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मृत कार्डिनलों एवं धर्माध्यक्षों के लिए ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा मृत कार्डिनलों एवं धर्माध्यक्षों के लिए ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा   (AFP or licensors)

मृत कार्डिनलों एवं धर्माध्यक्षओं के लिए ख्रीस्तयाग

संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 3 नवम्बर को संत पेत्रुस महागिरजाघर में विगत साल परलोक सिधारे कार्डिनलों एवं धर्माध्यक्षों की आत्माओं की अनन्त शांति के लिए ख्रीस्तयाग अर्पित किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

प्रवचन में दस कुँवारियों के दृष्टांत पर चिंतन करते हुए संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि हम प्रत्येक के लिए जीवन, आगे बढ़ने हेतु एक लगातार निमंत्रण है, जन्म से लेकर मरण तक। उसी तरह सुसमाचार के प्रचारकों के लिए भी जीवन एक गति है, जिसमें हम एक घर से दूसरे घर तथा कलीसिया हमें सेवा के लिए जहाँ कहीं भेजती है हम वहीँ जाते हैं। इस प्रकार हम जीवन के अंत तक चलते ही रहते हैं।

जीवन का अर्थ

उन्होंने कहा कि सुसमाचार हमें दिखलाता है कि जीवन का अर्थ ही है लगातार चलते रहना। यह अपने दुल्हे से मुलाकात करने हेतु आगे बढ़ना है। येसु जो हमारे दुल्हे हैं उनके साथ मुलाकात करने के लिए, जिन्होंने कलीसिया से प्रेम किया तथा उसके लिए अपना जीवन अर्पित कर दिया है। वे ही हमारे जीवन को अर्थ एवं प्रेरणा प्रदान करते हैं। यही प्रेरणा सबकुछ को आलोकित करती तथा हमें आगे ले चलती है। जीवन की यात्रा उसके अंतिम लक्ष्य से प्रेरित होती है।

प्रेम में बढ़ने का समय

संत पापा ने कहा कि यदि हमारा जीवन अपने दुल्हे के साथ मुलाकात की एक यात्रा है तब यह समय हमारे लिए प्रेम में बढ़ने का समय है। जीवन का हरेक दिन विवाह भोज की तैयारी का समय है। हम अपने आप से पूछें-क्या मैं उस महान दिन की तैयारी कर पा रहा हूँ? संत पापा ने कहा कि हम अपनी प्रेरिताई की हर गतिविधि में अपने दुल्हे की आशा के तार को न तोड़ें। हम जो कुछ भी करें उसके केंद्र में प्रभु के लिए हमारे हृदय में प्रेम होना चाहिए।

यहाँ हम संत पौलुस के कथन की याद कर सकते हैं जिसको उन्होंने आज के दूसरे पाठ में कहा है, "हमारी आँखें दृश्य पर नहीं, बल्कि अदृश्य चीजों पर टिकी हुई हैं, क्योंकि हम जो चीजें देखते हैं, वे अल्पकालिक हैं। अनदेखी चीजें अनन्त काल तक बनी रहती है।" (2 कोर. 4:18)

जीवन में सबसे महत्वपूर्ण चीज

संत पापा ने कहा कि यह सच है महत्वपूर्ण चीजें हमारे लिए अदृश्य हैं। जीवन में सबसे महत्वपूर्ण चीज है दुल्हे की आवाज को सुनना। यह आवाज हर दिन आती है। सुसमाचार हमें स्मरण दिलाता है कि हमारे दुल्हे के इंतजार में न विवाह वस्त्र और न ही दीपक किन्तु तेल महत्वपूर्ण है। इस प्रकार तेल की पहली विशेषता है कि यह अधिक प्रभावशाली नहीं होता। यह छिपा रहता है फिर भी इसके बिना दीया नहीं जल सकता। इसका अर्थ है कि प्रभु की नजरों में बाह्य दिखावा नहीं बल्कि हृदय अधिक महत्वपूर्ण है। (1 सामु. 16:7)

सम्मान, सत्ता, दिखावा एवं यश सब बेकार

चीजें जिनके पीछे पूरी दुनिया भागती है सम्मान, सत्ता, दिखावा एवं यश सब कुछ समाप्त हो जाएगा। अतः स्वर्ग जाने की तैयारी हेतु दुनियावी माया मोह से विरक्ति अति आवश्यक है। हमें "सौन्दर्य-प्रसाधन की संस्कृति" को न कहने की जरूरत है क्योंकि यह हमें बाह्य रूप पर चिंता करने हेतु बाध्य करता है। बाह्य रूप जो समाप्त हो जाएगा उसकी चिंता करने की अपेक्षा हमें अपने हृदय तथा अंदर की रक्षा करने की आवश्यकता है यही ईश्वर की नजरों में मूल्यवान हैं।

सेवा के बिना जीवन व्यर्थ

तेल की दूसरी विशेषता है कि इसका अस्तित्व प्रयोग किये जाने के लिए है। जब यह जलता है तभी प्रकाश देता है। हमारा जीवन भी इसी तरह है जब यह सेवा में प्रयोग किया जाता है तभी चमकता है। जीवन का रहस्य है सेवा के लिए जीना। सेवा, हमारे अंतिम विवाह भोज के द्वार के लिए टिकट है। उस द्वार के अंदर हम उन चीजों को नहीं ले जा सकेंगे जिनको हमने अर्जित किया बल्कि उन्हीं चीजों को ले सकेंगे जिनको हमने दूसरों को दिया है। जीवन का अर्थ ईश्वर के प्रेम का प्रत्युत्तर देने में है। यह उत्तर सच्चे प्रेम, आत्मत्याग एवं सेवा से बना है। दूसरों की सेवा के लिए हमें कीमत चुकानी पड़ती है अपने आपको खर्च करना पड़ता है। संत पापा ने कहा कि हमारी प्रेरिताई में जिनका जीवन सेवा के लिए नहीं है वे जीने लायक नहीं हैं। जो अपने जीवन से बहुत अधिक प्रेम करते हैं वे उसे खो देंगे।

तैयारी का समय

तेल की तीसरी विशेषता है-तैयार रहना। तेल को तैयार रखना एवं अपने साथ लिया जाना चाहिए। प्रेम स्वतः होता है किन्तु यह बिना सोचे भी नहीं होता। पाँच कुँवारियाँ तैयार नहीं होने के कारण विवाह उत्सव से बाहर हो गयीं जो उनकी मूर्खता को दिखलाता है।

संत पापा ने कहा कि इसी स्थान पर और अभी ही तैयारी का समय है, हर दिन प्रेम में बढ़ना एवं उसे प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। संत पापा ने प्रार्थना का आह्वान किया कि हम प्रभु के साथ प्रथम प्रेम को नवीकृत कर पाने की कृपा के लिए प्रार्थना करें, अन्यथा हमारे जीवन की लौ बूझ जायेगी। प्रेम के बिना जीवन जीना एक बड़ा प्रलोभन है जिसके अभाव में हम एक खाली बरतन की तरह नष्ट हो जायेंगे।

03 November 2018, 16:18