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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

कोई भी संस्थान मानव करुणा का स्थान नहीं ले सकती, संत पापा

रोगी को अपने भाई की तरह ध्यान देना और स्वस्थ होने के लिए रोगी के आत्मविश्वास को बढ़ाना चाहिए। संत पापा फ्राँसिस ने स्वास्थ्य प्रबंधन में नैतिकता पर चतुर्थ सेमिनार में भाग लेने आये 70 प्रतिभागियों से मुलाकात की। अपने संदेश में संत पापा ने स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और मरीजों के बीच गहन मानवता के आवश्यक बंधन के पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार,1 अक्टूबर 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 1 अक्टूबर को वाटिकन के सामान्य लोकसभा भवन में नैतिकता पर चतुर्थ सेमिनार में भाग लेने आये 70 प्रतिभागियों से मुलाकात की। संत पापा ने कहा कि अगर रोगी महसूस करे कि उसे दूसरे प्यार करते हैं तो उसपर सुखमय मृत्यु की नकारात्मक छाया नहीं पड़ेगी। रोगी को अपने भाई की तरह ध्यान देना और स्वस्थ होने के लिए रोगी के आत्मविश्वास को बढ़ाना चाहिए।

संत पापा ने अर्जेंटीना के  धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के स्वास्थ्य आयोग के अध्यक्ष, ला प्लाटा के सहायक धर्माध्यक्ष अल्बर्तो बोच्चेती और ‘कॉन्सेन्सो हेल्थ फाउंडेशन’ के अध्यक्ष क्रिस्टियन माज़ा को इस सेमिनार का आयोजन करने के लिए धन्यवाद दिया।  जीवन के लिए परमधर्मपीठीय अकादमी के नेतृत्व में यह सम्मेलन की आज वाटिकन में शुरु हुई और 5 अक्टूबर तक चलेगी।

संत पापा फ्राँसिस ने अपना संदेश 3 मुख्य शब्दों पर आधारित किया : चमत्कार, देखभाल और विश्वास। ये तीन शब्द ऐसी दुनिया में बहुत मूल्यवान हैं, जिसमें सामान्य रूप से स्वास्थ्य "और विशेष रूप से लैटिन अमेरिका, आर्थिक संकट से गुजर रहा है।"

हर चेहरे में एक भाई

पहले शब्द, 'चमत्कार' के संबंध में, संत पापा ने कहा, "संस्थानों के जिम्मेदार अधिकारी आप सही तरीके से हमें बता सकते हैं कि हम चमत्कार नहीं कर सकते"। उन्होंने कहा कि असंभव को करना, एक चमत्कार नहीं है। पर एक चमत्कार एक बीमार, असहाय व्यक्ति को अपने भाई के रुप में देखना ही चमत्कार है।

प्यार देने और प्राप्त करने का मूल्य

दूसरा शब्द: देखभाल। एक बीमार व्यक्ति को ठीक करने में केवल दवाइयों को दे देना काफी नहीं होता है। "हम जानते हैं कि जब कोई व्यक्ति जीवन के अंतिम दिनों में बीमार होता है, तो वह शांत होता है और दूसरों की निकटता का अनुभव करता है।" इन मुश्किल क्षणों में, सही देखभाल द्वारा प्यार, सम्मान और स्वीकृति को महसूस करता है।

किसी के हाथों में एक का जीवन

अंतिम शब्द 'विश्वास' है। संत पापा ने कहा कि बीमार व्यक्ति को सबसे पहलो खुद में विश्वास होना चाहिए तभी वह ठीक होगा। उसी प्रकार कार्यकर्ता, जो विश्वसनीय और शांत माहौल में काम करने में सक्षम होता है। एक दूसरे पर विश्वास करना बहुत महत्वपूर्ण है।

संत जॉन पॉल द्वितीय को उद्धृत करते हुए संत पापा फ्राँसिस ने कहा, ‘कोई भी मशीन मानवीय भावना और न ही मानव करुणा की बराबरी नहीं कर सकता’।" उन्होंने उपस्थित प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे जितना संभव हो उतना परिवारों को आशा और खुशी दें, और उन लोगों की देखभाल करें जिनके लिए दुनिया में कोई नहीं है।  

01 October 2018, 17:52