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रक्षक दूत रक्षक दूत 

रक्षक दूत यात्रा में हमारे साथी

आज काथिलक कलीसिया रक्षक दूतों का पर्व मनाती है जिसकी शुरूआत 2 अक्टूबर 1670 को हुई थी। इस पर्व को संत पापा क्लेमेंट दसवें ने निर्धारित किया है। रक्षक दूतों को संत पापा फ्राँसिस ने "यात्रा में साथी" कहा है जो हमें बुराई से बचाते हैं।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 2 अक्तूबर 2018 (रेई)˸ 2 अक्टूबर को कलीसिया रक्षक दूतों का पर्व मनाती है जिन्हें ईश्वर ने अपनी सृष्टि की रक्षा की जिम्मेदारी सौंपी है। 

संत पापा ने 2 अक्टूबर को एक ट्वीट प्रेषित कर रक्षक दूतों की याद की। उन्होंने कहा, "रक्षक दूतों की उपस्थिति न केवल यात्रा में हमारा साथ देने के लिए बल्कि हमें रास्ता दिखाने के लिए है कि हम किधर जाएँ।"

परम्परा या धर्मसिद्धांत?

पुराने एवं नये व्यवस्थान में दूतों के अस्तित्व को कलीसिया के धर्माचार्यों एवं संतों ने हमेशा पुष्ट किया है। रोम के सेक्रेड हार्ट काथलिक विश्व विद्यालय के प्रोफेसर फादर सलवातोरे वितियेल्लो ने कहा कि प्रेरितों के धर्मसार में हम कहते हैं कि ईश्वर ने दृश्यमान एवं अदृश्यमान चीजों की सृष्टि की और दूत उन्हीं अदृश्य सृष्ट जीवों में गिने जाते हैं। इस सच्चाई को संत पापा पौल षष्ठम ने 30 जून सन् 1968 में आधिकारिक रूप से घोषित किया।  

कलीसिया की परम्परा के अनुसार रक्षक दूत वे हैं जिन्हें दुनिया के सृष्ट जीव-जन्तुओं और शहरों की रक्षा करने की जिम्मेदारी सौंपी गयी है। 

देवदूत, ईश्वर और लोगों के बीच पूर्णता का प्रतीक

स्वर्गदूतों की सृष्टि ईश्वर की पूर्णता को दर्शाता है। वे आत्माएं हैं, उनके शरीर नहीं होते और वे ईश्वर की पूर्ण उपस्थिति में रहते हैं। फिर भी  बुद्धि, स्वतंत्रता एवं इच्छा शक्ति के कारण वे उच्च प्राणी माने जाते हैं जो उन्हें अन्य प्राणियों से अलग करता है। 

येसु ने कहा था मैं स्वर्गदूतों को तेरे आगे भेजूँगा वे यात्रा में तुम्हारा साथ देंगे जिससे तुम गलती में न पड़ जाओ।

 

02 October 2018, 17:18