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देवदूत प्रार्थना के उपरांत आशीष देते संत पापा देवदूत प्रार्थना के उपरांत आशीष देते संत पापा  (AFP or licensors)

देवदूत प्रार्थना के पूर्व संत पापा का संदेश

वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 30 सितम्बर को संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना के पर्व अपने में बदलाव लाने का संदेश दिया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

संत पापा ने कहा, "इस रविवार का सुसमाचार पाठ (मार.9:38-43.45.47-48) हमारे लिए, शिष्यों के साथ येसु के जीवन के अत्यन्त निर्देशात्मक विवरण को प्रस्तुत करता है। उन्होंने देखा कि एक व्यक्ति येसु के नाम से अपदूतों को निकाल रहा था जो येसु के शिष्यों के दल का नहीं था, अतः वे उसे रोकना चाहते थे। योहन बड़े उत्साह से येसु को इस बात की खबर देकर, उनका समर्थन चाहता था किन्तु येसु ने इसके विपरीत उत्तर दिया, "उसे मत रोको क्योंकि कोई ऐसा नहीं, जो मेरा नाम ले कर चमत्कार दिखाये और बाद में मेरी निन्दा करें।" (पद.39-40)

ईश्वर की योजना

संत पापा ने कहा कि योहन एवं अन्य शिष्य इस घटना में बंद मनोभाव को दर्शाते हैं जो ईश्वर की योजना के अनुसार नहीं है। येसु की योजना अनुसार एक भला कार्य चाहे वह किसी भी व्यक्ति के द्वारा किया गया हो, एक शिष्य के कार्य को पूरा करता है। दूसरी ओर, येसु ईश्वर की आत्मा की स्वतंत्रता के लिए पूरी तरह खुले हैं जो अपने कार्यों को किसी भी सीमा के घेरे में नहीं रखते। अपने इस मनोभाव से येसु अपने शिष्यों को शिक्षा देना चाहते हैं। आज भी वे हमें आंतरिक रूप से स्वतंत्र करना चाहते हैं।

शिष्यों का मनोभाव

संत पापा ने कहा कि इस घटना पर चिंतन करना एवं आत्मजाँच करना अच्छा है। येसु के शिष्यों का मनोभाव स्वभाविक था यह बहुत साधारण था तथा इस तरह का मनोभाव हम सभी ख्रीस्तीय समुदायों में देख सकते हैं, शायद हमारे समुदाय में भी। विश्वास में, उत्साह के साथ हम एक निश्चित अनुभव की प्रामाणिकता की रक्षा करना चाहते हैं किन्तु साथ ही साथ, इसमें प्रतिस्पर्धा का भय होता है जो बुरा है, प्रतिस्पर्धा का डर इसलिए कि व्यक्ति नये शिष्यों को अपनी ओर न खींच ले, अतः हम दूसरों की अच्छाई की सराहना नहीं कर सकते हैं। हमें वह अच्छा इसलिए नहीं लगता क्योंकि वह हमारा नहीं है। यह एक प्रकार का आत्म-निर्देशन है। निश्चय ही, यह धर्म-परिवर्तन की जड़ है। संत पापा बेनेडिक्ट सोलहवें ने कहा था कि कलीसिया धर्म-परिवर्तन से नहीं बढ़ती बल्कि आकर्षण से बढ़ती है जो दूसरों को साक्ष्य देने तथा पवित्र आत्मा की शक्ति से बढ़ती है।

ईश्वर की महान स्वतंत्रता

ईश्वर की महान स्वतंत्रता उनके देने में प्रकट हुआ है जो हमारे मनोभाव एवं संबंध में बदलाव लाने की मांग करता है। संत पापा ने कहा कि आज येसु हमें यही निमंत्रण दे रहे हैं। वे मित्र या शत्रु, हम या वे, की श्रेणी से नहीं सोचते और न ही कौन अंदर है और कौन बाहर, कौन मेरा है और कौन तुम्हारा उसपर ध्यान दिये बिना आगे बढ़ते और हृदयों को खोलते हैं ताकि वे उन्हें पहचान सकें, इस तरह ईश्वर के असाधारण एवं अप्रत्याशित कार्यों को वे भी कर सकते हैं जो उनके शिष्यों के समुदाय में न हों।

संत पापा ने कहा कि यह उन लोगों के नाम और उद्भव के मुकाबले, अच्छा, सुंदर और सत्य की वास्तविकता के प्रति अधिक चौकस होने का विषय है, जो इसे करते हैं।

दूसरों का न्याय करने के बदले अपने आप की जाँच

सुसमाचार के दूसरे भाग पर गौर करते हुए संत पापा ने कहा कि दूसरों का न्याय करने के बदले हमें अपने आप की जाँच करनी चाहिए तथा उन सभी चीजों से समझौता किये बिना उन्हें अलग कर देना चाहिए जो ठोकर का कारण बनते तथा लोगों के विश्वास के कमजोर करते हैं।

माता मरियम से प्रार्थना

धन्य कुँवारी मरियम जो ईश्वर के विस्मय को विनम्रता पूर्वक स्वीकार करने वालों की आदर्श हैं, हमें हमारे बीच प्रभु की उपस्थिति को पहचानने में मदद करे, ताकि वे जब कभी हमारे बीच प्रकट हों हम उन्हें पहचान सकें, ऐसे समय में भी जब यह सोच के परे हो अथवा सामान्य स्थित में न हो। हमें अपने समुदाय को ईर्ष्या एवं बंद हुए बगैर प्रेम करना सिखला तथा पवित्र आत्मा के महान कार्य के क्षितिज को खोल दे।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

01 October 2018, 14:52