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तृतीया अंतरराष्ट्रीय गायक मंडलियों का सम्मेलन के प्रतिभागियों से मुलाकात करते संत पापा तृतीया अंतरराष्ट्रीय गायक मंडलियों का सम्मेलन के प्रतिभागियों से मुलाकात करते संत पापा  (Vatican Media)

अंतरराष्ट्रीय गायक मंडलियों का सम्मेलन को संत पापा का संदेश

वाटिकन में तृतीया अंतरराष्ट्रीय गायक मंडलियों का सम्मेलन चल रहा है जिन्हें संत पापा ने सम्बोधित किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 24 नवम्बर 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 24 नवम्बर को वाटिकन स्थित पौल षष्ठम सभागार में तृतीया अंतरराष्ट्रीय गायक मंडलियों का सम्मेलन के 7000 प्रतिभागियों से मुलाकात की तथा कलीसिया में संगीत के महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्हें सम्बोधित कर संत पापा ने कहा, "आप जानते हैं कि कुछ दिनों पूर्व युवाओं पर धर्माध्यक्षीय धर्मसभा हुई थी जिसमें से एक खास मुद्दा था संगीत। संगीत का महत्व इसमें है कि यह वास्तविक एवं पर्यावरण के अनुकूल होता है जिसमें युवा तल्लीन हो जाते हैं। संगीत में भावनाओं को उत्तेजित करने और पहचान को आकार देने में सक्षम संस्कृति और भाषा होती है। संगीत की भाषा प्रेरितिक संसाधनों को भी प्रस्तुत करती है जो धर्मविधि एवं इसके नवीनीकरण को चुनौती देते हैं।"

संगीत सुसमाचार प्रचार के सच्चे माध्यम

उन्होंने कहा कि संगीत और गाने, सुसमाचार प्रचार के सच्चे माध्यम हैं यदि वे ईश वचन का गहरा साक्ष्य देते हैं जो लोगों के हृदयों का स्पर्श करता तथा संस्कारों के अनुष्ठान में मदद देता है, खासकर, यूखारिस्त, जिसमें वह व्यक्ति को स्वर्ग की सुन्दरता का एहसास कराता है। संत पापा ने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे समुदाय के जीवन के लिए महत्वपूर्ण इस प्रतिबद्धता को कभी न रोकें क्योंकि संगीत के द्वारा वे प्रत्येक व्यक्ति की भावनाओं को आवाज प्रदान करते हैं जो उनके हृदयों में है।

कलीसिया, लोगों के दुःख और आनन्द की हर घड़ियों में उनके साथ रहने के लिए बुलायी जाती है ताकि विश्वास में उनका साथ दे सके। कई बार संगीत एवं गाने लोगों के जीवन की इन घड़ियों को अनोखा बना देते हैं जिसको वे अपने जीवन के लिए एक बहुमूल्य अवसर के रूप में याद करते हैं।

वाटिकन द्वितीय महासभा में संगीत पर चर्चा

वाटिकन द्वितीय महासभा ने धर्मविधि के नवीनीकरण की आवश्यकता महसूस की थी जिसके कारण दोहराया गया था कि "कलीसिया की संगीत परंपरा अतुल्य विरासत है।" संत पापा ने वाटिकन द्वितीय महासभा का समर्थन करते हुए कहा कि इसके द्वारा विश्व के विभिन्न हिस्सों में फैले समुदायों की परम्परा जो उनकी संस्कृति में गहरी है एक सच्ची प्रार्थना बन जाती है। कलीसिया इस बात के प्रति सचेत है कि लोगों की अपनी संगीत परम्परा है। जिसके द्वारा वे अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हैं। इन संगीतों एवं गीतों के द्वारा प्रार्थना करने में मिलती है, इस तरह एक सच्चा अंतरराष्ट्रीय गायक मंडली का निर्माण होता है जिसके द्वारा पिता की महिमा एवं स्तुति एक तारतम्य से की जाती है।

यूखारिस्त समारोह में संगीत की भूमिका

उन्होंने कहा कि उनकी उपस्थिति जो अंतरराष्ट्रीयता को दर्शाती है, कलीसिया की सर्वभौमिकता एवं उसकी विविध परम्पराओं को समझने में मदद देती है। उनका संगीत खासकर, यूखारिस्त समारोह में स्पष्ट करता है कि हम एक शरीर हैं तथा एक ही आवाज में एक विश्वास को गाते हैं। यद्यपि हम अलग-अलग भाषाएँ बोलते हैं किन्तु हम जो गाते, विश्वास की अभिव्यक्ति करते एवं आशा करते हैं उसको सभी समझते हैं।  

समुदाय के अनुप्रेरक बनने की सलाह

संत पापा ने उन्हें अभिमान के प्रलोभन से बचने हेतु सचेत करते हुए कहा कि अध्ययन एवं तैयारी द्वारा वे मधुर संगीत तैयार करते हैं जो प्रार्थना एवं धर्मविधि समारोह में सहायता देता है किन्तु वे मुख्यपात्र बनने के प्रलोभन में न पड़ें क्योंकि यह उनके समर्पण पर हावी हो जाता तथा प्रार्थना में लोगों के सक्रिय सहभागिता को बाधा पहुँचाता है। उन्होंने उन्हें समुदाय के अनुप्रेरक बनने की सलाह दी तथा लोगों को गाने से वंचित नहीं करने बल्कि कलीसियाई एवं प्रार्थनामय समुदाय का साक्ष्य देने की सलाह दी।   

संत पापा ने सम्मेलन के प्रतिभागियों से कहा कि संगीत सुसमाचार को आज की दुनिया में अधिक प्रभावकारी बनाने हेतु एकता का माध्यम है, उस सुंदरता का माध्यम, जो अभी भी मोहक है जो पिता के प्यार पर भरोसा करके विश्वास करना संभव बनाता है। अंत में, संत पापा ने उन्हें प्रेरितिक आशीर्वाद दिया एवं संत सिसिलिया की मध्यस्थता द्वारा उनके लिए प्रार्थना की।

24 November 2018, 14:43