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जोवानी लातेरान परमधर्मपीठीय महाविद्यालय जोवानी लातेरान परमधर्मपीठीय महाविद्यालय  

परमधर्मपीठीय महाविद्यालय को शांति प्रचार हेतु प्रोत्साहन

संत पापा फांसिस ने जोवानी लातेरान परमधर्मपीठीय महाविद्यालय की शैक्षणिक सत्र की शुरूआत पर कार्डिनल अंजेलो दे दोलातिस के नाम अपना संदेश भेजा।

दिपील संजय एक्का-वाटिकन सिटी

संत पापा ने कहा कि मानव समाज में शांति स्थापना के प्रयास पर कलीसिया प्रयत्नशील है जिससे मानव समाज को युद्ध औऱ सभी प्रकार के खतरों से सुरक्षित रखा जा सके। वर्तमान परिवेश में कलीसिया सुसमाचार के संदेशानुसार देशों और राष्ट्रों के बीच वार्ता के माध्यम शांति कामय हेतु प्रयत्नशील है। यह अपनी ओर से घृणा, स्वार्थ औऱ व्यक्तिगत प्रथामिकता,शक्तिशाली होने का चाह औऱ कमजोरों को दमन करने की प्रवृति को खत्म करने का प्रयास कर रही है।

संत पापा ने कहा कि एक शैक्षणिक संस्था के रुप में यह हमें न केवल दुनिया को सुनने और समझने वरन देशभक्ति के गुणों को जाने और उन्हें अपने में आत्मसात् करने हेतु मदद करे जिससे हम हिंसा और विध्वंस के प्रसार को रोक सकें। आपसी समझौता के उपाय, परिवर्ती न्याय के रूप, स्थायी विकास की गारंटी, पर्यावरण का संरक्षण और सृजन कुछ ऐसे मसले हैं जो विवादों के शांतिपूर्ण समाधान हेतु मार्ग प्रशस्त करती,  ख्यातिवाद और प्रमुख पदों में होने के मिथ्या को तोड़ती और समर्पित लोगों को प्रशिक्षित करने में सक्षम होती है।

दुनिया में कलीसिया का बुलावा शांति, एकात्मकता, मानव अधिकारों, जीवन और पयार्वरण की सुरक्षा को बढ़ावा देने हेतु है। (प्रेरितिक प्रबोधन एवंजलियुम गौदियुम 65) वाटिकन अपने कार्यों और संस्थानों के माध्यम युद्धग्रस्त स्थितियों में शांतिपूर्ण तरीके से एक मध्यस्थ बनते हुए मानव के मौलिक अधिकारों को बढ़ावा प्रदान कर रही है।

इन उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु महाविद्यालय एक केन्द्रीय भूमिका निभाती है जिसे हम मानवतावाद के समग्र स्थल के रुप में पाते हैं। हमें निरंतर इसे नवीकृत औऱ समृद्ध बनाने की जरुरत है जिससे यह वर्तमान परिस्थिति की मांगों पर खरा उतर सके। यह चुनौती कलीसिया के परमधर्मपीठीय महाविद्लायों को एक साथ मिलकर कार्य करने हेतु चुनौती प्रदान करती है जहाँ हम ख्रीस्त के सुसमाचार के अनुरुप विश्व के लिए नमक और दीपक बनते हैं। इसका अर्थ हमारे लिए यह नहीं कि हम हमारे संस्थानों के उद्देश्य और उनकी स्थापित परपरांओं में परिवर्तन लायें लेकिन यह हमें अपने में प्रेरितिक कलीसिया का निर्माण करने का आहृवान करती है। हम अपने समकालीन विश्व की चुनौतियों का सामना नयी पीढियों को संबोधित करते हुए भाषा की अनुकूलता से कर सकते हैं। संत पापा ने कहा कि कलीसिया औऱ मानव समाज में ईश्वर के वचनों को स्थापित करने की चुनौती आज हमारे सामने है। यह हमें भयमुक्त होकर ईश्वर के वचनों को प्रसारित करने की मांग करता है।

अतः देशभक्ति के गुणों को अपने में समाहित करने का उद्देश्य और अपने कार्यों को वैज्ञानिक पद्धति से करना जो रोम के धर्माध्यक्ष के विशिष्ट प्ररिताई में सहभागिता है मैं परमधर्मपीठीय महाविद्लायों को शांति के विज्ञान की प्रशिक्षण पर बल देता हूँ।

संत पापा ने कार्डिलन को नये विषय के प्रशिक्षण का कार्यभार सौंपते हुए इस बात के प्रति अपनी आशा जताई कि शांति का विज्ञान हमें विश्व में शांति स्थापना हेतु धर्मसमाजियों और लोकधर्मियों को तैयार करेगा। उन्होंने कहा कि मैं आशा करता हूँ पूरी लातेरान महाविद्यालय समुदाय, शिक्षकमंडली, विद्यार्थीगण शांति की संस्कृति हेतु बीज बोने को सक्षम होंगे। यह कार्य सुनने, व्यावसायिक बनने, समर्पण औऱ सदैव अपनी नम्रता में बने रहते हुए सदैव तैयार रहने में पूरी होती है। 

12 November 2018, 16:44