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01 जनवरी की देवदूत प्रार्थना में आशीष देते संत पापा 01 जनवरी की देवदूत प्रार्थना में आशीष देते संत पापा  (AFP or licensors)

मरियम पुत्र येसु हमारी आशीष

संत पापा फ्रांसिस ने नये साल 01 जनवरी को देवदूत प्रार्थना के दौरान सभों पर आशीष की कामना कीं।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार 31 दिसम्बर 2018 (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने नववर्ष 01 जनवारी को संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में देवदूत प्रार्थना हेतु जमा हुए हज़ारों विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को  संबोधित करते हुए कहा, प्रिय भाई और बहनो, सुप्रभात  और सभों को खुश नया साल।

आज, ख्रीस्त जंयती के आठ दिन बाद हम ईश्वर की पवित्र माता का त्योहार मनाते हैं। बेतलेहेम के चरवाहों के समान हम उनकी ओर अपनी नजरें उठाते हुए उनकी बाहों में बालक येसु को देखते हैं जिन्हें वह गोद में ली हुई हैं। इस भांति वे हमें येसु को दिखलाती हैं जो कि दुनिया के मुक्तिदाता हैं। वे हमारी माता हैं जो हमें अपनी आशीष प्रदान करती हैं। वे साल के शुरू में हम प्रत्येक जन को अपने जीवन के मार्ग में आशीष एवं कृपाओं से भर देती हैं जैसे कि हम ईश्वर को अपने जीवन में अच्छाई के रुप में ग्रहण करते हैं जो येसु ख्रीस्त के रुप में इस दुनिया में आये।

ईश्वर की आशीष

वास्तव में, यह ईश्वर की कृपा है जो हमारे जीवन की सभी बातों और चीजों को मूल्यवान बनाती है। आज की धर्मविधि हमें इस्रराएल के पुरोहितों द्वारा उस प्राचीन आशीष की याद दिलाती है जिसे उन्होंने लोगों को दिया। यह हमें कहता है, “ईश्वर आपको आशीष दें। ईश्वर आपको लोगों पर प्रसन्न हो और आप पर दया करें। ईश्वर आप लोगों पर दया दृष्टि करें और आप आप को शांति प्रदान करें।”  (गण.6. 24-26)

संत पापा ने कहा कि पुरोहित उपस्थित लोगों की ओर अपना हाथ फैलाते हुए तीन बार ईश्वर का नाम घोषित करते हैं। वास्तव में, धर्मग्रंथ बाईबल में हम ईश्वर के नाम की घोषणा में उस वास्तविकता को पाते हैं जिसके द्वारा लोगों, परिवारों और समुदाय को ईश्वर की ओर से प्रवाहित होने वाली शक्ति, आशीष और कृपाएँ दी जाती हैं।

इस आशीष की प्रार्थना में ईश्वर के नाम की घोषणा तीन बार की गई है। पुरोहित ईश्वर का नाम लेते हुए अपनी आशीष की प्रार्थना में “ईश्वर का मुखमंडल आप पर चमके” और “आप को सुरक्षित रखें”  कहते हुए करूणा और शांति की आशीष प्रदान करते हैं।

हम धर्मग्रंथ के अनुसार जानते हैं कि ईश्वर का मुखमंडल मानव की पहुंच से परे है, ईश्वर के दर्शन कर कोई अपने में जीवित नहीं रह सकता है। यह अभिव्यक्ति हमारे लिए ईश्वर के सर्वश्रेष्ठता को घोषित करती है, ईश्वर के अनंत महिमा का बखान करती है। लेकिन ईश्वर की महिमा हमारे लिए उनका प्रेम है जिसे हम सूर्य की तरह दिव्यमान पाते हैं जिसकी ओर नजरें नहीं फेरी जा सकती हैं। वे हममें से प्रत्येक जन को अपनी विशेष कृपा रुपी ज्योति से आलोकित करते हैं जिसके फलस्वरुप हम अपने जीवन में ज्योतिमय बनते हैं।

“समय पूरा होने पर” (गला.4.4) ईश्वर ने अपने को मानव स्वरुप येसु ख्रीस्त में प्रकट किया जो “एक कुंवारी से जन्म” लिये। यहाँ हम आज के समारोह की ओर अभिमुख करता है जहाँ से हमने शरूआत की थी, माता मरियम ईश्वर की पवित्र माता जो हमें अपने बेटे येसु ख्रीस्त, दुनिया के मुक्तिदाता को दिखलाती हैं। वे सारी मानव जाति के लिए, हमसे प्रत्येक जन के लिए एक आशीष हैं। वे हमारे लिए आशीष, करूणा और शांति के स्रोत हैं।

शांति हेतु हमारा उत्तरदायित्व

संत पापा ने कहा कि यही कारण है कि संत पापा पौल छःवें ने इस बात की चाह रखी कि पहली जनवरी विश्व शांति दिवस के रुप में मनाया जाये, जिसे आज हम 52वें शांति दिवस के रुप में मनाते हैं जिसकी विषयवस्तु है, “अच्छी राजनीति शांति की सेवा” है। हम अपने में यह न सोचें की राजनीति केवल राजनायिकों के लिए है वरन हममें से हर कोई अपने जीवन के “शहर” हेतु उत्तरदायी है जो जनसामान्य की भलाई है। राजनीति भी अपने में तब तक अच्छी है जब हम में से प्रत्येक जन अपनी ओर से शांति सेवा हेतु अपना सहयोग देते हैं। माता मरियम हमारे प्रतिदिन के इस निष्ठापूर्ण कार्य में सहायता करें।

इतना कहने का बाद संत पापा फ्रांसिस ने सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासियों के संग मिलकर देवदूत प्रार्थना का पाठ किया और सभों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।

01 January 2019, 15:07