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संत पापा फ्राँसिस एवं संत पापा बेनेडिक्ट सोलहवें एक दूसरे से मुलाकात करते हुए संत पापा फ्राँसिस एवं संत पापा बेनेडिक्ट सोलहवें एक दूसरे से मुलाकात करते हुए  (ANSA)

रतजिंगर फाऊँडेशन संगोष्ठी को संत पापाओं का पत्र

"मौलिक अधिकार एवं अधिकारों के बीच संघर्ष" पर रोम में एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी को संत पापा फ्राँसिस एवं ससम्मान सेवानिवृत संत पापा बेनेडिक्ट सोलहवें ने पत्र भेजकर शुभकामनाएँ दीं। संगोष्ठी का आयोजन जोसेफ रतजिंगर फाऊँडेशन एवं लुमसा विश्वविद्यालय के संयुक्त पहल पर किया गया है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 15 नवम्बर 2018 (रेई) ˸ 15 और 16 नवम्बर को वाटिकन में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया है।

अधिकार विषय पर गहरे चिंतन की आवश्यकता, संत पापा फ्राँसिस

संत पापा फ्राँसिस ने जोसेफ रतजिंगर फाऊँडेशन के अध्यक्ष जेस्विट फादर फेदेरिको लोम्बारदी को प्रेषित एक पत्र में संगोष्ठी के प्रतिभागियों को कार्य के फलप्रद विकास की शुभकामनाएँ दी। उन्होंने रेखांकित किया कि संयुक्त राष्ट्रसंघ द्वारा मानव अधिकार की विश्वव्यापी घोषणा की 70वीं वर्षगाँठ के निकट आने पर, न केवल यादगारी मनाना उचित है किन्तु इसकी स्थिति तथा आज के विश्व में मानव अधिकार के दर्शन के विकास पर भी गहराई से चिंतन किया जाना है।

संत पापा ने गौर किया कि घोषणा का उद्देश्य समग्र मानव विकास को प्रोत्साहन देना है किन्तु समय अंतराल में कुछ अधिकारों की व्याख्या में बदलाव आ रहा है जिसमें एक-दूसरे के विरोध में भी नए अधिकार शामिल हो गये हैं, इस प्रकार कानून और इसकी नींव के विचार में बदलाव आ गया है।

संत पापा बेनेडिक्ट सोलहवें की शिक्षा से प्रेरणा

संत पापा ने याद किया कि संत पापा बेनेडिक्ट सोलहवें ने "एक विचारक और एक चरवाहे के रूप में अधिकृत रूप से हस्तक्षेप करके इस प्रश्न को आवश्यक माना था।" इस प्रकार संत पापा फ्राँसिस आशा करते हैं कि "उच्च स्तरीय शैक्षणिक संगोष्ठी, ससम्मान सेवानिवृत संत पापा के विचारों एवं धर्मशिक्षा से प्रेरणा लेकर, साहस के साथ अपना सहयोग दे सकेगी तथा समस्त मानव प्रतिष्ठा एवं उसके विकास की महत्वपूर्ण समस्या पर गहराई से प्रकाश डाल सकेगी।"

संत पापा बेनेडिक्ट 16वें, कानून के विचार के विनाश की जोखिम

ससम्मान सेवानिवृत संत पापा बेनेडिक्ट 16वें ने संगोष्ठी को लिखे अपने पत्र में कहा, "मैं इस पहल को असाधारण रूप से उपयोगी मानते हुए इसकी तत्काल सराहना करता हूँ। खासकर, यह इसलिए महत्वपूर्ण है कि इसमें अधिकारों के बहुलीकरण की समस्या तथा कानून के विचारों के विनाश की जोखिम का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाएगा।

संत पापा बेनेडिक्ट सोलहवें ने चिन्हित किया कि यह एक मौजूदा एवं आधारभूत सवाल है कि मानव परिवार के सहास्तित्व के आधार की रक्षा की जाए। उन्होंने प्रतिभागियों को अपने आध्यात्मिक सामीप्य का आश्वासन दिया तथा प्रार्थना की कि प्रभु उनके समर्पण पर आशीष प्रदान करे।

15 November 2018, 17:12