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2018.09.29 विश्व बधिर दिवस 2018.09.29 विश्व बधिर दिवस 

विश्व बधिर दिवस पर बहिष्कार की संस्कृति का विरोध, संत पापा

संत पापा फ्राँसिस ने विश्व बधिर दिवस की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर बधिरों के लिए इटली की राष्ट्रीय एजेंसी को एक संदेश भेजा।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार 29 सितम्बर 2018 (वाटिकन न्यूज) : संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार 29 सितंबर को मनाये जाने वाले विश्व बधिर दिवस पर समाज के बधिरों के प्रति बहिष्कार की संस्कृति का विरोध करते हुए समाज में उनका स्वागत और सम्मिलित करने हेतु बढावा देने को कहा।

बधिर विश्व संघ (डब्ल्यूएफडी) ने 1958 में विश्व बधिर दिवस को मनाने की शुरुआत की, उस वर्ष 28 सितंबर को रोम में पहला उत्सव मनाया गया। बाद में सितम्बर के अंत में एक पूर्ण सप्ताह तक बढ़ा दिया गया, जो बधिरों का अंतरराष्ट्रीय सप्ताह बन गया (आईडब्ल्यूडी)। विश्व बधिर दिवस बधिरों का अंतरराष्ट्रीय सप्ताह (आईडब्ल्यूडी) के अंतिम दिन अर्थात इस वर्ष आज 29 सितम्बर को चिन्हित करता है।

बहिष्कार की संस्कृति

बधिरों के लिए इटली की राष्ट्रीय एजेंसी को अपने संदेश में, संत पापा फ्राँसिस ने भले इच्छा वाले पुरुषों और महिलाओं का शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने वर्षों से बहिष्कार की संस्कृति का विरोध किया है और "हर क्षेत्र में हर इंसान के जीवन के मूल्य और रक्षा के लिए विशेष रूप से, बधिर लोगों की गरिमा" हेतु काम किया है।

उन्होंने कहा कि बधिरों के लिए इटली की राष्ट्रीय एजेंसी का इतिहास उन लोगों से बना है जिन्होंने बधिर लोगों और उनके परिवारों को कभी अकेला नहीं छोड़ा है हमेशा बधिर लोगों के आत्मनिर्भरता में विश्वास करना जारी रखा है। संत पापा के अनुसार, यही वजह है कि कई बधिर लोग और उनके परिवार अब अकेला महसूस नहीं करते हैं और यह एक बड़ी उपलब्धि है।

धारा के विपरीत बहना

संत पापा ने बधिरों के लिए राष्ट्रीय एजेंसी के सदस्यों से कहा कि वे लोगों की भीड़ बनाने के लिए संघ में प्रवेश नहीं किये हैं, लेकिन उन्हीं के समान जो कठिनाई में हैं उनके साथ रहने और उनकी इच्छाओं को हस्तांतरित करने के लिए इस संघ को बनाया है और सबसे महत्वपूर्ण यह है कि वे अतुलनीय मानव संपत्ति के वाहक हैं।

संत पापा ने आग्रह किया, "हम एक साथ धारा के खिलाफ जाने के लिए बुलाए गये हैं, हमें "हर पुरुष और महिला के सम्मानित जीवन के अधिकार को सुरक्षित रखने का सतत् प्रयास करना चाहिए।" उन्होंने कहा," हमें सिर्फ कुछ ज़रूरतों को पूरा कर संतुष्ट हो जाना नहीं है, लेकिन इससे भी बढ़कर किसी की व्यक्तिगत इच्छा का स्वागत करना और स्वतंत्र रूप से मान्यता प्राप्त जीवन जीने हेतु सक्षम बनाना है।"

29 September 2018, 16:36