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माता मरियम की प्रतिमा माता मरियम की प्रतिमा  (2011)

मरियम का मंदिर में समर्पण, संत पापा का ट्वीट संदेश

संत पापा फ्राँसिस ने मरियम के समर्पण के पर्व पर प्रार्थना करते हुए एक ट्वीट प्रेषित किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार, 21 नवम्बर 2018 (रेई)˸ 21 नवम्बर को काथलिक कलीसिया माता मरियम के मंदिर में समर्पण का पर्व मनाती है। कहा जाता है कि जब मरियम तीन साल की थी तब उनके माता-पिता अन्ना एवं ज्वाकिम ने उन्हें मंदिर में ईश्वर को समर्पित किया था। यह समर्पण अन्ना द्वारा ईश्वर से की गयी प्रतिज्ञा को पूरा करने के लिए था जिसको उन्होंने संतान रहित होने के कारण ईश्वर से संतान की प्राप्ति के लिए किया था। इसका जिक्र सुसमाचारक जेम्स करते हैं। यद्यपि ऐतिहासिक रूप से इसे प्रमाणित नहीं किया जा सकता कि मरियम के समर्पण का ईशशास्त्रीय महत्व है। यह बल देता है कि मरियम के जीवन में शुरू से ही पवित्रता थी जो जीवन भर बनी रही। उन्होंने ईश्वर की सेवा में अपना सम्पूर्ण जीवन अर्पित किया।

संत पापा फ्राँसिस ने मरियम के समर्पण के पर्व पर प्रार्थना करते हुए एक ट्वीट प्रेषित किया, "माता मरियम हमें  सेवा के रास्ते पर सहर्ष येसु का अनुसरण करने में सहायता दे, एक शाही रास्ता, जो हमें स्वर्ग की ओर ले चलता है।"

विश्व मत्स्य दिवस

आज के दिन को विश्व मत्स्य दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। संत पापा ने मछुवारों के लिए प्रार्थना करते हुए एक दूसरा ट्वीट संदेश प्रेषित किया। उन्होंने संदेश में लिखा, "चूँकि आज विश्व मत्स्य दिवस है, हम सभी मछुवारों के लिए प्रार्थना करें तथा मत्स्य उद्योग में जबरन मजदूरी एवं मानव तस्करी को रोकने हेतु वैश्विक प्रतिबद्धता का समर्थन दें।"

विश्व मत्स्य दिवस की स्थापना भारत की नई दिल्ली में 21 नवम्बर 1997 को की गयी थी जब पहली बार 32 देशों के मछुआरे और छोटे पैमाने पर मछली पालन श्रमिकों के प्रतिनिधि एक अंतरराष्ट्रीय मछली पालन संगठन बनाने के लिए इकट्ठे हुए थे और वैश्विक सतत् मछली उत्पादन की नीतियों, प्रथाओं और सामाजिक न्याय का समर्थन करने के लिए खुद को प्रतिबद्ध किया था।

21 November 2018, 15:06