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सन्त पापा फ्राँसिस पुरोहितों से मिलते हुए सन्त पापा फ्राँसिस पुरोहितों से मिलते हुए   (ANSA)

समर्पण का लक्ष्य व्यक्तिगत लाभ न हो, सन्त पापा फ्राँसिस

सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा है कि बलिदान और समर्पण का लक्ष्य व्यक्तिगत लाभ कभी नहीं होना चाहिये। गुरुवार को मेरसेडेरियन धर्मसमाज के पुरोहितों ने अपने धर्मसमाज की आठवीं शताब्दी के उपलक्ष्य में सन्त पापा फ्राँसिस का साक्षात्कार कर उनका सन्देश सुना। मेरसेडेरियन धर्मसमाज दया की माँ धन्य कुँवारी मरियम को समर्पित धर्मसमाज है जिसकी स्थापना सन् 1218 ई. में हुई थी।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 7 दिसम्बर 2018 (रेई, वाटिकन रेडियो): सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा है कि बलिदान और समर्पण का लक्ष्य व्यक्तिगत लाभ कभी नहीं होना चाहिये. गुरुवार को मेरसेडेरियन धर्मसमाज के पुरोहितों ने अपने धर्मसमाज की आठवीं शताब्दी के उपलक्ष्य में सन्त पापा फ्राँसिस का साक्षात्कार कर उनका सन्देश सुना. मरसेडेरियन धर्मसमाज दया की माँ धन्य कुँवारी मरियम को समर्पित धर्मसमाज है जिसकी स्थापना सन् 1218 ई. में हुई थी.

प्रभु येसु ख्रीस्त का अनुसरण

सन्त पापा ने धर्मसमाजी पुरोहितों को स्मरण दिलाया कि प्रभु येसु का अनुसरण करने का अर्थ है आत्माओं के उद्धार के लिये अपना जीवन अर्पित करना. उन्होंने कहा, “प्रभु येसु का अनुसरण करना पद्धति का प्रश्न नहीं है अपितु अपनी जीवन आकाँक्षाओं से आगे येसु को रखना है ताकि हम उनके पदचिन्हों पर चलकर अपने व्यक्तिगत एवं सामुदायिक जीवन मार्ग को सुनिश्चित कर सकें.”

उन्होंने कहा, जो ख्रीस्त का अनुसरण करते हैं वे जीवन समर्पित कर ऐसा करते हैं और यह हमें धर्मसमाजी जीवन के केन्द्रीय सत्य का बोध कराता है. सन्त पापा ने कहा "ईश्वर पर बिलाशर्त भरोसा करना अपने आप को समर्पित करना है और जीवन का समर्पण वैकल्पिक नहीं है, अपितु उस हृदय का परिणाम है जिसने ईशप्रेम से स्पर्श का अनुभव पाया है."

प्रलोभन में न पड़ें

पुरोहितों से सन्त पापा ने कहा, "मेरा आपसे निवेदन है कि आप अपने बलिदान, समर्पण और सेवा को व्यक्तिगत लाभ के लिये किया गया व्यय समझने के प्रलोभन में न पड़े. इसके बजाय सुसमाचार के आनन्द को जीते हुए अपने बलिदान एवं समपर्ण को ईश्वर एवं मनुष्यों की सेवा का साधन बनायें. "

सन्त पापा ने कहा, "इतिहास के अन्य युगों के सदृश आज ख्रीस्तानुयायी त्रिमुखी शत्रु का सामना कर रहा है जो हैं, संसार और देह का मायामोह तथा शैतान." हालांकि प्रायः इन्हें छिपाने का प्रयास किया जाता है इनके परिणाम स्पष्ट हैं; सन्त पापा कहते हैं, "वे अन्तःकरण को जड़ीभूत अथवा सुन्न कर देते और आध्यात्मिक पक्षाघात का कारण बनते हैं जोरिक मृत्यु की ओर ले जाता है."

मुक्ति के सन्देशवाहक बनें

धर्मसमाजी पुरोहितों को सन्त पापा ने परामर्श दिया कि अपने संस्थापक के पद चिन्हों पर चलकर वे अपने अन्तर में प्रभु ख्रीस्त द्वारा अर्जित मुक्ति का अनुभव करें ताकि अपने भाइयों को उद्धारकर्ता ईश्वर की खोज हेतु प्रेरित कर सकें. वे अपनी प्रेरिताई द्वारा क़ैदियों, शरणार्थियों एवं आप्रवासियों की सहायता करें जो प्रायः मानव तस्करी एवं शोषण के शिकार बनते हैं. अन्ततः, वे "स्वतंत्रता, आनन्द और आशा के साधन बनने से कभी नहीं थकें."

07 December 2018, 11:45