खोज

Vatican News
मेट्रो पार्क में मिस्सा अर्पित करते हुए संत पापा मेट्रो पार्क में मिस्सा अर्पित करते हुए संत पापा 

येसु ने ईश्वर के आज को प्रकट किया, संत पापा फ्राँसिस

येसु ने ईश्वर के आज को प्रकट किया। येसु आज हमें “दरिद्रों को सुसमाचार सुनाने, बंदियों को मुक्ति का और अंधों को दृष्टिदान का संदेश सुनाने”के लिए बुलाते हैं। हमारा ईश्वर आज का ईश्वर है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

पनामा सिटी, सोमवार 28 जनवरी 2019 (वाटिकन न्यूज) : संत पापा फ्राँसिस ने 34वीं विश्व युवा दिवस के चौथे दिन रविवार 27 जनवरी को पनामा सिटी के मेट्रो पार्क स्थित संत जॉन पाल द्वितीय को समर्पित मैदान में करीब सात लाख युवाओं के साथ पवित्र युखरीस्तीय समारोह का अनुष्ठान किया।

संत पापा ने अपने प्रवचन में संत लूकस के सुसमाचार से लिए गये उस पाठ पर चिंतन किया जहाँ येसु प्रार्थना करने सभागृह गये और वहाँ उसे इसायस की पुस्तक दी गई। येसु ने उस पाठ को पढ़ा जहाँ लिखा हैः प्रभु का आत्मा मुझ पर छाया रहता है... वर्ष घोषित करुँ। पुस्तक वापस देने के बाद येसु अपने स्थान पर बैठ गये। सभागृह में सबकी आंखें येसु पर टिकी हुई थी। येसु ने कहा “धर्मग्रंथ का यह कथन आज तुमलोगों के सामने पूरा हो गया है। (लूकस, 4:20-21).

संत पापा ने कहा कि येसु ने धर्मग्रंथ के भविष्यवाणी को यथार्थ और वर्तमान में ला दिया। येसु अपने ही स्थान में जहाँ उन्होंने अपना बचपन बिताया, दूसरों के साथ शिक्षा ग्रहण की थी, उनके सामने आज उन्होंने अपने लिए ईश्वर की योजना को प्रकट किया। 

कल नहीं लेकिन आज

संत पापा ने कहा कि येसु ने ईश्वर के आज को प्रकट किया। येसु आज हमें “दरिद्रों को सुसमाचार सुनाने, बंदियों को मुक्ति का और अंधों को दृष्टिदान के संदेश सुनाने” के लिए बुलाते हैं। हमारा ईश्वर आज का ईश्वर है। वे येसु बनकर हमारे पास इस धरती में आये ताकि हम उनको छू सकें, उनका अनुभव कर सकें। अपने आप को प्रकट करने के लिए ईश्वर किसी अच्छे समय का इन्तजार नहीं करते। यह “आज”  ईश्वर का समय है, जो हर स्थिति और जगह को सही और उचित बनाता है। येसु में, प्रतिज्ञा किया हुआ भविष्य शुरू होता है और जीवन बन जाता है।

संत पापा ने कहा कि सभागृह में जितनों ने येसु की बातें सुनी, सभी उसकी बातों पर विश्वास करने को तैयार नहीं थे। किसी ने प्रश्न किया, तो किसी ने उसकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया। यही बात आज भी हमारे साथ होती है। हम ईश्वर को अपने दैनिक जीवन में अपने पड़ोस या मित्रों के बीच देख नहीं पाते हैं। ईश्वर के ठोस प्यार को हमें अपनों के माध्यम से स्वीकार करना कठिन लगता है। हम ईश्वर को अपने से कहीं दूर उँचाईयों में रखते हैं और दूर से ही उसके प्रेम को पाने की आशा करते हैं और यह हमारे लिए आरामदायक भी लगता है।

