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संत पापा फ्रांसिस, सन्त जॉन लातेरान महागिरजाघर में रोता रोमाना के प्रशिक्षण शिविर प्रतिभागियों को संबोधन संत पापा फ्रांसिस, सन्त जॉन लातेरान महागिरजाघर में रोता रोमाना के प्रशिक्षण शिविर प्रतिभागियों को संबोधन 

संकट में पड़े दम्पत्तियों के समीप रहने का आह्वान

रोम में विवाह एवं परिवार पर सम्पन्न दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के 850 प्रतिभागियों को गुरुवार को रोम स्थित सन्त जॉन लातेरान महागिरजाघर में सम्बोधित करते हुए सन्त पापा फ्राँसिस ने विवाह संस्कार की धर्मशिक्षा को रेखांकित किया और कहा कि ख्रीस्तीय विश्वास कमज़ोर होने के कारण ही विवाहित दम्पत्ति वैवाहिक जीवन की कठिनाइयों को सहने में समर्थ नहीं होते हैं।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 28 सितम्बर 2018 (रेई, वाटिकन रेडियो): सन्त पापा फ्राँसिस ने काथलिक धर्मानुयायियों से आग्रह किया है कि वे वैवाहिक संकट में पड़े दम्पत्तियों के समीप रहें तथा उनके समक्ष विवाह संस्कार के सौन्दर्य की प्रकाशना करें.

विवाह एवं परिवार पर प्रशिक्षण शिविर

रोम में विवाह एवं परिवार पर सम्पन्न दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के 850 प्रतिभागियों को गुरुवार को रोम स्थित सन्त जॉन लातेरान महागिरजाघर में सम्बोधित करते हुए सन्त पापा फ्राँसिस ने विवाह संस्कार की धर्मशिक्षा को रेखांकित किया और कहा कि ख्रीस्तीय विश्वास कमज़ोर होने के कारण ही विवाहित दम्पत्ति वैवाहिक जीवन की कठिनाइयों को सहने में समर्थ नहीं होते हैं.  

सन्त पापा ने कहा कि विवाह के इच्छुक युवाओं को उपयुक्त रूप से विवाह की ज़िम्मेदारियों के प्रति जागरुक किया जाना चाहिये. इसके लिये उन्होंने कहा कि विवाह की तैयारी, विवाह समारोह तथा उसके बाद के प्रथम वर्षों में अनवरत दम्पत्तियों के समीप रहने की आवश्यकता है.

रोम धर्मप्रान्त तथा परमधर्मपीठीय प्रेरितिक अदालत के तत्वाधान में आयोजित इस दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में विवाह सम्बन्धी धर्मशिक्षा प्रदान करने वाले पुरोहितों, प्रेरितिक कार्यकर्त्ताओं तथा काथलिक दम्पत्तियों के 850 प्रतिनिधियों ने भाग लिया.

 जागरुक चयन

परिवार को कलीसिया का गर्भ गृह निरूपित कर सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा कि विवाह के इच्छुक दम्पत्तियों में उनकी ज़िम्मेदारियों के प्रति जागरुकता होनी चाहिये तथा कलीसियाई प्रशिक्षण शिविरों को इन्हीं पर केन्द्रित होना चाहिये. उन्होंने कहा कि परिवार एवं विवाह बहुत ही जटिल एवं संवेदनशील क्षेत्र है जिसके लिये ख्रीस्तीय विश्वास में सुदृढ़ होने की नितान्त आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि जिन व्यक्तियों का विश्वास कमज़ोर होता है वे चुनौतियों का सामना करने में असमर्थ होते तथा विवाह विच्छेद को ज़रूरी मान बैठते हैं.

अपने प्रेरितिक उदबोधन आमोरिस लेतित्सिया को उद्धृत कर सन्त पापा कहा कि युवाओं के लिये ख्रीस्तीय विवाह की तैयारी अनिवार्य है जो केवल कुछ ही बैठकों के साथ समाप्त नहीं हो जाना चाहिये क्योंकि विवाह केवल एक सामाजिक घटना नहीं है अपितु यह एक यथार्थ ख्रीस्तीय संस्कार है. उन्होंने कहा कि वैवाहित बन्धन दम्पत्तितयों से जागरुक चयन की मांग करती है मेंिसमें एक ऐसे बन्धन का निर्माण निहित है जिसके साथ कभी विश्वासघात नहीं किया जा सकता.   

दम्पत्तियों को अकेला न छोड़ा जाये

सन्त पापा ने कहा कि विवाह के उपरान्त भी्पत्तियों को अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिये बल्कि उनके समीप रहकर उन्हें समर्थन दिया जाना चाहिये. उन्होंने कहा, "कई काथलिक धर्मप्रान्तों में शिविरों, बैठकों, सम्मेलनों, प्रशिक्षण सत्रों एवं आध्यात्मिक साधनाओं का आयोजन किया जाता है, इन पहलों को प्रोत्साहन एवं समर्थन दिये जाने की आवश्यकता है ताकि युवा दम्पत्तियों को पारिवारिक एवं मनोवैज्ञानिक तौर पर मार्गदर्शन दिया जा सके. "

उन्होंने कहा, "प्रायः, वैवाहिक जीवन की समस्याओं की जड़ केवल दम्पत्तियों की ग़ैरसमझदारी एवं अपरिक्वता नहीं होती है अपितु उनका कमज़ोर ख्रीस्तीय विश्वास होता है. ख्रीस्त के सुसमाचार के आधार पर नव-दम्पत्तितयों के विश्वास में सुदृढ़ करने की आवश्यकता है इसलिये कि विश्वास दैनिक न की चुनौतियों का सामना करने में हमारी मदद करता है. "   

28 September 2018, 11:27