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कोमलता द्वारा संसार में ईश्वर का प्रेम

संत पापा फ्राँसिस ने 13 सितम्बर को "कोमलता का ईशशास्त्र" सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रतिभागियों से मुलाकात की जो कल असीसी जायेंगे। संत पापा ने याद किया कि ईश्वर की कोमलता हमें यह समझने में मदद करती है कि प्रेम में ही जीवन की सार्थकता है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 13 सितम्बर 2018 (रेई)˸ ईश्वर द्वारा प्रेम किये जाने की अनुभूति तथा उनसे प्रेम करने की प्रेरणा की सुन्दरता, ये संत पापा के संदेश के दो मुख्य बिन्दु थे।  

"कोमलता का ईशशास्त्र" सम्मेलन का आयोजन "कासा देल्ला तेनेरेत्सा" ने किया है जिसकी स्थापना 2003 में इटली के पेरूजा में हुई थी। दो दम्पतियों ने मोनसिन्योर कार्लो रोकेत्ता के साथ मिलकर इसकी स्थापना की थी जो अब समस्या में पड़े दम्पतियों के लिए एक सहायता का केंद्र बन गया है। सम्मेलन की शुरूआत 14 सितम्बर को असीसी में होगी जो रविवार तक चलेगी।

ईशशास्त्र एवं कोमलता ˸ विश्वास द्वारा एक बंधन

संत पापा ने कहा, विश्वास ईशशास्त्र तथा कोमलता के बीच एक कड़ी है जो पारस्परिक सम्बन्ध की याद दिलाती है। संत पापा ने अपने संदेश में इस बात पर बल दिया कि ईशशास्त्र को निराकार नहीं बल्कि वैचारिक होना चाहिए जो येसु (शब्द जिसने शरीर धारण किया) से मुलाकात करने पर आता है। अतः यह ईश्वर के ठोस प्रेम को बांटने का निमंत्रण है। कोमलता हमारे लिए ईश्वर के स्नेह को एक अच्छे ठोस वस्तु के रूप में परिवर्तित करने का निमंत्रण है। 

ईशशास्त्र कोई भावना नहीं

संत पापा ने कहा, "हम वहाँ से शुरू करते हैं जहाँ हमें महसूस होता है।" उन्होंने कहा कि आज चीजें पहले के समान नहीं भी हो सकतीं किन्तु यह वास्तविक है और ईशशास्त्र इस आयाम की अवहेलना नहीं करने की मांग करती है। 

ईशशास्त्र इस अस्तित्व संबंधी खोज तथा ईशवचन से आने वाले प्रकाश का समर्थन करने का निमंत्रण देती है। इस तरह कोमलता का ईशशास्त्र दिव्य करुणा बन जाती है। यह संभव है क्योंकि ईश्वर का प्रेम कोई कोरी कल्पना नहीं है बल्कि यह व्यक्तिगत एवं ठोस है और जिनके साथ पवित्र आत्मा का गहरा संबंध है।

कोमलता, ईश्वर पर भरोसा

"प्रेम किये जाने के एहसास" पर चिंतन करते हुए संत पापा ने कहा कि कोमलता उस रास्ते को दिखलाती है जिसपर हम दिव्य करुणा को देख पाते हैं, साथ ही साथ, ईश्वर के उस ममतामयी चेहर को भी देखते हैं जो हमें अनन्त प्रेम से प्यार करते हैं, एक माता के प्रेम से भी अधिक जो अपने दुधमुंहे बच्चे से करती है। कोमलता हमें स्मरण दिलाती है कि ईश्वर हर परिस्थिति में हमारे साथ हैं अतः प्रेम किये जाने का एहसास करने के लिए हमें ईश्वर पर भरोसा रखने की आवश्यकता है।

क्रूस, कोमलता की मुहर

इस प्रकार विश्वास में जीने, प्रेम से प्रज्वलित होने एवं आशा बनाये रखने, एकता के सूत्र में बंधने एवं दिव्य प्रेम के स्पर्श और इसके द्वारा घायल किये जाने में ईशशास्त्र मधुर बन जाता है। क्रूस वास्तव में कोमलता की मुहर है जो प्रभु के घावों से आता है। उनका दुःखभोग हमें निमंत्रण देता है कि हम अपने कठोर हृदय को कोमल बनाये ताकि यह ईश्वर के प्रेम के लिए हो तथा उसके द्वारा ईश्वर एवं लोगों के प्रति उत्साह का संचार हो।  

प्रेम, जीवन की सार्थकता

जब व्यक्ति सचमुच प्यार किया गया महसूस करता है तब वह भी उस प्रेम की ओर प्रेरित होता है। संत पापा ने कहा कि ईश्वर में असीम कोमलता है अतः उनके प्रतिरूप में गढ़ गये मनुष्यों में भी वही कोमलता होनी चाहिए।

स्नेह या कोमलता को केवल भावनाओं तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि यह मानवीय स्वतंत्रता को विरूपित करने वाले से ऊपर उठने और अपने आप से बाहर निकलने का पहला कदम है। ईश्वर की कोमलता हमें यह समझने में मदद देती है कि प्रेम जीवन की सार्थकता है। हम दुनिया में उस प्रेम को देने की चाह महसूस करते हैं जिसको हमने ईश्वर से पाया है, कलीसिया, परिवार, समाज में इसको प्रकट करने तथा उसकी सेवा में अपने को अर्पित करने के द्वारा। हम जो कुछ भी करते हैं उसे एक कर्तव्य के भाव से नहीं किन्तु प्रेम से करने के द्वारा हम ईश्वर के प्रेम को प्रकट करते हैं।

कासा दी तेनेरेत्सा दम्पतियों के लिए एम्बुलेंस, कार्डिनल बास्सेती

पेरूजा के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल गौलतियेरो बासेत्ती ने कहा कि कासा दी तेनेरेत्सा घायलों को चंगा करने हेतु एक एम्बुलेंस के समान है। उन्होंने जानकारी दी कि हर साल करीब 600 दम्पति सेमिनार में भाग लेते हैं। 

 

13 September 2018, 16:42