"इस बीच" में नहीं लेकिन आज

 संत पापा ने युवाओं को संबोधित कर कहा, “प्रिय युवाओ, जब आप अपने मिशन, बुलाहट और भावी जीवन के बारे सोचते हैं तो आपको लगता है अभी काफी समय है आगे भविश्य में सोचा जाएगा। जैसे कि युवा होना एक तरह का प्रतीक्षा कक्ष है, जहाँ हम बुलाए जाने तक बैठे रहते हैं। और "इस बीच" में, हम वयस्क या आप अपने आप को बिना परिणाम के, किसी सुरक्षित भविष्य की कल्पना करते हैं, जहां सब कुछ सुरक्षित और अच्छी तरह से बीमा किया हुआ है। इसलिए हम आपको "शांत" करते हैं, आपको चुप रहने और कोई भी सवाल पूछने से मना करते हैं। उस "इस बीच" में आपके सपने साकार होने के बदले टूटने लगते है। आप में नीरसता और पीड़ा हावी होना शुरु करता है। ऐसा केवल इस लिए होता है क्योंकि हम सोचते हैं, या आप सोचते हैं, कि आपका “अभी” नहीं आया है और आप भविष्य के बारे में सपने देखने और काम करने के लिए बहुत छोटे हैं।

"इस बीच" में नहीं लेकिन अभी

संत पापा फ्राँसिस ने पिछले साल के युवाओं पर धर्माध्यक्षों के धर्मसभा का संदर्भ देते हुए कहा कि इस धर्मसभा में हमें यह महसूस करने में मदद मिली कि "हमें एक दूसरे की ज़रूरत है", कि हमें "कल के लिए सपने देखना और काम करने" के लिए प्रोत्साहन देना आज से शुरू करना है। उन्होंने कहा, "कल नहीं, लेकिन अभी", "आप यह एहसास करें कि आपका एक मिशन है और इसमें अपने आप को प्यार से समर्पित करें। हमारे पास सब कुछ हो सकता है, लेकिन अगर हमारे पास समर्पण और प्यार की कमी है, तो हमारे पास कुछ भी नहीं होगा"।

संत पापा ने कहा कि येसु कोई "इस बीच" नहीं है, लेकिन दयालु प्रेमी हैं, जो हमारे दिलों में प्रवेश करना चाहते हैं और हमारा दिल जीतना चाहते हैं। वे हमारा खज़ाना बनना चाहते हैं, क्योंकि वे "इस बीच" या जीवन में एक अंतराल नहीं हैं, वे अपने प्रेम को उदारतापूर्वक देने के लिए हमें आमंत्रित करते हैं। प्रभु का प्रेम हमारे लिए ठोस और वास्तविक है प्रभु और उनका मिशन हमारे जीवन में "इस बीच" या अस्थायी नहीं है, परंतु वे हमारे जीवन हैं। हम ईश्वर के “अभी” हैं।

संत पापा ने प्रवचन के अंत में कहा कि माता मरियम ने ईश्वर में विश्वास किया। अपने मिशन के प्रति पूरी तरह से और प्रेम से समर्पित रहीं। माता मरियम के “हाँ” ने ईश्वर की योजना को “अभी” में साकार कर दिया।

संत पापा ने कहा कि नाजरेथ के सभागृह में येसु अपने परिजनों के बीच खड़े हो गये थे, आज प्रभु हाथों में किताब लिए हमारे बीच खड़े हैं और कहते हैं, “धर्मग्रंथ का यह कथन आज तुमलोगों के सामने पूरा हो गया है। (लूक, 4:21) संत पापा ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा,“  क्या आप अपने प्यार को व्यावहारिक तरीके से जीना चाहते हैं? हो सकता है कि आपका "हाँ" दुनिया के लिए और कलीसिया के लिए एक नया पेंतेकोस्त देने हेतु पवित्र आत्मा का प्रवेश द्वार बने।”

28 January 2019, 14:58