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Pope meets with the Citadel of Peace Association Pope meets with the Citadel of Peace Association   (Vatican Media)

शांति सबकी जिम्मेदारी है, संत पापा फ्राँसिस

संत पापा फ्राँसिस चितादेल के शांति संगठन के सदस्यों से मुलाकात कर संघर्ष समाधान के क्षेत्र में उनके कामों की सराहना की और संयुक्त राष्ट्र की अपील का समर्थन किया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार, 3 दिसम्बर 2018 (रेई): संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 3 दिसम्बर को वाटिकन के क्लेमेंटीन सभागार में चितादेल के शांति संगठन की स्थापना के 20वीं सालगिरह के अवसर पर करीब 350 प्रतिनिधियों से मुलाकात की।

संघर्ष में परिवर्तन और शांति निर्माण

संत पापा ने उनकी सराहना करते हुए कहा कि इन 20 वर्षों के दौरान उन्होंने संघर्ष में परिवर्तन करने का एक सक्षम तरीका विकसित किया, जिससे युवाओं को दंगों से बाहर लाया गया और उन्हें पूर्ण आध्यात्मिक, नैतिक, सांस्कृतिक और नागरिक विकास के लिए अपने लोगों के पास वापस भेज दिया गया : उदार युवा लोग, पिछली पीढ़ियों की असफलताओं के बोझ के साथ पैदा हुए थे।

संत पापा ने कहा, युवाओं के प्रति समर्पण का चुनाव करके, "आप न्याय और प्रेम के काम के रूप में गरीबी से लड़ने और शांति बनाने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं। यह एक ऐसी क्रिया है जो आशा को पोषित करती है और मनुष्य में खासकर युवा लोगों में भरोसा करती है।"

शांति अपील

संत पापा ने चितादेल के शांति संगठन की अपील पर चर्चा की जिसे मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा की 70वीं वर्षगांठ के अवसर पर 10 दिसंबर को संयुक्त राष्ट्र संघ को प्रस्तुत किया जाएगा।

संत पापा फ्राँसिस ने कहा, "एक युवा फिलिस्तीनी और एक युवा इस्राएली को सुनकर दुनिया की सरकारों को एक कदम उठाने के लिए कहा जा सकता है जो भविष्य को फिर से खोल सकता हैः वह है, रक्षा के बजट से हथियार की लागत को शिक्षा के बजट में स्थानांतरित कर शांति निर्माण हेतु लोगों को तैयार करना। यह एक दुर्लभ और सुंदर चीज़ है! आप लोगों के प्रति मेरा पूरा समर्थन, सहानुभूति और आशीर्वाद है।"

संत पापा ने कहा, "आपकी अपील", "एक ठोस दृष्टिकोण को प्रस्तावित करती है। राज्य और सरकार के प्रमुखों को भी इसका समर्थन करना चाहिए।"

शांति नेताओं की भूमिका

संत पापा ने रेखांकित किया कि शांति नेता, "वे राजनेता नहीं हैं जो एक दूसरे से बातचीत करने और सामना करने के बारे में नहीं जानते: एक नेता जो 'दुश्मन' से मिलने का प्रयास नहीं करता है, जैसा कि आप करते हैं।  उसके साथ बैठ कर शांति की ओर अपने लोगों का नेतृत्व नहीं कर सकते। ऐसा करने के लिए हमें अहंकार की नहीं, पर विनम्रता की आवश्यकता होती है। "शांति हर किसी की ज़िम्मेदारी है।"

03 December 2018, 16:48