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देवदूत प्रार्थना करते पोप फ्राँसिस देवदूत प्रार्थना करते पोप फ्राँसिस   (ANSA)

प्रभु से मुलाकात हेतु हम अपने साथ क्या ले जायेंगे?

इस रविवार के सुसमाचार पाठ में (मार. 13:24-32) प्रभु अपने शिष्यों को भावी घटनाओं के बारे निर्देश देना चाहते हैं। उनका यह उपदेश मुख्य रूप से दुनिया के अंत के बारे में नहीं बल्कि वर्तमान में अच्छी तरह जीने का निमंत्रण है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार, 19 नवम्बर 2018 (रेई)˸ वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 18 नवम्बर को, संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

इस रविवार के सुसमाचार पाठ में (मार. 13:24-32) प्रभु अपने शिष्यों को भावी घटनाओं के बारे निर्देश देना चाहते हैं। उनका यह उपदेश मुख्य रूप से दुनिया के अंत के बारे में नहीं बल्कि वर्तमान में अच्छी तरह जीने का निमंत्रण है। जागते रहने तथा अपने जीवन का हिसाब देने के लिए तैयार रहने का निमंत्रण है। येसु कहते हैं, "उन दिनों के संकट के बाद सूर्य अंधकारमय हो जाएगा, चंद्रमा प्रकाश नहीं देगा, तारे आकाश से गिर जायेंगे और आकाश की शक्तियाँ विचलित हो जायेंगी।" (पद.24-25)

सृष्टि की कहानी

संत पापा ने कहा, "ये शब्द हमें उत्पति ग्रंथ के प्रथम पृष्ठ पर चिंतन करने हेतु प्रेरित करते हैं, सृष्टि की कहानी पर। सूर्य, चंद्रमा और तारे जो आरम्भ से ही व्यवस्थित रूप से चमकते तथा रोशनी प्रदान करते हैं वे जीवन के प्रतीक हैं, यहाँ उनके क्षय तथा अंधकार हो जाने एवं उनमें गड़बड़ी उत्पन्न हो जाने की बात कही गयी है जो अंत का चिन्ह है। फिर भी, अंतिम दिन जो प्रकाश चमकेगा वह अनोखा और नया होगा। यह प्रभु का प्रकाश होगा जो संतों के साथ अपनी पूरी महिमा में आयेंगे। उस मुलाकात में हम उनके चेहरे को तृत्वमय ईश्वर के पूर्ण प्रकाश में देखेंगे। उनका चेहरा प्रेम से प्रतिबिम्बित होगा और जिसके सामने हर मनुष्य की पूर्ण सच्चाई प्रकट हो जायेगी।"

मानव का इतिहास

मानव का इतिहास, हर व्यक्ति के इतिहास की तरह अर्थहीन शब्दों एवं वास्तविकताओं से समझा नहीं जा सकता, न ही इसे एक भाग्यवादी दृष्टि के प्रकाश में व्याख्या किया जा सकता है, मानो कि सब कुछ पहले से ही एक नियति के अनुसार स्थापित किया गया हो, जो स्वतंत्रता का स्थान ले लेता तथा हमें चुनाव करने नहीं देता है। बल्कि आज के समुसमाचार में येसु कहते हैं कि लोगों के इतिहास का अंत हो जायेगा तथा उनका एक मात्र लक्ष्य होगा प्रभु के साथ साक्षात्कार करना। हम नहीं जानते कि यह समय कब और कैसे आयेगा। प्रभु ने कहा है कि उस घड़ी के बारे कोई नहीं जानता न तो स्वर्गदूत और न ही मानव पुत्र। सब कुछ गुप्त रखा गया है और इसे सिर्फ पिता जानते हैं। हालाँकि हम एक आधारभूत सिद्धांत को जानते हैं जिसका सामना हमें करना है, "आकाश और पृथ्वी भले ही टल जाएँ तो टल जाएँ परन्तु मेरे शब्द नहीं टल सकते।"   (पद.31) सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उस दिन हम प्रत्येक को समझना होगा कि क्या ईश्वर के पुत्र के शब्द ने मेरे व्यक्तिगत जीवन को आलोकित किया अथवा क्या वह वापस उन्हीं की ओर लौट गया? या क्या मैंने अपने ही शब्दों पर भरोसा रखा। हमारे लिए वह अवसर सबसे महत्वपूर्ण गिना जाएगा जब हमने अपना त्याग कर, अपने आपको पिता के प्रेम एवं उनकी दया को समर्पित किया।  

चतुराई एवं धन का कोई मूल्य नहीं रह जाएगा

संत पापा ने कहा कि इस घड़ी से कोई नहीं बच सकता। हमने अपनी छवि को श्रेय देने के लिए जिस चतुराई को अपनाया था, वह अब कोई काम नहीं देगा। उसी तरह रूपये एवं आर्थिक साधन जिनसे हम सब कुछ को खरीदने की क्षमता रखते थे अब उनकी उपयोगिता समाप्त हो जाएगी। ईश्वर के वचन अनुसार जीने के अलावा अन्य कोई भी चीज हमारे साथ नहीं जाएगा। हमारे पास वे ही चीजें रह जायेंगी जिनको हमने दूसरों को दिया है।  

संत पापा ने माता मरियम से प्रार्थना करने का आह्वान करते हुए कहा, "हम धन्य कुँवारी मरियम से प्रार्थना करें कि पृथ्वी पर हमारा अस्थायित्व तथा हमारी सीमाएँ हमें चिंता में न डाले बल्कि हमें अपने प्रति, पड़ोसियों के प्रति एवं समस्त विश्व के प्रति हमारी जिम्मेदारियों को पूरा करने हेतु प्रेरित करे।"

इतना कहने के बाद संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

19 November 2018, 15:44