्यों को कहे येसु के शब्दों पर प्रकाश डालते हुए कहा है, "तुम्हें मुफ्त में मिला है मुफ्त में दे दो।" (मती. 10:8)

दान

चूँकि जीवन ईश्वर से मिला एक दान है और उसे एक व्यक्ति की सम्पति नहीं मानी जा सकती। रोगियों की सेवा के लिए व्यावसायिकता, कोमलता, सरलता एवं सीधे व्यवहार को उन्हें मुफ्त में दिये जाने की आवश्यकता है जिससे कि रोगी प्रेम किया गया महसूस कर सके।    

संत पापा ने कहा कि नष्ट करने एवं उदासीनता की संस्कृति के बीच "दान" आज के व्यक्तिवाद और सामाजिक विखंडन को चुनौती देने के लिए सबसे उपयुक्त साधन है साथ ही साथ, लोगों और संस्कृतियों के बीच नए संबंधों और सहयोग के साधनों को बढ़ावा देना है। दान का अर्थ साधारण उपहार भेंट करने से बढ़कर है। इसका अर्थ है अपने आपको दे देना तथा एक संबंध स्थापित करना।

"दान" ईश्वर के प्रेम का प्रतिबिम्ब है जिसकी पराकाष्ठा पुत्र का शरीर धारण है तथा पवित्र आत्मा को प्रदान करना है।

संत पापा ने वार्ता को भी दान का आधार बतलाया। उन्होंने कहा कि यह मानव विकास एवं समाज में स्थापित शक्ति के तरीकों को तोड़ने में सक्षम विकास की सम्भवनाएँ उत्पन्न करता है।

प्रत्येक को देखभाल की आवश्यकता

इस बात पर गौर करते हुए कि सभी गरीब, कमजोर और निःसहाय हैं, जन्म के समय व्यक्ति को माता-पिता के सहारे की आवश्यकता है तथा जीवन के हर चरण में दूसरों के सहयोग की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि अपनी कमजोरियों को खुलकर स्वीकार करना हमें विनम्र बनाता तथा एकात्मता को एक महत्वपूर्ण सदगुण के रूप में अभ्यास करने हेतु प्रेरित करता है।

अच्छाइयों को बढ़ावा देने हेतु विश्वासियों से अपील करते हुए संत पापा ने कहा कि "यदि हम अपने आपको दुनिया से अलग नहीं देखते हैं किन्तु दूसरों के साथ भाईचारा पूर्ण संबंध स्थापित करते हैं तभी केवल हम सार्वजनिक भलाई के उद्देश्य से एकजुट एक सामाजिक जीवनशैली विकसित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी को भी खुद को जरूरतमंद समझने या दूसरों पर भरोसा करने से डरना नहीं चाहिए, क्योंकि व्यक्तिगत रूप से और अपने प्रयास मात्र से हम अपनी सीमाओं को पार नहीं कर सकते। हमें अपनी कमजोरियों को स्वीकार करने से नहीं घबराना चाहिए क्योंकि स्वयं ईश्वर येसु में विनम्र बनाकर हमारे बीच आये और हमारी लाचारी में आज भी हमारे पास आते हैं तथा हमारी उम्मीद से अधिक कृपा प्रदान करते हैं।

संत मदर तेरेसा

संत पापा जोन पौल द्वितीय ने सन् 1993 को लूर्द की माता मरियम के पर्व दिवस को विश्व रोगी दिवस घोषित किया था। इस साल इस दिवस को भारत के कलकत्ता में मनाया जाएगा। संत पापा फ्रांसिस ने कलकत्ता की संत मदर तेरेसा की छवि को उदारता के आदर्श के रूप में ऊंचा कर दिया है, जिन्होंने गरीबों और बीमार लोगों की सेवा को ईश्वर का प्रेम माना।

कार्डिनल पैट्रिक डी रोजारियो कलकत्ता में विश्व रोगी दिवस हेतु संत पापा के विशेषदूत

संत पापा ने कहा, "जीवन के हर क्षेत्र में, वे ईश्वर की करूणा की उदार वितरक थी। उन्होंने स्वागत करने एवं मानव जीवन की रक्षा करने के द्वारा, अजन्मे, परित्यक्त एवं बहिष्कृत सभी लोगों के लिए अपने आपको उपलब्ध किया। वे उन लोगों के सामने झुक गयीं, जिन्हें मरने के लिए रास्ते के किनारे छोड़ दिया गया था। उन्होंने उनमें ईश्वर प्रदत्त प्रतिष्ठा देखी।"    

स्वयंसेवक

संत पापा ने अपने संदेश में उन स्वयंसेवकों की भी सराहना की जो उदारता पूर्वक अपनी सेवा देते हैं। वे स्वास्थ्य सेवा देने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं तथा भले समारितानी की आध्यात्मिकता को स्पष्ट रूप से प्रकट करते हैं। संत पापा ने उन संगठनों के प्रति आभार प्रकट किया जो स्वयं सेवकों के द्वारा चलाये जाते हैं, खासकर, स्वास्थ्य के क्षेत्र में जो रोगियों के अधिकारों को बढ़ावा देते, जागरूका लाते एवं रोकथाम को प्रोत्साहित करते हैं।    

यह देखते हुए कि अनगिनत व्यक्ति जो बीमार हैं, अकेले हैं, बुजुर्ग हैं या दिमाग अथवा शरीर में इन सेवाओं से लाभ उठाते हैं उन्होंने उनसे अपील की कि वे इस विश्व में कलीसिया की उपस्थिति का चिन्ह बनना जारी रखें। स्वयंसेवकों का कार्य मूल्यों, व्यवहारों और उदार होने की गहरी इच्छा से पैदा होता है। यह स्वास्थ्य देखभाल को अधिक मानवीय बनाने का एक साधन भी है।

काथलिक स्वास्थ्य संस्थाएँ

संत पापा ने काथलिक स्वास्थ्य संस्थाओं को उनकी सेवाओं के लिए धन्यवाद दिया तथा कहा कि वे अपने आपको देने, उदारता एवं एकात्मकता का उदाहरण प्रस्तुत करने के लिए बुलाये गये हैं। उन्होंने उन्हें चेतावनी दी कि वे व्यवसाय चलाने के जाल में न फंसें।

उन्होंने कहा, " स्वास्थ्य, संबंधपरक है, दूसरों के साथ बातचीत पर निर्भर है तथा इसके लिए विश्वास, मित्रता एवं एकजुटता की आवश्यकता है। यह एक ऐसा खजाना है जिसे बांटे जाने पर ही इसका पूरा आनंद लिया जा सकता है। उदार दान की खुशी एक ख्रीस्तीय के स्वास्थ्य का एक बैरोमीटर है।"

अंततः संत पापा ने संदेश में सभी से अपील की कि हम हर स्तर पर उदारता एवं दान करने की संस्कृति को बढ़ावा दें जो फायदा उठाने और कचरे की संस्कृति पर काबू पाने के लिए अपरिहार्य है।

08 January 2019, 18:05